नई दिल्ली । भारत और चीन द्विपक्षीय व्यापार को निरंतर बढ़ावा देने लिए एक रोडमैप बनाने पर सहमत हो गए हैं। वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु और उनके चीनी समकक्ष झोंग शान के बीच हुई आर्थिक संबंध, व्यापार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर चीन-भारत संयुक्त समूह की बैठक में इस बात पर सहमति बनी। बैठक में व्यापार और अन्य संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की गयी।

वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक दोनों मंत्री द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए मध्यावधि और दीर्घावधि रोडमैप बनाने पर सहमत हो गए। इस रोडमैप में कार्य बिन्दुओं के साथ-साथ उनकी समयसीमा भी होगी। मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश विश्व की दो सबसे बड़ी उभरती अर्थव्यस्था हैं और दुनिया की 35 प्रतिशत आबादी तथा 20 प्रतिशत जीडीपी इनसे आता है। हालांकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार वैश्विक व्यापार का एक प्रतिशत से भी कम है। दोनों नेताओं ने मंगलवार सुबह नाश्ते पर मुलाकात की।

चीनी पक्ष ने बासमती चावल, अनार, नारियल, केला और अन्य फल व सब्जियों सहित भारतीय कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच उपलब्ध कराने के प्रावधान जल्द करने के लिए प्रतिबद्धता दोहरायी। मंत्रालय का कहना है कि बैठक के दौरान व्यापार घाटे और भारतीय उत्पादों को चीन के बाजारों में बेहतर पहुंच दिलाने के मुद्दे को भारत ने उठाया। इस पर चीन ने संयुक्त आर्थिक समूहों की बैठकों में व्यापक फ्रेमवर्क के आधार पर इस संबंध में चिंताओं को दूर करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। साथ ही दोनों देशों के नेताओं ने फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में द्विपक्षीय कारोबार को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की।

दोनों देश द्विपक्षीय निवेश समझौता करने पर भी सहमत हो गए। इसका मकसद अधिक स्थिर, पारदर्शी और स्थिर कानूनी माहौल बनाना है ताकि दोनों देशों में निवेश को बढ़ावा दिया जा सके। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2000 से दिसंबर 2017 तक चीन से भारत में 1.78 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अक्टूबर के दौरान भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 36.73 अरब डॉलर रहा। चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा वर्ष 2016-17 में 51 अरब डॉलर तथा 2015-16 में 52.69 अरब डॉलर था।

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