नई दिल्ली । सीबीआइ ने एक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करके 11 नाबालिगों (सभी लड़के) को उसके चंगुल से मुक्त कराया है। यह गिरोह दिल्ली और पंजाब में सक्रिय था और एजुकेशन वीजा पर इन नाबालिगों को अमेरिका भेजने की तैयारी में था।

सीबीआइ प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब में एक और दिल्ली में पांच ठिकानों पर छापेमारी कर इस गिरोह का भंडाफोड़ किया गया। गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार करके उनके खिलाफ जांच की जा रही है। आरोपितों की पहचान संदीप सिंह लूथरा, अमित जोत सिंह, रोहित गॉबा, अंशिका मथारू और रचना डेविड के रूप में हुई है।

वे दिल्ली के दक्षिण पश्चिम जिले में एक ट्रैवल एजेंसी चलाते हैं। गिरोह नाबालिगों के माता-पिता को उच्च शिक्षा के नाम पर फंसाता था। हर बच्चे के अभिभावक से अमेरिकी वीजा बनवाने के नाम पर 30 लाख रुपये वसूले गए थे। वीजा बनवाने के लिए गिरोह ने फर्जी और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।

दस्तावेजों में इन नाबालिगों को पंजाब में पठानकोट के एक स्कूल का छात्र दिखाया गया है। जबकि कोई भी दर्शाए गए स्कूल से संबंधित नहीं है। गिरोह का एक सदस्य भी उनके साथ स्कूल के प्रिंसिपल के रूप में जाने वाला था। पंजाब से दिल्ली लाकर इन नाबालिगों को प्रशिक्षित भी किया गया था ताकि अमेरिकी दूतावास में साक्षात्कार के दौरान वे खुद को स्कूली छात्र के रूप में प्रस्तुत कर सकें।

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सीबीआइ अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं यह उसी गिरोह से जुड़ा मामला तो नहीं है, जिनके चंगुल से पिछले साल दिसंबर में 25 नाबालिगों को छुड़ाया गया था। पिछले साल पकड़ा गया गिरोह नाबालिगों को रग्बी ट्रेनिंग कैंप के नाम पर फ्रांस भेजने की तैयारी में था।

उस समय गिरोह के तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। फ्रांसीसी जांच एजेंसी ने तस्करी के जरिये फ्रांस ले जाए गए एक बच्चे को बरामद करने के बाद इंटरपोल को इसकी सूचना दी थी। जिसके बाद सीबीआइ को इस मानव तस्कर गिरोह के बारे में पता चला था।

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