इलाहाबाद। अयोध्या में राम मंदिर को लेकर सुलह करने के शिया वक्फ सेंट्रल बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी का प्रयास जारी है। कल अयोध्या में बात न बन पाने के बाद आज वह इलाहाबाद में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से मुलाकात करने पहुंचे हैं।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि से बाघंबरी गद्दी में भेंट के बाद वसीम रिजवी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर को लेकर हम बेहद गंभीर हैं। वहां पर राम मंदिर को लेकर हमारी सुलह की कोशिश जारी रहेगी। हम चाहते हैं कि मंदिर विवाद का निस्तारण आसानी से हो। इसको लेकर हम निरंतर प्रयास करते रहेंगे।

इससे पहले कल अयोध्या में भी वसीम रिजवी संतों से भेंट करने गए थे। अयोध्या में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद आपसी सहमति से हल करने की मुहिम के तहत अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि एवं शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी रामनगरी पहुंचे। उन्होंने रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास सहित निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत धर्मदास एवं दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेशदास से भेंट की। मीडिया से मुखातिब होने से पहले मंदिर-मस्जिद विवाद से जुड़े प्रतिनिधियों ने महंत धर्मदास के सात बंद कक्ष में बैठक की। बैठक में कुछ ही देर में बाबरी मस्जिद के मुद्दई मो. इकबाल भी शामिल हुए। इस दौरान लगा कि विवाद के हल का कोई ठोस फार्मूला आकार लेने को है।

इसी बीच बंद कक्ष का दरवाजा खुला और मो. इकबाल झल्लाए से बाहर निकले। उन्होंने शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के रुख को सुन्नियों का अपमान बताया। बकौल इकबाल, बैठक में शिया बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि बाबरी मस्जिद शिया मस्जिद है और इस मामले में सुन्नियों की कोई जरूरत नहीं है। यह सुनते ही बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकले इकबाल ने शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के रुख को सहमति के प्रयासों में बाधक बताया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के पहले से ही बाबरी मस्जिद की लड़ाई सुन्नी लड़ते रहे हैं और शियाओं ने कभी कोर्ट-कचहरी तक जाने की जरूरत नहीं समझी।

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गिरि को पांच दिसंबर तक फार्मूला तैयार होने का विश्वास

कक्ष से बाहर निकले महंत नरेंद्र गिरि, वसीम रिजवी एवं महंत सुरेशदास मीडिया से मुखातिब हुए। गिरि ने सहमति के प्रयासों के प्रति उत्साह व्यक्त किया और रामजन्मभूमि से मस्जिद का दावा छोडऩे के लिए शिया बोर्ड के प्रति आभार जताया।

उन्होंने बैठक छोड़कर जाने वाले इकबाल का रुख सकारात्मक बताया और कहा कि हम उन्हें मना लेंगे। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष के अनुसार सुप्रीमकोर्ट में पांच दिसंबर को सुनवाई शुरू होने से पूर्व सहमति का मसौदा तैयार कर कोर्ट में दाखिल कर दिया जाएगा। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि सहमति के प्रयासों में विहिप का भी सहयोग हासिल होगा।

धर्मदास ने विहिप की भूमिका पर उठाया सवाल

महंत धर्मदास ने विहिप की भूमिका पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि रामजन्मभूमि के मामले में विहिप पार्टी ही नहीं है। उन्होंने कहा, कोई श्रद्धालु किसी मंदिर के निर्माण में सहयोग कर उसके प्रबंधन का अधिकारी नहीं हो जाता।

NEWS SOURCE :- www.jagran.com

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