झारखंड में बारिश ने बदली तस्वीर, धान की रोपाई 83.43% पहुंची; एक सप्ताह में 8% की बढ़ोतरी
रांची
अलनीनो की वजह से कम वर्षा होने के अनुमान के विपरीत हाल के दिनों में अच्छी वर्षा हुई है। इसकी वजह से धान की खेती में तेजी आई है।
अब तक 83.43 प्रतिशत धान का आच्छादन हुआ है। जबकि पूरे खरीफ की फसल आच्छादन 76.11 प्रतिशत हुआ है। जिसमें धान के अलावा मक्का, दलहन और तिलहन की खेती भी शामिल है।
इस सप्ताह हुए वर्षा का लाभ उठाते हुए किसानों धान की रोपाई तेजी की है, जो एक सप्ताह में आठ प्रतिशत बढ़ गया है। हालांकि, अभी राज्य के आधे जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई है।
लेकिन मौसम विभाग की ओर से अलर्ट की वजह से यह उम्मीद जताई जा रही है कि 31 अगस्त तक पूरे राज्य में सामान्य औसत तक वर्षा हो पाएगी, जिसका फायदा खरीफ सीजन की फसलों को मिलेगा।
पूर्व में मौसम विभाग की ओर से अलनीनो की वजह से राज्य में औसतन 35 प्रतिशत कम वर्षा होने का अनुमान लगाया था। लेकिन मौसम विभाग की माने तो पूरे राज्य में औसतन दस प्रतिशत वर्षा की कमी है। इसे सामान्य वर्षा कहा जा सकता है। क्योंकि मौसम विभाग के अनुसार 19 प्रतिशत से लेकर माइन 19 प्रतिशत तक की वर्षा को सामान्य माना जाता है।
11 जिलों में सामान्य वर्षा, चार जिलों में कम हुई बारिश
जुलाई के बाद अगस्त माह में राज्य में वर्षा में तेजी आयी है। जिसकी वजह से राज्य के 11 जिलों में सामान्य वर्षा हुआ है। लेकिन अभी पाकुड़ जिले में 53 प्रतिशत, देवघर में 48 प्रतिशत, चतरा और पश्चिमी सिंहभूम में 44 प्रतिशत
कम वर्षा दर्ज की गई है।
इस बार सबसे ज्यादा कोल्हान प्रमंडल में धान का आच्छादन हुआ है। यहां पर 90.17 प्रतिशत धान की रोपनी हो चुकी है। अभी सबसे कम पलामू प्रमंडल में 68.59 प्रतिशत धान की रोपाई हुई है।
श्रीअन्न पर किसानों को मिली प्रोत्साहन राशि
इस बार कम वर्षा के अलर्ट की वजह से कृषि विभाग की ओर से आकस्मिक योजना बनाई गई थी। जिसकी वजह से
किसानों को श्रीअन्न की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था, ताकि संभावित सुखाड़ में भी किसानों को
आर्थिक रूप से मदद मिल पाए।
इस बार किसानों को तीन हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी दी गई है। इसके लिए करीब 30 हजार किसानों ने पंजीयन भी कराया है।
प्रमंडल वार धान का आच्छादन
दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल - 85.46 प्रतिशत
पलामू प्रमंडल- 68.59 प्रतिशत
कोल्हान प्रमंडल- 90.17 प्रतिशत
उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल- 77.62 प्रतिशत
संताल परगना प्रमंडल- 84.27 प्रतिशत
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