क्लर्क-जूनियर असिस्टेंट की वरिष्ठता पर CAT का बड़ा फैसला, सेवा अवधि के आधार पर तय होगी प्राथमिकता
चंडीगढ़.
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की चंडीगढ़ बेंच ने क्लर्कों और जूनियर असिस्टेंट की वरिष्ठता को लेकर चल रहे विवाद पर अहम फैसला सुनाया है। कैट ने चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिया है कि कॉमन कैडर में भर्ती क्लर्कों और विभागीय कैडर से कॉमन कैडर में शामिल होने का विकल्प देने वाले कर्मचारियों की संयुक्त वरिष्ठता सूची तैयार की जाए।
वरिष्ठता तय करते समय कैडर में की गई कुल सेवा अवधि को आधार बनाया जाएगा। कैट ने प्रशासन की ओर से 23 और 24 सितंबर 2021 को जारी किए गए उन आदेशों को रद कर दिया है, जिनके आधार पर कॉमन कैडर के क्लर्कों की अलग वरिष्ठता सूची तैयार की जा रही थी। साथ ही 16 सितंबर 2020 और 14 दिसंबर 2020 के पत्रों के तहत कर्मचारियों को कॉमन कैडर में शामिल होने का दिया गया विकल्प बहाल कर दिया गया है। प्रशासन को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
1993 से 2014 में भर्ती कर्मचारियों ने उठाया था मामला
यह मामला विकास शर्मा समेत 23 कर्मचारियों की ओर से दायर OA नंबर 1336/2021 से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं में जीएमसीएच-32 समेत विभिन्न विभागों में कार्यरत जूनियर असिस्टेंट और क्लर्क शामिल हैं। इन कर्मचारियों का कहना था कि वे 1993 से 2014 के बीच विभागीय कैडर में भर्ती हुए, जबकि कॉमन कैडर के तहत शामिल कई कर्मचारी 2016 से 2018 के बीच नियुक्त हुए। इसके बावजूद अलग वरिष्ठता सूची बनने से बाद में भर्ती हुए कर्मचारी पदोन्नति में उनसे आगे निकल सकते हैं। याचिकाकर्ताओं ने 23 सितंबर 2021 के मेमो और 24 सितंबर 2021 के सर्कुलर को चुनौती देते हुए सभी संबंधित क्लर्कों की एक समान वरिष्ठता सूची बनाने की मांग की थी।
2015 में बना था कॉमन कैडर
कैट ने अपने फैसले में कहा कि 2015 से पहले विभिन्न विभागों में क्लर्कों के लिए अलग-अलग भर्ती नियम थे। प्रशासन ने 29 मई 2015 को ग्रुप-सी क्लर्क और स्टेनो-टाइपिस्ट के लिए कॉमन कैडर भर्ती नियम अधिसूचित किए। इसके बाद विभागीय भर्ती नियमों को समाप्त कर मिनिस्टीरियल पदों को कॉमन कैडर में लाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद 23 सितंबर 19 को सीनियर असिस्टेंट और सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-2 के लिए कॉमन भर्ती नियम अधिसूचित हुए। इन नियमों में पांच साल की सेवा पूरी करने वाले क्लर्क और जूनियर असिस्टेंट को सीनियर असिस्टेंट के पद पर पदोन्नति के लिए पात्र माना गया।
अलग-अलग प्रमोशन चैनल पर कैट ने जताई आपत्ति
अधिकरण ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में एक तरफ 2016 से पहले भर्ती हुए कर्मचारियों को अपने मूल विभाग में पदोन्नति का इंतजार करना पड़ता है, जबकि 2016 के बाद कॉमन कैडर में भर्ती कर्मचारियों के लिए कॉमन कैडर में पदोन्नति का रास्ता खुला है। इससे एक ही तरह का काम करने वाले कर्मचारियों के बीच पदोन्नति के अवसरों में असमानता पैदा हो रही है। कैट ने स्पष्ट किया कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए पात्रता, वेतन और पदोन्नति के अवसरों में समानता होनी चाहिए। हालांकि, अधिकरण ने यह भी माना कि इस स्तर पर सभी विभागों के कर्मचारियों की एक ही समेकित वरिष्ठता सूची बनाना प्रशासनिक रूप से व्यावहारिक नहीं होगा।
विकल्प देने वालों की सेवा अवधि से तय होगी वरिष्ठता
कैट ने निर्देश दिया कि 16 सितंबर 2020 और 14 दिसंबर 2020 के पत्रों के तहत कॉमन कैडर में शामिल होने का विकल्प देने वाले कर्मचारियों को भी सूची में शामिल किया जाए। कॉमन कैडर में सीधे भर्ती कर्मचारियों और विभागीय कैडर से विकल्प के आधार पर शामिल कर्मचारियों के बीच इंटर-से वरिष्ठता उनकी कुल सेवा अवधि के आधार पर तय की जाएगी। हालांकि, जो कर्मचारी विकल्प देने के बाद इस मामले के लंबित रहने के दौरान अपने मूल विभाग में नोट-II के तहत पदोन्नत हो चुके हैं, उन्हें कॉमन कैडर की नई वरिष्ठता सूची से बाहर रखा जाएगा।
अधिकरण ने यह भी कहा कि खाली पदों को नियमित रूप से कॉमन कैडर में स्थानांतरित करने के बजाय प्रशासन को उचित जांच-पड़ताल करनी चाहिए, ताकि विभागीय स्तर पर पदोन्नति की संभावना रखने वाले कर्मचारियों के हित प्रभावित न हों। न्यायिक सदस्य रमेश सिंह ठाकुर और प्रशासनिक सदस्य रश्मि सक्सेना साहनी की पीठ ने ओए को स्वीकार करते हुए प्रशासन को तीन महीने में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। मामले में किसी प्रकार की लागत नहीं लगाई गई है।
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