डकैत गिरोह सक्रिय नहीं, फिर भी लागू है डकैती प्रभावित क्षेत्र अधिनियम

Sep 3, 2026 - 14:46
Sep 3, 2026 - 14:47
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पूर्व गृह मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने हाईकोर्ट में दायर की जनहित याचिका, कानून की संवैधानिक वैधता को दी चुनौती

अमर कांत सिंह चौहान

ग्वालियर। (साहस समाचार ) मध्यप्रदेश में सूचीबद्ध डकैत गिरोहों के सक्रिय नहीं होने के बावजूद मध्यप्रदेश डकैती प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981 के लागू रहने पर सवाल खड़े हुए हैं। पूर्व गृह मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. गोविंद सिंह ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए ग्वालियर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।
याचिका में कहा गया है कि मध्यप्रदेश सरकार विधानसभा में अलग-अलग अवसरों पर यह जानकारी दे चुकी है कि प्रदेश में वर्तमान में कोई सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है। इसके बावजूद वर्ष 1981 में डकैती प्रभावित क्षेत्रों की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया गया अधिनियम अब भी प्रभावी है।

सामान्य आपराधिक मामलों में प्रावधानों के इस्तेमाल पर सवाल

डॉ. गोविंद सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि अधिनियम की धारा 11 और 13 का इस्तेमाल सामान्य आपराधिक मामलों में भी किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इन प्रावधानों के इस्तेमाल से नागरिकों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 14 के समानता के अधिकार और अनुच्छेद 21 के जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के संदर्भ में कानून की वैधता पर न्यायिक परीक्षण की आवश्यकता है।

बदली परिस्थितियों में कानून की प्रासंगिकता पर सवाल

याचिका में कहा गया है कि जिस दौर में यह कानून बनाया गया था, उस समय चंबल सहित प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में डकैत गिरोहों की सक्रियता गंभीर कानून-व्यवस्था की चुनौती थी। वर्तमान परिस्थितियों में, जब सरकार स्वयं विधानसभा में सूचीबद्ध डकैत गिरोहों के सक्रिय नहीं होने की जानकारी दे चुकी है, ऐसे में इस विशेष कानून को जारी रखने के औचित्य की समीक्षा जरूरी है।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मध्यप्रदेश डकैती प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981 की संवैधानिक वैधता की जांच करने तथा इसे असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है।

हाईकोर्ट के रुख पर रहेगी नजर

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के समक्ष यह महत्वपूर्ण सवाल रहेगा कि वर्तमान परिस्थितियों में इस विशेष कानून की आवश्यकता और इसके प्रावधानों की संवैधानिकता किस हद तक उचित है। अदालत इस मामले में याचिकाकर्ता के तर्कों के साथ-साथ राज्य सरकार का पक्ष भी सुनेगी।
यदि हाईकोर्ट इस याचिका पर विस्तृत सुनवाई करता है, तो इसका असर उन मामलों पर भी पड़ सकता है, जिनमें मध्यप्रदेश डकैती प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981 के प्रावधानों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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