UP में स्मार्ट मीटर के लिए उपभोक्ताओं को मिला नया विकल्प, प्रीपेड या पोस्टपेड चुनने का अधिकार

Jan 3, 2026 - 05:44
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UP में स्मार्ट मीटर के लिए उपभोक्ताओं को मिला नया विकल्प, प्रीपेड या पोस्टपेड चुनने का अधिकार

लखनऊ 

 नियामक आयोग द्वारा जारी नई कास्ट डाटा बुक में यह साफ कर दिया गया है कि बिजली उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के तहत प्रीपेड या पोस्टपेड विकल्प चुनने की पूरी आज़ादी है। यह अधिकार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के अंतर्गत उपभोक्ताओं को मिला हुआ है।

तमाम उपभोक्ता इस तरह से जबरन प्रीपेड मीटर लगाए जाने का विरोध कर रहे हैं। विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) का हवाला देते हुए आयोग से लगातार मांग की जा रही है कि अनिवार्य तौर पर प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। यह धारा उपभोक्ताओं को अधिकार देती है कि वे अपने लिए प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर का विकल्प चुनें। सोमवार को उपभोक्ता परिषद ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देकर उपभोक्ताओं के हक में आदेश जारी करने की मांग की है।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और केंद्रीय व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए अब नियामक आयोग को स्पष्ट आदेश जारी करने चाहिए ताकि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को विकल्प ही माना जाए। टैरिफ आदेश में आयोग ने कहा था कि चूंकि इस संबंध में कई हाई कोर्ट में मामला सुना जा रहा है, इसलिए वह कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं करना चाहता। अब जबकि आयोग के पास सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं तो अब वह इसका हवाला देकर स्पष्ट आदेश जारी करे। उपभोक्ता परिषद ने कहा है कि तत्काल कॉस्ट डेटा बुक भी रिवाइज करे ताकि मीटर के दाम तय हो सकें।

उपभोक्ताओं के पास यह अधिकार

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि कानून के अनुसार उपभोक्ता चाहें तो सिक्योरिटी राशि जमा कर पोस्टपेड कनेक्शन जारी रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक राज्य में इस प्रावधान का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा था, लेकिन नई कास्ट डाटा बुक ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।

 

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