मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना बना परेशानी का सबब, 1150 रुपये तक का अतिरिक्त खर्च
पार्षद के प्रमाणीकरण के बाद भी मांगे जा रहे तीन-तीन शपथ पत्र, प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल
शशिकांत गोयल
भिंड। किसी परिवार में अपनों को खोने का दुख पहले ही कम नहीं होता, लेकिन भिंड नगर पालिका में मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया भी अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती नजर आ रही है। आरोप है कि मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पार्षद की ओर से मृतक का प्रमाणीकरण किए जाने के बाद भी आवेदक से अलग-अलग शपथ पत्र लिए जा रहे हैं। इससे मृतक के परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। जानकारी के मुताबिक, भिंड नगर पालिका क्षेत्र में पिछले करीब दो वर्षों से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में आवेदकों से कई तरह के दस्तावेज और शपथ पत्र लिए जाने की व्यवस्था होने की बात सामने आ रही है। किसी वार्ड में व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद उसके परिजनों को संबंधित वार्ड पार्षद के लेटर पैड पर आवेदन अथवा मृतक की मृत्यु का प्रमाणीकरण प्रस्तुत करना होता है। इसके बाद मृतक के स्वजन से 200 रुपये के स्टांप पर शपथ पत्र लिए जाने की बात कही जा रही है। यदि मृतक की अंत्येष्टि गांव में हुई है, तो दो गवाहों के भी अलग-अलग शपथ पत्र मांगे जाने का आरोप है। इस तरह मृतक के स्वजन और दो गवाहों को मिलाकर कुल तीन शपथ पत्र तैयार कराने पड़ते हैं। बताया गया है कि 200 रुपये के स्टांप पर तैयार होने वाला शपथ पत्र नोटरी की प्रक्रिया के बाद करीब 350 रुपये तक का पड़ता है। इस हिसाब से तीन शपथ पत्रों पर लगभग 1050 रुपये खर्च हो जाते हैं। इसके अलावा नगर पालिका कर्मचारी द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर 100 रुपये मांगे जाने का आरोप भी सामने आया है। यदि इन आरोपों को जोड़कर देखा जाए तो एक मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में परिवार को करीब 1150 रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
पार्षदों ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल
इस पूरी प्रक्रिया को लेकर नगर पालिका के कुछ पार्षदों की ओर से भी सवाल उठाए जा रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि जब संबंधित वार्ड का पार्षद अपने लेटर पैड पर मृतक की मृत्यु का प्रमाणीकरण कर रहा है, तो उसके बाद परिवार से अलग-अलग शपथ पत्र लेने की आवश्यकता पर सवाल खड़ा होता है।पार्षदों का दावा है कि भिंड नगर पालिका को छोड़कर जिले की अन्य नगरीय निकायों और प्रदेश की अन्य नगर पालिकाओं में पार्षद के प्रमाणीकरण के बाद इस तरह तीन शपथ पत्र लेने की व्यवस्था नहीं है।ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि भिंड नगर पालिका में मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए यह अतिरिक्त प्रक्रिया किस आदेश या नियम के तहत लागू है? यदि यह प्रक्रिया अनिवार्य है तो इसका स्पष्ट आधार क्या है और यदि यह किसी लिखित आदेश के बिना अपनाई जा रही है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
सुविधा शुल्क के आरोप भी सामने आए
मामले में संबंधित बाबू अथवा कर्मचारी पर सुविधा शुल्क मांगने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि यदि आवेदक की ओर से सुविधा शुल्क नहीं दिया जाता है तो सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद मृत्यु प्रमाण पत्र समय पर प्राप्त करने में परेशानी होती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच की बात कही
मृत्यु प्रमाण पत्र जैसी आवश्यक नागरिक सेवा में अतिरिक्त दस्तावेज और खर्च की व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर उन परिवारों के लिए यह प्रक्रिया परेशानी का कारण बन सकती है, जो पहले ही अपने किसी सदस्य की मृत्यु के बाद आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहे होते हैं। मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से जांच कराने की बात कही गई है। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तीन शपथ पत्र लेने की व्यवस्था किसके आदेश पर लागू है, इसके पीछे क्या नियम हैं और कर्मचारियों पर लगाए जा रहे सुविधा शुल्क के आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल सवाल यही है कि मृत्यु प्रमाण पत्र जैसी जरूरी सरकारी सेवा के लिए क्या आम परिवारों को नियमों के नाम पर अतिरिक्त दस्तावेज और करीब 1150 रुपये तक का खर्च उठाना पड़ेगा, या नगर पालिका इस प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाएगी?
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