ग्राम पंचायत की जमीन से अतिक्रमण हटाने पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, लंबी प्रक्रिया की जरूरत नहीं

Sep 5, 2026 - 05:14
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ग्राम पंचायत की जमीन से अतिक्रमण हटाने पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, लंबी प्रक्रिया की जरूरत नहीं

लखनऊ

ग्राम पंचायत की जमीनों से अतिक्रमण को हटाने के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत पारित बेदखली आदेश को लागू करने के लिए लंबी और पेचीदा प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता नहीं है। कहा कि धारा 67 के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने पूजा देवी की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर यह आदेश दीया है। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि प्रावधान से ही स्पष्ट है कि धारा 67(3) के तहत अतिक्रमणकारी को बेदखल करने के लिए आवश्यक बल का प्रयोग भी किया जा सकता है तथा निर्धारित प्रतिकर की वसूली भू-राजस्व के बकाये के रूप में की जा सकती है।

वर्तमान राजस्व संहिता एवं नियमों के अनुरूप बनाने पर विचार करने को कहा
कोर्ट ने आगे कहा कि राजस्व संहिता, 2006 और उसके तहत बनाए गए नियमों में अतिक्रमण हटाने तथा आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया निर्धारित है। लिहाजा धारा 67 की कार्यवाही के बाद उसके अनुपालन के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता की विस्तृत और लंबी प्रक्रिया को नहीं अपनाया जा सकता। न्यायालय ने विशेष रूप से कहा कि धारा 67(3) और अध्याय 12 में अतिक्रमण हटाने तथा प्रतिकर की वसूली के लिए पर्याप्त वैधानिक व्यवस्था उपलब्ध है। इस कारण धारा 67 के आदेश को प्रभावी करने के लिए निष्पादन कार्यवाही को अनावश्यक रूप से जटिल या दीर्घकालिक नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार को राजस्व न्यायालय मैनुअल के पैरा 460 की समीक्षा कर उसे वर्तमान राजस्व संहिता एवं नियमों के अनुरूप बनाने पर विचार करने को कहा है।

हाईकोर्ट ने जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण के मामले में नए सिरे से जांच का दिया आदेश
वहीं हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मोदी रबर लिमिटेड को दी गई 117 एकड़ जमीन में से लगभग 59 एकड़ जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण के मामले में नए सिरे से जांच का आदेश दिया है। न्यायालय ने राजस्व परिषद के अधिकारियों की एक समिति को छह सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट भी सौंपने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट मिलने के तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। न्यायालय ने पूर्व के आदेशों के अनुपालन में हुई देरी पर राज्य सरकार पर 25 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है।न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश लोकेश कुमार खुराना की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया। इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को तय की गई है। पिछले आदेश के अनुपालन में, राजस्व विभाग की प्रमुख सचिव अपर्णा यू. कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुईं।

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