सिंधु का पानी भारत ने रोका, पाकिस्तान को प्यासा छोड़ने पर मजबूर किया

Dec 18, 2025 - 12:44
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सिंधु का पानी भारत ने रोका, पाकिस्तान को प्यासा छोड़ने पर मजबूर किया

नई दिल्ली

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को मिलने वाले सिंधु नदी का पानी रोक दिया है, जिसके बाद कई इलाकों में उसे सूखे जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा है. इस बीच अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले के बाद पाकिस्तान में जल संकट और भी गंभीर हो सकता है. 

तालिबान ने कुनार नदी का पानी नांगरहार क्षेत्र की ओर मोड़ने की योजना पर आगे बढ़ने का फैसला किया है. इस कदम से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में नदी के बहाव में भारी कमी आ सकती है. हाल के दिनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर काफी तनाव हो गया था, जिसमें दोनों देशों के कई सैनिक भी मारे गए. 

तालिबान के आर्थिक आयोग के पास भेजा गया प्रस्ताव

अफगानिस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय के आर्थिक आयोग की तकनीकी समिति की बैठक में कुनार नदी से नांगरहार स्थित दारुंता बांध में पानी मोड़ने के प्रस्ताव को चर्चा के बाद अनुमोदित कर अंतिम निर्णय के लिए आर्थिक आयोग को भेज दिया गया. एक बार लागू होने के बाद इस परियोजना से अफगानिस्तान के नंगरहार में कई कृषि भूमि को प्रभावित करने वाली जल की कमी का समाधान होने की उम्मीद है, लेकिन इससे पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में पानी के प्रवाह पर असर पड़ेगा.

तालिबान के फैसले से PAK पर क्या होगा असर?

करीब 500 किलोमीटर लंबी कुनार नदी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चित्राल जिले में स्थित हिंदू कुश पर्वतमाला से निकलती है. इसके बाद यह दक्षिण की ओर अफगानिस्तान में बहती है और कुनार और नंगरहार प्रांतों से होते हुए काबुल नदी में मिल जाती है. यह नदी पाकिस्तान में बहने वाली सबसे बड़ी नदियों में से एक है और सिंधु नदी की तरह, सिंचाई, पीने के पानी और जलविद्युत उत्पादन का एक प्रमुख स्रोत है, विशेष रूप से सुदूर खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र के लिए जो सीमा पार हिंसा का केंद्र रहा है.

अगर अफगानिस्तान कुनार नदी पर बांध बनाता है तो इससे सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और पनबिजली परियोजनाओं के लिए पानी तक पाकिस्तान की पहुंच बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना है, खासकर उन लोगों के लिए जो भारत द्वारा सिंधु नदी के जल आपूर्ति को प्रतिबंधित करने के कारण पहले से ही सूखे से जूझ रहे हैं.

PAK-तालिबान के बीच नहीं कोई समझौता

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि दिल्ली के साथ सिंधु जल संधि (IWT) के विपरीत, इस्लामाबाद का काबुल के साथ इन जलक्षेत्रों के बंटवारे को लेकर कोई समझौता नहीं है, जिसका अर्थ है कि तालिबान को पीछे हटने के लिए मजबूर करने का तत्काल कोई उपाय नहीं है. तालिबान के इस कदम से पाकिस्तान-अफगानिस्तान हिंसा के फिर से भड़कने की आशंका बढ़ गई है. 

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