भारत का बंगाल की खाड़ी में नो फ्लाई जोन, पाकिस्तान और बांग्लादेश में मचा हाहाकार

Dec 14, 2025 - 10:44
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भारत का बंगाल की खाड़ी में नो फ्लाई जोन, पाकिस्तान और बांग्लादेश में मचा हाहाकार

नई दिल्ली

भातर एक बार फिर से कुछ बड़ा करने जा रहा है. यही वजह है कि रणनीतिक रूप से महत्‍वपूर्ण बंगाल की खाड़ी में 2520 किलोमीटर तक के लिए NOTAM (Notice to Airmen/Air Mission) जारी किया है. इसका मतलब यह हुआ कि तय तिथि और समय पर बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में संबंधित रूट से न तो कोई एयरक्राफ्ट गुजरेगा और न कोई शिप इस मार्ग से ट्रैवल करेगा. इसका उद्देश्‍य किसी भी तरह की दुर्घटना को रोकना है. भारत ने बे ऑफ बंगाल में ढाई हजार किलोमीटर के नो फ्लाई जोन की घोषणा ऐसे वक्‍त में की है जब पड़ोसी देश पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश में किसी ने किसी वजह से हाहाकार और खलबली की स्थिति है. बांग्‍लादेश में चुनाव आयोग के दफ्तर को आमलोगों ने आग के हवाले कर दिया तो पाक‍िस्‍तान में देश के लिए वफादार मानी जाने वाली खुफिया एजेंसी ISI के पूर्व चीफ फैज हमीद का ही कोर्ट मार्शल कर दिया गया है.

डीआरडीओ (DRDO) ने 17 से 20 दिसंबर 2025 के बीच बंगाल की खाड़ी में एक मिसाइल परीक्षण तय किया है. इसके कारण 2520 किलोमीटर तक का बहुत बड़ा नो फ्लाई और नो शिप जोन घोषित किया गया है. यह NOTAM रोजाना सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे (भारतीय समय के अनुसार) तक लागू रहेगा. यह अक्टूबर में हुए परीक्षण के 1480 किलोमीटर क्षेत्र से कहीं बड़ा है, जिससे संकेत मिलता है कि इस बार लंबी दूरी की मिसाइल का परीक्षण हो सकता है. सुरक्षा कारणों से नागरिक विमान और जहाजों को अपना रास्ता बदलना होगा. भारतीय वायुसेना और नौसेना इस क्षेत्र की निगरानी करेंगी, क्योंकि परीक्षण के दौरान मलबा गिरने की आशंका रहती है.
DRDO की क्‍या है प्‍लानिंग?

अब सवाल उठता है कि DRDO की आखिर प्‍लानिंग क्‍या है जो ढाई हजार किलोमीटर से भी ज्‍यादा के क्षेत्र के लिए NOTAM जारी किया गया है. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस ट्रायल का स्वरूप K-4 पनडुब्बी से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) से मेल खाता है. यह भारत की आधुनिक ठोस ईंधन (Solid Fuel) वाली मिसाइल है, जो अग्नि मिसाइल सीरीज पर आधारित है. K-4 कार्यक्रम का उद्देश्य परमाणु क्षमता वाली पनडुब्बी से दागी जाने वाली मिसाइल विकसित करना है, ताकि भारत के परमाणु त्रिकोण (थल-जल-वायु) के समुद्री हिस्से को मजबूत किया जा सके. यह छोटी दूरी की K-15 सागरिका की सीमाओं को दूर करती है. डीआरडीओ की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी (DRDL) के नेतृत्व में बनी यह मिसाइल अग्नि-III तकनीक पर आधारित है, जिससे इसकी सुरक्षा और दूसरी बार जवाबी हमले की क्षमता बढ़ती है. इसका विकास 2009 में आईएनएस अरिहंत के लॉन्च के बाद शुरू हुआ.

NOTAM क्या होता है?
NOTAM का मतलब है Notice to Airmen. यह एक आधिकारिक सूचना होती है, जिससे पायलटों और एयरलाइंस को उड़ान से जुड़ी ज़रूरी जानकारी दी जाती है.

NOTAM क्यों जारी किया जाता है?
जब किसी इलाके में उड़ान के लिए खतरा हो या कोई विशेष गतिविधि हो (जैसे मिसाइल परीक्षण, सैन्य अभ्यास, रनवे बंद होना) तो NOTAM जारी किया जाता है.

NOTAM से आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
आम लोगों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रूट बदले जा सकते हैं या उड़ानों में देरी हो सकती है.

NOTAM क्यों ज़रूरी होता है?
यह उड़ान और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी होता है, ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो.
क्‍यों है इतना खास?

INS अरिहंत (2016 में कमीशन) और INS अरिघात (2024) में प्रत्येक में 4-4 K-4 मिसाइलें तैनात हैं. S4 कैटेगरी की पनडुब्बियों (2025 के बाद) में यह संख्या 8 तक हो जाएगी. साल 2025 के मध्य तक K-4 ने अरिहंत श्रेणी की परमाणु पनडुब्बियों पर पूरी तरह ऑपरेशनल कैपेबिलिटी हासिल कर ली थी. 17-20 दिसंबर 2025 के बीच बंगाल की खाड़ी में जारी NOTAM (2520–3550 किमी क्षेत्र) संभवतः K-4 की आगे की पुष्टि या यूजर ट्रायल के लिए है. K-4 मिसाइल सुरक्षित समुद्री गहराइयों से चीन और पाकिस्तान तक निशाना साध सकती है. इसकी मारक क्षमता K-15 की 750 किमी सीमा से कहीं अधिक है, जिससे भारत का परमाणु त्रिकोण (Nuclear Tirade) पूरा होता है. इसके बाद K-5 (5000+ किलोमीटर परीक्षण में) और K-6 (8000 किमी MIRV क्षमता वाली) मिसाइलें 2030 के दशक तक S5 श्रेणी की पनडुब्बियों के लिए विकसित की जा रही हैं. स्वदेशी तकनीक से उत्पादन बढ़ाया जा रहा है, जो विशाखापत्तनम में पूर्वी नौसेना बेड़े के विस्तार से जुड़ा है.
क्‍या हैं तकनीकी खासियत?

K-4 मिसाइल की लंबाई 10–12 मीटर, व्यास 1.3 मीटर और वजन 17–20 टन है. यह 1–2 टन तक का पेलोड ले जा सकती है, जिसमें MIRV वारहेड भी शामिल हो सकते हैं. इसकी रेंज 3000–3500 किमी है (कम भार पर 4000 किमी तक). इसमें इनर्शियल (जड़त्वीय) नेविगेशन सिस्‍टम है, जिसे GPS/NavIC से जोड़ा गया है, जिससे इसकी सटीकता 10 मीटर से कम (CEP) रहती है. यह 20–50 मीटर गहराई से पनडुब्बी से लॉन्च की जा सकती है और अरिहंत श्रेणी की वर्टिकल लॉन्च प्रणाली से जुड़ी है.

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