पूर्व विजिलेंस प्रमुख परमार को बड़ी राहत, आरोप साबित नहीं होने पर सरकार ने बहाल किए सभी सेवा लाभ

Jul 25, 2026 - 11:14
 0  8
पूर्व विजिलेंस प्रमुख परमार को बड़ी राहत, आरोप साबित नहीं होने पर सरकार ने बहाल किए सभी सेवा लाभ

चंडीगढ़.

पंजाब सरकार ने पूर्व विजिलेंस प्रमुख और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुरिंदर पाल सिंह परमार को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रही विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई समाप्त कर दी है। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार विभागीय जांच में परमार के खिलाफ कर्तव्य में लापरवाही या दुराचार के आरोप सिद्ध नहीं हुए।

राज्यपाल ने जांच अधिकारी की रिपोर्ट स्वीकार करते हुए उनके निलंबन अवधि को भी सेवाकाल मानने और सभी सेवा लाभ बहाल करने की मंजूरी दे दी है। गृह विभाग के अनुसार पूर्व विशेष डीजीपी (ला एंड आर्डर) अर्पित शुक्ला को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। जांच में उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि परमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं होती। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17-ए के प्रावधानों का पालन करते हुए कार्रवाई की थी और किसी प्रकार की प्रक्रियागत चूक सामने नहीं आई।

24 जुलाई को औपचारिक आदेश जारी
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद राज्यपाल ने 22 जुलाई को इसे मंजूरी दी, जबकि 24 जुलाई को गृह सचिव गुरकिरत किरपाल सिंह ने औपचारिक आदेश जारी कर विभागीय कार्यवाही समाप्त करने की पुष्टि की। आदेश के साथ ही परमार की सेवा स्थिति और अन्य सभी लाभ भी बहाल कर दिए गए। परमार ने बताया कि जांच में उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की अनियमितता या गलत आचरण का कोई साक्ष्य नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरे कार्यकाल में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ काम किया तथा जांच रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी है।

परिवहन विभाग से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला अप्रैल 2025 में पंजाब परिवहन विभाग में कथित भ्रष्टाचार की जांच से जुड़ा है। उस समय विजिलेंस ब्यूरो ने रिश्वतखोरी, अवैध परमिट, वसूली और परिवहन विभाग से जुड़े अधिकारियों, बस आपरेटरों तथा बिचौलियों के कथित गठजोड़ की जांच शुरू की थी। उस दौरान परमार विजिलेंस ब्यूरो के प्रमुख थे। इसके बाद 18 मई 2025 को गृह विभाग ने अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के नियम-8 के तहत उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की थी। आरोप था कि उन्होंने अभियान के दौरान अपने कर्तव्यों का समुचित निर्वहन नहीं किया। जांच लंबित रहने तक उन्हें निलंबित भी किया गया था। अब विस्तृत विभागीय जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होने पर सरकार ने सभी आरोप वापस लेते हुए उन्हें पूरी तरह क्लीन चिट दे दी है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0