जहां अस्पताल पहुंचने में लगते थे 6 घंटे, वहां NMDC ने शुरू की मुफ्त एम्बुलेंस सेवा
जहां अस्पताल पहुंचने में लगते थे 5-6 घंटे, वहां एनएमडीसी ने शुरू की निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा
बस्तर के दुर्गम गांवों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती, सड़क और बस सुविधा से भी ग्रामीणों को राहत
दंतेवाड़ा-छत्तीसगढ़
बस्तर के दुर्गम वनांचलों में रहने वाले लोगों के लिए चिकित्सा आपातकाल का सामना करना अक्सर एक बड़ी चुनौती रहा है। पहाड़ी रास्तों से गुजरकर अस्पताल पहुंचने में कई बार पांच से छह घंटे तक लग जाते हैं। ऐसे में समय पर उपचार मिलना मरीजों और उनके परिजनों के लिए चिंता का विषय बन जाता है।
तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत वाली गर्भवती महिला हो, सांस लेने में परेशानी से जूझ रहा बुजुर्ग या अचानक बीमार पड़ने वाला बच्चा—स्वास्थ्य केंद्रों से दूर रहने वाले परिवारों के लिए अस्पताल तक पहुंचना हमेशा कठिन रहा है। इस समस्या को कम करने की दिशा में एनएमडीसी लिमिटेड ने एक नई निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा शुरू की है।
यह सेवा डिपॉजिट-13 परियोजना क्षेत्र और आसपास के दूरस्थ गांवों के निवासियों को आपातकालीन परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगी। डिपॉजिट-13 परियोजना का विकास एनएमडीसी लिमिटेड और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (सीएमडीसी) के संयुक्त उपक्रम एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) द्वारा किया जा रहा है।
दुर्गम गांवों तक स्वास्थ्य सहायता पहुंचाने की पहल
23 अक्टूबर को शुरू की गई यह एम्बुलेंस लोहागांव जंक्शन से संचालित होती है। इसके माध्यम से लोहागांव, अंद्रि, गम्फुर, डोडी टिम्मेनार, पुरंगेल, करका और तंबोडी सहित आसपास के दूरस्थ एवं दुर्गम वनांचलों के निवासियों को निःशुल्क परिवहन सुविधा मिलेगी।
एम्बुलेंस में स्ट्रेचर की सुविधा उपलब्ध है। इसके संचालन के लिए एक चालक तैनात है और एनएमडीसी के कर्मचारी भी इसमें सहयोग करते हैं। इस सेवा का उद्देश्य जरूरतमंद ग्रामीणों को अस्पताल तक पहुंचने में सहायता देना और आपातकालीन परिस्थितियों में परिवहन की समस्या को कम करना है।
16 किलोमीटर तक पैदल चलने की मजबूरी होगी कम
नई एम्बुलेंस सेवा से डिपॉजिट-11सी और डिपॉजिट-14 के आसपास के समुदायों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। इन क्षेत्रों के निवासी अस्पताल जाने के लिए परिवहन सुविधा प्राप्त करने हेतु लोहागांव तिराहे तक पहुंच सकते हैं। परियोजना से जुड़ी स्थानीय जानकारी के अनुसार, आसपास की कुछ बस्तियों के लोगों को पहले अस्पताल पहुंचने के लिए लगभग 16 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था। एक स्वस्थ व्यक्ति को भी यह दूरी तय करने में पांच से छह घंटे लग सकते थे।
प्रसव, दुर्घटना या अचानक उत्पन्न होने वाली चिकित्सकीय जटिलताओं के दौरान इतनी लंबी दूरी तय करना विशेष रूप से कठिन हो जाता है। ऐसे में अस्पताल पहुंचने में होने वाली देरी मरीज की परेशानी बढ़ा सकती है। एम्बुलेंस जैसी परिवहन सुविधा इन परिवारों के लिए अस्पताल तक पहुंचने का अधिक व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराएगी।
‘हॉस्पिटल ऑन द व्हील्स’ से मिल रही बुनियादी चिकित्सा सुविधा
नई एम्बुलेंस सेवा एनएमडीसी द्वारा वित्तपोषित ‘ऑन द व्हील्स’ नामक मोबाइल चिकित्सा पहल की पूरक है। इस पहल के अंतर्गत प्रत्येक रविवार को चिकित्सा शिविर आयोजित किए जाते हैं। इसके माध्यम से विभिन्न गांवों का नियमित दौरा कर आदिवासी समुदायों के स्वास्थ्य की जांच और उनकी चिकित्सा संबंधी जरूरतों का आकलन किया जाता है।
नई परिवहन एम्बुलेंस के विपरीत, ‘हॉस्पिटल ऑन द व्हील्स’ में एक डॉक्टर और दो नर्स तैनात रहते हैं। यह टीम दूरस्थ समुदायों तक बुनियादी चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने का कार्य करती है। किरंदुल अस्पताल से जुड़े और मोबाइल चिकित्सा सेवा का संचालन करने वाले डॉ. एम वी लाल, सीएमओ-एनएमडीसी ने बताया, “हॉस्पिटल ऑन द व्हील्स वाहन में ईसीजी मशीन उपलब्ध है। मधुमेह के मरीजों के लिए बुनियादी दवाएं भी रखी जाती हैं। हम शुरुआती चिकित्सा सहायता प्रदान करते हैं। जिन मरीजों को आगे की जांच या विशेष उपचार की आवश्यकता होती है, उन्हें किरंदुल अस्पताल भेजा जाता है।”
गांवों में नियमित चिकित्सा शिविरों से उन लोगों तक बुनियादी स्वास्थ्य जांच की सुविधा पहुंचाने में मदद मिलती है, जिन्हें चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचने में कठिनाई होती है। नई एम्बुलेंस इस व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए जरूरत पड़ने पर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में सहायता करेगी। एम्बुलेंस सेवा के लिए संपर्क नंबर: 9479156726, 8763222004
बस सेवा से भी आसान हुआ ग्रामीणों का आवागमन
स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ एनएमडीसी क्षेत्र में ग्रामीणों के आवागमन को सुगम बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। लोहागांव तिराहे से किरंदुल बाजार के बीच बस सेवा पहले ही शुरू की जा चुकी है। लगभग नौ किलोमीटर की दूरी तय करने वाली यह बस प्रतिदिन तीन बार—सुबह 10 बजे, दोपहर 12:30 बजे और दोपहर 1:30 बजे—संचालित होती है। इससे ग्रामीणों को बाजार और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने के लिए परिवहन का साधन उपलब्ध हुआ है। जंगल से प्राप्त होने वाली उपज, जैसे जलावन की लकड़ी, सब्जियां और फल लेकर पैदल यात्रा करने वाले ग्रामीणों के लिए सार्वजनिक परिवहन की सुविधा रोजमर्रा के सफर को आसान बनाने में मददगार हो सकती है।
सात किलोमीटर लंबी सड़क से लगभग 300 ग्रामीणों को लाभ की उम्मीद
ग्रामीण संपर्क को बेहतर बनाने के लिए लोहागांव तिराहे से लोहागांव गांव को जोड़ने वाली सात किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण भी किया जा रहा है। इसके आने वाले महीनों में पूरा होने की उम्मीद है। इस सड़क से दुर्गम क्षेत्र के लगभग 300 निवासियों को लाभ मिलने की संभावना है। सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद संबंधित गांवों तक आवागमन आसान हो सकेगा। इससे भविष्य में एम्बुलेंस और बस जैसी परिवहन सेवाओं को गांवों के और करीब पहुंचाने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
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