रिटायरमेंट के दिन हाईकोर्ट जज का कड़ा संदेश— ‘जब बोलना कर्तव्य हो, तब चुप रहना भी अपराध’

Jan 8, 2026 - 14:14
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रिटायरमेंट के दिन हाईकोर्ट जज का कड़ा संदेश— ‘जब बोलना कर्तव्य हो, तब चुप रहना भी अपराध’

मुंबई
बॉम्बे हाईकोर्ट में बुधवार को जस्टिस महेश एस सोनक के लिए आयोजित विदाई समारोह में भावुक माहौल बन गया। जस्टिस सोनक ने इस दौरान वकीलों को संबोधित करते हुए न्यायपालिका पर कई अहम बातें कहीं हैं। फेयरवेल के दौरान जस्टिस सोनक ने कहा कि जब बोलने की जिम्मेदारी हो और तब भी चुप रहा जाए, तो यह अपराध के समान है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी चुप्पी को संस्थान के लिए भूलना और माफ करना बेहद कठिन होता है।
 
गौरतलब है कि जस्टिस सोनक इस सप्ताह के अंत में झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस का पद संभालने जा रहे हैं। वह झारखंड हाईकोर्ट के मौजूदा चीफ जस्टिस तारलोक सिंह चौहान के रिटायर होने के बाद यह जिम्मेदारी संभालेंगे। बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट की प्रिंसिपल सीट के सेंट्रल कोर्टरूम में उनके लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया था।

'बार की चुप्पी को माफ करना बहुत मुश्किल'
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अपने संबोधन में जस्टिस सोनक ने कहा कि जजों को अपने कर्तव्य का पालन करने के लिए तारीफ की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अमेरिकी न्यायविद ओलिवर वेंडेल होम्स का हवाला देते हुए कहा कि अक्सर लोग आलोचना से बचकर तारीफ में डूब जाना पसंद करते हैं, जबकि गलत रास्ते पर जाने वाले जज को सुधारना कहीं ज्यादा जरूरी और अहम होता है। जस्टिस सोनक ने आगे कहा कि इसी जगह पर बार की बड़ी जिम्मेदारी शुरू होती है। उन्होंने दोहराया कि जहां बोलना जरूरी हो, वहां चुप रहना अपराध है। उन्होंने कहा कि संस्थान अपने दुश्मनों के अपमान को तो भूल सकता है, लेकिन अपने असली रक्षक यानी बार की चुप्पी को भूलना और माफ करना बहुत मुश्किल होता है।

कौन हैं जस्टिस सोनक?
जस्टिस एम एस सोनक बॉम्बे हाईकोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज रहे हैं। उनका जन्म 28 नवंबर 1964 को हुआ था। उन्होंने गोवा के पणजी स्थित एमएस कॉलेज ऑफ लॉ से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद साल 1988 में उन्होंने वकालत शुरू की और बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच में प्रैक्टिस की। इस दौरान उन्होंने सिविल, संवैधानिक, लेबर, सर्विस, पर्यावरण और टैक्स से जुड़े मामलों की पैरवी की।

वह राज्य सरकार और वैधानिक निगमों के स्पेशल काउंसल भी रहे। 21 जून 2013 को उन्हें एडिशनल जज नियुक्त किया गया। गोवा बेंच में वरिष्ठ प्रशासनिक जज रहते हुए उन्होंने सार्वजनिक रूप से लिविंग विल रजिस्टर कराई और अंगदान का संकल्प लिया।

अहम फैसले
पद पर रहते हुए जस्टिस सोनक ने कई अहम फैसले सुनाए। इन फैसलों में पोरवोरिम पुलिस स्टेशन के कांस्टेबलों द्वारा एक वकील पर कथित हमले के मामले में स्वत संज्ञान लेना भी शामिल है। वहीं पिछले साल जुलाई में जस्टिस सोनक की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि मुंबई का विकास जरूरी है, लेकिन यह ऐतिहासिक और विरासत वाली इमारतों की सुरक्षा को नजरअंदाज करके नहीं किया जा सकता।

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