तकनीक, समन्वय और प्रशिक्षित पुलिस बल के दम पर होगा सुरक्षित एवं व्यवस्थित सिंहस्थ-2028 - डीजीपी कैलाश मकवाणा
भोपाल
विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल सिंहस्थ-2028 की व्यापक तैयारियों के मद्देनजर शुक्रवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में "सिंहस्थ-2028 : ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) कोर्स – प्रशिक्षित प्रशिक्षकों का राज्य स्तरीय सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार का उद्देश्य सिंहस्थ-2028 के लिए संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा, जिलों में प्रशिक्षण की प्रगति का मूल्यांकन, फील्ड अनुभव साझा करना तथा प्रशिक्षण व्यवस्था में आवश्यक सुधार एवं नवाचारों को पूरे प्रदेश में लागू करने की रणनीति तैयार करना रहा।
सेमिनार में प्रदेशभर से प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि तथा सिंहस्थ-2028 की तैयारियों से जुड़े अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जिलों में संचालित प्रशिक्षण गतिविधियों, प्रशिक्षण मॉड्यूल, ऑनग्राउंड अनुभव, नवाचार, फीडबैक तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई।
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि सिंहस्थ-2028 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक समागम है, जिसकी सफलता मध्यप्रदेश पुलिस की पेशेवर दक्षता, संवेदनशीलता एवं समन्वित कार्यशैली की भी परीक्षा होगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस सिंहस्थ-2028 की तैयारियों पर पिछले तीन वर्षों से योजनाबद्ध एवं चरणबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। फरवरी-2026 में उज्जैन में आयोजित मंथन एवं विषय विशेषज्ञों के सेमिनारों में प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रशिक्षण की व्यापक अवधारणा विकसित की गई। अप्रैल-2026 में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पुलिस ड्यूटी पोर्टल, eHRMS आधारित मानव संसाधन प्रबंधन, साइबर सुरक्षा योजना तथा विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन्हीं प्रयासों की अगली कड़ी के रूप में आयोजित इस राज्य स्तरीय सेमिनार में अब तक हुए प्रशिक्षण कार्यों की समीक्षा करते हुए आगामी कार्ययोजना निर्धारित की गई है।
डीजीपी मकवाणा ने बताया कि सिंहस्थ-2028 के लिए आवश्यक पुलिस अधोसंरचना के विकास हेतु विस्तृत डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी गई थी, जिसे समय पर स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है तथा अनेक महत्वपूर्ण कार्य प्रगति पर हैं। आधुनिक तकनीक आधारित पुलिसिंग को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विभागों के बीच समन्वित कार्य प्रणाली विकसित की जा रही है। पुलिस मुख्यालय द्वारा विकसित eHRMS अंतिम चरण में है, जिसके माध्यम से सिंहस्थ के दौरान हजारों पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ड्यूटी, तैनाती एवं मानव संसाधन प्रबंधन अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ-2025 के सफल आयोजन से मध्यप्रदेश पुलिस ने अनेक महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त किए हैं। पुलिस अधिकारियों ने प्रयागराज जाकर वहां की व्यवस्थाओं, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण तथा अन्य सर्वोत्तम व्यवस्थाओं का अध्ययन किया, जिन्हें सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस बल को प्रशिक्षित करने के लिए दो चरणों में Training of Trainers (ToT) कार्यक्रम संचालित किए गए, जिनके माध्यम से प्रदेशभर के 303 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए गए हैं। ये प्रशिक्षित अधिकारी एवं कर्मचारी अपने-अपने जिलों में हजारों पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भूमिका आधारित प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
डीजीपी मकवाणा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2025 में 8,500 तथा वर्ष 2026 में 9,662 पदों पर भर्ती की स्वीकृति मिलने से पुलिस बल की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। लगभग 18 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया से सिंहस्थ-2028 सहित भविष्य की कानून-व्यवस्था संबंधी आवश्यकताओं के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा। उन्होंने यह भी बताया कि लंबे समय बाद उप निरीक्षक एवं सूबेदार संवर्ग में भर्ती की गई है तथा चयनित अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण शीघ्र प्रारंभ होगा। आने वाले समय में पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी तथा उनकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। उन्होंने वर्ष 2004 के सिंहस्थ का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद उत्कृष्ट योजना एवं बेहतर समन्वय के बल पर उस आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया था। वर्तमान समय में तकनीकी संसाधनों एवं आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्थाओं के साथ मध्यप्रदेश पुलिस और अधिक सक्षम है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 के दौरान भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, अंतर्राज्यीय समन्वय तथा त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली सबसे महत्वपूर्ण विषय होंगे, जिन पर विशेष ध्यान देते हुए अभी से व्यापक तैयारी की जा रही है।
डीजीपी मकवाणा ने मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका को सिंहस्थ-2028 की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि उनके द्वारा प्रशिक्षित पुलिसकर्मी ही मैदान में प्रत्यक्ष रूप से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। इसलिए प्रशिक्षण केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पुलिस बल की कार्यकुशलता, अनुशासन, संवेदनशीलता एवं सेवा भावना विकसित करने का माध्यम है। उन्होंने सभी मास्टर ट्रेनर्स से आह्वान किया कि वे प्रत्येक पुलिसकर्मी में यह भावना विकसित करें कि सिंहस्थ में ड्यूटी केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि महाकाल की नगरी में करोड़ों श्रद्धालुओं की सेवा का पुण्य अवसर है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण, सुदृढ़ अधोसंरचना, प्रभावी समन्वय एवं जनसहभागिता के माध्यम से मध्यप्रदेश पुलिस सिंहस्थ-2028 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित, तकनीक-सक्षम एवं अनुकरणीय आयोजन के रूप में स्थापित करेगी। उन्होंने सेमिनार के आयोजकों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सिंहस्थ-2028 की सफलता मध्यप्रदेश पुलिस की सामूहिक प्रतिबद्धता, दूरदृष्टि एवं कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक होगी।
सेमिनार में महानिदेशक, रेलवे, उत्तरप्रदेश डी. प्रकाश ने प्रयागराज महाकुंभ-2025 के अनुभव साझा करते हुए कहा कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में उन सर्वोत्तम व्यवस्थाओं (Best Practices) का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े आयोजन की सफलता प्रशिक्षित मानव संसाधन, पर्याप्त बजट, संसाधनों की उपलब्धता तथा प्रभावी समन्वय पर निर्भर करती है। उन्होंने मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए प्रशिक्षण को अधिक व्यवहारिक एवं परिस्थिति-आधारित बनाने, बहु-स्तरीय संचार व्यवस्था विकसित करने, होल्डिंग एरिया, वन-वे मूवमेंट, कलर कोडिंग एवं मार्शलिंग जैसी व्यवस्थाओं को अपनाने तथा अफवाहों एवं भ्रामक सूचनाओं पर त्वरित नियंत्रण के लिए सुदृढ़ सूचना तंत्र विकसित करने पर बल दिया।
विशेष पुलिस महानिदेशक, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ उपेन्द्र जैन ने कहा कि सिंहस्थ-2028 में ड्यूटी केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की सेवा का पुण्य अवसर है। उन्होंने प्रशिक्षण में सेवा भाव, संवेदनशीलता एवं सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि प्रत्येक प्रशिक्षक को सिंहस्थ क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, भीड़ एवं यातायात प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली, आधुनिक तकनीक, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर तथा वैकल्पिक संचार व्यवस्था का व्यावहारिक प्रशिक्षण सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्नान पर्वों, पीक ऑवर्स एवं आपात परिस्थितियों के लिए पृथक कार्ययोजना तथा सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय ही सुरक्षित एवं दुर्घटनामुक्त सिंहस्थ का आधार बनेगा।
महानिदेशक, उत्तरप्रदेश मती रेणुका मिश्रा ने पुलिसिंग के मानवीय पक्ष पर विशेष बल देते हुए कहा कि किसी भी धार्मिक आयोजन की सफलता केवल सुरक्षा व्यवस्था से नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के अनुभव से तय होती है। उन्होंने "Police Service, Not Police Force" की अवधारणा को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक श्रद्धालु के साथ सम्मानजनक एवं संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षकों से आग्रह किया कि वे पुलिस बल को केवल प्रक्रियाओं का नहीं, बल्कि सेवा, उत्तरदायित्व, आत्मानुशासन और सकारात्मक सोच का भी प्रशिक्षण दें, जिससे सिंहस्थ-2028 प्रत्येक श्रद्धालु के लिए सुरक्षित, सुव्यवस्थित और यादगार अनुभव बन सके।
विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण रवि कुमार गुप्ता तथा सेवानिवृत्त विशेष पुलिस महानिदेशक सरबजीत सिंह ने प्रशिक्षण के विभिन्न आयामों, नेतृत्व क्षमता, व्यवहारिक प्रशिक्षण एवं अनुभव आधारित सीख पर अपने विचार साझा किए।
दोपहर बाद आयोजित "प्रशिक्षण में नवाचार की आवश्यकता" विषयक पैनल चर्चा में उज्जैन रेंज के उप पुलिस महानिरीक्षक नवनीत भसीन, पीएसओ टू डीजीपी विनीत कपूर, पुलिस अधीक्षक उज्जैन प्रदीप शर्मा, उप निदेशक (एमपीपीए) भौंरी रामजी वास्तव एवं पीटीएस उज्जैन की पुलिस अधीक्षक मती मनीषा पाठक सोनी ने प्रशिक्षण में नवाचार, तकनीक के उपयोग एवं व्यवहारिक अभ्यास आधारित प्रशिक्षण प्रणाली पर अपने विचार रखे।
"जिलों में प्रशिक्षण के संबंध में फीडबैक, सुझाव एवं अनुभव साझा" विषय पर आयोजित सत्र में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक उज्जैन जोन राकेश कुमार गुप्ता , सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक अंशुमान सिंह तथा उप पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था एवं सुरक्षा) तरुण नायक ने प्रभावी प्रशिक्षण व्यवस्था, प्रशिक्षकों की भूमिका तथा भविष्य की आवश्यकताओं पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
सेमीनार के अंतिम चरण में पुलिस अधीक्षक खंडवा द्वारा ओंकारेश्वर ड्यूटी से संबंधित प्रशिक्षण तैयारियों पर प्रस्तुति दी गई। वहीं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, उज्जैन जोन राकेश कुमार गुप्ता ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण की आगामी कार्ययोजना प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का समापन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्तवार्ता) ए.साईं मनोहर द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।
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