धार भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, मुस्लिम पक्ष को पास की जमीन पर जुमे की नमाज की अनुमति
धार
धार में स्थित भोजशाला से जुड़े विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने विवादित परिसर से सटी खसरा नंबर-596 की जमीन पर मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति दे दी है। साथ ही मध्य प्रदेश सरकार को इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 14 जुलाई 2026 के अपने पूर्व आदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि खसरा नंबर-596, जिसे रिकॉर्ड में दरगाह की भूमि बताया गया है, वहां मुस्लिम समुदाय शुक्रवार की नमाज अदा कर सकेगा।
सरकार को व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में मध्य प्रदेश सरकार से कहा है कि वह निर्धारित स्थल पर नमाज के दौरान सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करे, ताकि अदालत के निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन हो सके।
मुस्लिम पक्ष की अर्जी पर आया आदेश
यह आदेश मुस्लिम पक्ष द्वारा दायर उस आवेदन पर दिया गया, जिसमें नमाज के लिए विवादित परिसर के समीप वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि मौजूदा अंतरिम व्यवस्था के तहत मुस्लिम समुदाय को जुमे की नमाज के लिए विवादित परिसर से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित स्थान पर जाना पड़ता है, जिससे व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
अदालत ने बताया उपयुक्त स्थल
सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साइट प्लान का अवलोकन करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि खसरा नंबर-596 तक पहुंचने के लिए अलग और स्वतंत्र मार्ग उपलब्ध है। अदालत ने माना कि यह भूमि विवादित परिसर के बिल्कुल निकट है और नमाज के लिए उपयुक्त स्थान प्रतीत होती है। इसी आधार पर अदालत ने वहां शुक्रवार की नमाज की अनुमति प्रदान की।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में क्या कहा
ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि खसरा नंबर 596, जो दरगाह की भूमि बताई गई है, विवादित परिसर के बिल्कुल निकट है और वहां तक अलग पहुंच मार्ग भी उपलब्ध है। अदालत ने इसे नमाज के लिए उपयुक्त स्थान मानते हुए मध्य प्रदेश सरकार को तत्काल आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए। यह आदेश मुस्लिम पक्ष की उस अर्जी पर आया, जिसमें पहले तय किए गए वैकल्पिक स्थल को बदलने की मांग की गई थी।
मुस्लिम पक्ष ने क्यों उठाई आपत्ति
मुस्लिम पक्ष ने अदालत को बताया कि प्रशासन ने पहले जिस स्थान को नमाज के लिए चिन्हित किया था, वह भोजशाला परिसर से करीब एक से डेढ़ किलोमीटर दूर था, जिससे सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा था। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने कहा कि प्रशासन की ओर से सुझाए गए नए विकल्प भी विवादित परिसर से काफी दूर थे। इसके बाद अदालत ने परिसर से सटी दरगाह की जमीन को उपयुक्त विकल्प मानते हुए नया निर्देश जारी किया।
हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती
यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में उन अपीलों के जरिए लंबित है, जिनमें मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 15 मई 2026 के फैसले को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में भोजशाला-कमाल मौला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर माना था और 2003 के एएसआई आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार किया है, लेकिन अंतरिम व्यवस्था के तहत अलग स्थान पर नमाज की अनुमति दी है।
क्या है विवाद का कारण?
यह विवाद 2022 में दायर एक याचिका के बाद तेज हुआ, जिसमें हिंदू पक्ष ने स्मारक के धार्मिक स्वरूप का वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सर्वे कराया। एएसआई की रिपोर्ट में कहा गया कि मौजूदा ढांचे का निर्माण पहले से मौजूद मंदिरों के अवशेषों का उपयोग करके किया गया था और मस्जिद का निर्माण बाद के काल में हुआ। इसी रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने भोजशाला को सरस्वती मंदिर माना।
अंतिम फैसला बाकी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह केवल अंतरिम व्यवस्था है और मामले की अंतिम सुनवाई अभी बाकी है। अदालत ने एएसआई को भी निर्देश दिया है कि वह विवादित स्मारक में किसी भी प्रकार का संरचनात्मक बदलाव बिना सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के नहीं करेगा। अब सभी पक्षों की दलीलों के बाद शीर्ष अदालत इस ऐतिहासिक और संवेदनशील विवाद पर अंतिम फैसला सुनाएगी।
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