यूपीआईटीएस-26 में दिखेगी यूपी की स्मार्ट सिंचाई व्यवस्था, तकनीक से जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण का बना यूपी मॉडल

Sep 24, 2026 - 11:44
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यूपीआईटीएस-26 में दिखेगी यूपी की स्मार्ट सिंचाई व्यवस्था, तकनीक से जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण का बना यूपी मॉडल

यूपीआईटीएस-26 में दिखेगी यूपी की स्मार्ट सिंचाई व्यवस्था, तकनीक से जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण का बना यूपी मॉडल

- सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के पवेलियन में लाइव इंजीनियरिंग मॉडल, स्काडा और एआई तकनीक का होगा प्रदर्शन

- बाढ़ नियंत्रण, नदी जोड़ो परियोजनाओं, ड्रेजिंग और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई की मिलेगी जानकारी

लखनऊ,
योगी सरकार द्वारा प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक तकनीक, बेहतर जल प्रबंधन और टिकाऊ इंजीनियरिंग से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की झलक उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2026 में देखने को मिलेगी। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित होने वाले यूपीआईटीएस के चौथे संस्करण में उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की ओर से हॉल नंबर-6 में पवेलियन लगाया गया है। यहां तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरिंग एवं तकनीकी छात्रों, प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के संकाय सदस्यों, छात्रों और आमजन को विभाग की परियोजनाओं, तकनीकी नवाचारों और पिछले एक दशक की उपलब्धियों से रूबरू कराया जाएगा।

पिछले साढ़े नौ वर्षों में 19.48 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का हुआ विस्तार
प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग ने बताया कि पवेलियन में आधुनिक सिंचाई परियोजनाओं के साथ जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण में अपनाई जा रही तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। विजटर्स को लाइव इंजीनियरिंग मॉडल के माध्यम से प्रमुख परियोजनाओं की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिलेगा। इनमें बाणसागर नहर परियोजना, पहाड़ी बांध परियोजना, अर्जुन सहायक नहर परियोजना, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना सहित अन्य प्रमुख परियोजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। विभागीय प्रदर्शनी में नहर नेटवर्क और लिफ्ट कैनाल के कार्यात्मक मॉडलों के साथ बांधों और बैराजों की कार्यप्रणाली को ऑडियो-विजुअल माध्यम से समझाया जाएगा। प्रदर्शनी में पिछले साढ़े नौ वर्षों में पूरी की गई प्रमुख, मध्यम और लघु सिंचाई परियोजनाओं की उपलब्धियों को प्रमुखता दी गई है। बाणसागर नहर परियोजना, पहाड़ी बांध परियोजना, अर्जुन सहायक नहर परियोजना, महुआगांव-चिल्ली स्प्रिंकलर सिंचाई परियोजना, लहचुरा बांध परियोजना, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, यूपी वाटर रिस्ट्रक्चरिंग प्रोजेक्ट फेज-2 और जरगो नहर प्रणाली के पुनर्गठन जैसी परियोजनाओं से सिंचाई क्षमता में विस्तार हुआ है। पिछले साढ़े नौ वर्षों में 17.29 लाख हेक्टेयर नया सिंचाई क्षेत्र विकसित हुआ जबकि 2.19 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र को पुनर्स्थापित किया गया। इस तरह कुल 19.48 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का विस्तार/पुनर्स्थापन हुआ और 44.81 लाख किसान परिवार इससे लाभान्वित हुए हैं।


स्काडा और एआई से किया जा रहा स्मार्ट जल प्रबंधन
मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह ने बताया कि पवेलियन में प्रमुख आकर्षण स्मार्ट सिंचाई प्रणाली होगी। विभाग सिंचाई जल के वितरण, नहर संचालन और सरकारी नलकूपों के संचालन में स्काडा, एआई और आईओटी जैसी तकनीकों का उपयोग कर रहा है। 15 प्रमुख बांधों और बैराजों पर स्काडा सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जिसके माध्यम से कंट्रोल रूम से गेटों का इलेक्ट्रॉनिक संचालन और बांध-बैराज से संबंधित रियल-टाइम डेटा ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकता है। केंद्रीयकृत नियंत्रण प्रणाली के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित बैराजों, सरकारी नलकूपों और पंप नहरों की स्थिति की निगरानी और नियंत्रण भी किया जा रहा है। प्रदर्शनी में बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में अपनाए जा रहे आधुनिक उपाय भी प्रदर्शित होंगे। विभाग के अनुसार तटबंधों के सुदृढ़ीकरण, संवेदनशील स्थलों की निगरानी और प्रभावी बाढ़ प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए कंक्रीट मैट्रेस टेक्नोलॉजी, सिल्ट वेन, बॉटम पैनल्स, शीट पाइल, परमेबल स्ट्रक्चर और टेट्रापॉड जैसी तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। प्रदेश की गंगा, यमुना, सोलानी, रामगंगा, सुवाओन, खोकरी, मंदाकिनी, केन, बेतवा, बूढ़ी गंगा और टेढ़ी नदियों पर फल्ड प्लेन जोनिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है। इस कार्य में उत्तर प्रदेश को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही नदी के प्रवाह को सुचारु बनाने और तटबंधों पर बाढ़ के दबाव को कम करने के लिए प्रदेश में 58 स्थानों पर ड्रेजिंग का कार्य किया गया है। गंगा, घाघरा, शारदा और रामगंगा जैसी नदियों में ड्रेजिंग के माध्यम से नदी के प्रवाह को व्यवस्थित करने के प्रयास किए गए हैं। महाकुम्भ के दौरान गंगा की तीन धाराओं को ड्रेजिंग के जरिए एक धारा में चैनलाइज किया गया था। वहीं बिजनौर में सेक्टोरल ड्रेजिंग के जरिए गंगा को चैनलाइज कर रिवर ट्रेनिंग का कार्य किया गया।

'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' पर जोर
विभाग की ओर से कम पानी वाले क्षेत्रों में जल के अधिकतम उपयोग के लिए प्रेशर इरिगेशन और स्प्रिंकलर आधारित सिंचाई परियोजनाओं को बढ़ावा दिया गया है। हमीरपुर में महुआगांव चिल्ली, महोबा में कुलपहाड़ और ललितपुर में शहजाद बांध स्प्रिंकलर सिंचाई परियोजनाओं का उल्लेख प्रदर्शनी में किया गया है। सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और गोरखपुर में सात प्रेशर सिंचाई प्रणालियां विकसित की गई हैं, जिनसे करीब 4,000 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता और लगभग 15 हजार किसान परिवारों को लाभ मिला है। उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 के तहत सिंचाई विभाग ने नलकूपों, लिफ्ट नहरों, स्प्रिंकलर और प्रेशर सिंचाई परियोजनाओं, मुख्य नहर प्रणालियों के उपकरणों एवं सेंसरों और कार्यालयों में सौर ऊर्जा के उपयोग की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नहरों के वाटरवेज पर सोलर पावर प्लांट लगाने की संभावनाओं को भी प्रदर्शनी में दिखाया जा रहा है। विभाग की प्रदर्शनी में नहरों की सिल्ट सफाई और अंतिम छोर के किसानों तक सिंचाई जल पहुंचाने की व्यवस्था भी प्रमुखता से प्रदर्शित की जाएगी। नहरों की सिल्ट सफाई का कार्य 27,551 किलोमीटर से बढ़ाकर 55,320 किलोमीटर किया गया है। खरीफ में पानी की पहुंच 9,517 टेल से बढ़कर 10,422 टेल और रबी में 9,376 से बढ़कर 10,932 टेल तक हुई है। इस अवधि में कुल सिंचित क्षेत्र 82.54 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 106.82 लाख हेक्टेयर हुआ है।

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