यूपी में दुरुस्त होगा BJP का सबसे कमजोर दुर्ग? पंकज चौधरी के दांव के मायने

Dec 29, 2025 - 15:44
 0  10
यूपी में दुरुस्त होगा BJP का सबसे कमजोर दुर्ग? पंकज चौधरी के दांव के मायने

  नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश बीजेपी की कमान संभालने के साथ पंकज चौधरी ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया है. मिशन-2027 का आगाज पश्चिम यूपी से किया. बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी ने मथुरा में बांके बिहारी के दर्शन कर ब्रज क्षेत्र से यूपी यात्रा शुरू की और दूसरे दिन गाजियाबाद होते हुए मेरठ पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ. इस तरह पूरब से पश्चिम यूपी तक जोड़ने की कवायद में पंकज चौधरी जुट गए हैं.

बीजेपी ने पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भले ही यूपी के सामाजिक समीकरण को साधने की कवायद काफी हद तक कर ली है, लेकिन क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी दोनों ही गोरखपुर से हैं. इस तरह सत्ता और संगठन पर पूर्वांचल का पूरी तरह से दबदबा दिख रहा है.

यूपी की सत्ता और संगठन दोनों की कमान पूर्वांचल के गोरखपुर मंडल के नेताओं के पास है. ऐसे में कहीं न कहीं पश्चिम यूपी के लोगों लगता था कि प्रदेश अध्यक्ष पूरब से हैं तो पश्चिम को कोई खास तवज्जे नहीं देंगे. माना जाता है कि यही वजह है कि पंकज चौधरी ने ब्रज क्षेत्र से अपने यूपी दौरे का आगाज कर पश्चिम यूपी के सियासी समीकरण को साधने में जुट गए हैं.

पश्चिम यूपी से पंकज चौधरी का मिशन-2027

पंकज चौधरी ने मथुरा में बाके बिहारी का दर्शन कर मिशन 2027 का आगाज शनिवार को किया. इसके बाद आगरा के प्रतापपुरा स्थित एक मैरिज होम में ब्रज क्षेत्र की पहली बैठक को संबोधित करते हुए पंकज चौधरी कहा कि 2027 में हमें 2017 का रिकॉर्ड तोड़ना है. इसके लिए बीजेपी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर काम करना होगा. ब्रज क्षेत्र की ताकत को वह जानते हैं, आपका सहयोग आवश्यक है.

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर जाता है. इसलिए हमें यहां यहां अपने संगठन को मजबूत रखना है. इसके बाद रविवार को मेरठ पहुंचे, जहां उन्होंने पश्चिम यूपी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की. इस दौरान पंकज चौधरी ने कार्यकर्ताओं को समझाया कि विपक्ष में कार्य करने और सत्ता में रहकर काम करने का तरीका अलग है. हमें केंद्र की और प्रदेश सरकार की योजनाओं को हर जरूरतमंद तक बिना किसी भेदभाव के पहुंचाना है.

मेरठ में हुआ पंकज चौधरी का भव्य स्वागत

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी रविवार को पहली बार मेरठ पहुंचे, जहां पर उनके स्वागत अलग ही अंदाज किया गया. बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली के अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने क्रेन में 15 कुंतल वजनी विशाल माला से पंकज चौधरी को पहनाकर स्वागत किया.

पंकज चौधरी कहा कि कार्यकर्ताओं का जोश बता रहा है कि 2027 में बीजेपी ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी. संगठनात्मक शक्ति और कार्यकर्ताओं का जोश यह दर्शाता है कि बीजेपी का हर कार्यकर्ता राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है. यही 2027 में भाजपा की ऐतिहासिक विजय का आधार बनेगा. पंकज चौधरी के स्वागत में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग भी जुटे थे, क्योंकि कुंवर बासित का अपना गृह क्षेत्र मेरठ है. उन्होंने पंकज चौधरी के स्वागत में पूरी ताकत झोंक दी है. 

 पंकज चौधरी ने पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरण को देखते हुए कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बिना किसी भेदभाव के सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र के साथ कार्य किया जा रहा है. मुख्यमंत्री पद पर योगी आदित्यनाथ के आने के बाद प्रदेश की पहचान बदली है. इस तरह से पंकज चौधरी ने पश्चिम यूपी को साधने में जुट गए हैं. 

सत्ता और संगठन पर पूर्वांचल का दबदबा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से आते हैं. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने पंकज चौधरी भी गोरखपुर से हैं. इस तरह सीएम और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही गोरखपुर क्षेत्र से हो गए हैं. पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी पूर्वांचल में आता है तो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी प्रयागराज क्षेत्र से हैं. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भले ही लखनऊ से सांसद हैं, लेकिन उनका गृह जनपद मिर्जापुर भी पूर्वांचल के इलाके में आता है.


यूपी के दूसरे डिप्टी सीएम बृजेश पाठक लखनऊ कैंट सीट से विधायक हैं. इस तरह से यूपी में बीजेपी की टॉप लीडरशिप पूर्वांचल क्षेत्र से है. योगी सरकार से लेकर बीजेपी संगठन तक में लखनऊ से लेकर गोरखपुर क्षेत्र तक का दबदबा दिख रहा है. योगी सरकार के मोर्चे पर पहले से ही भारी पूर्वांचल का पलड़ा अब संगठन में भी भारी हो चुका है. यही वजह है कि पंकज चौधरी ने मिशन-2027 का आगाज ब्रज इलाके से किया और वेस्ट यूपी को सियासी संदेश देने की कवायद की.

पश्चिम यूपी में बिगड़े समीकरण को करेंगे दुरुस्त

यूपी में बीजेपी संगठन की बागडोर अभी तक मुरादाबाद से आने वाले भूपेंद्र सिंह चौधरी के हाथों में थी, जिसके सहारे पश्चिम यूपी को साधे रखा था, लेकिन अब प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर पूर्वांचल से आने वाले पंकज चौधरी विराजमान हो गए हैं. ऐसे में बीजेपी के सामने क्षेत्रीय संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है.

उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सत्ता में वापसी और सियासी उभार में पश्चिम यूपी का अहम रोल था. लोकसभा चुनाव-2014, 2019 और विधानसभा चुनाव 2017, 2022 में बीजेपी का पश्चिम यूपी में सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा है. इस तरह बीजेपी की सियासी ताकत में पश्चिमी यूपी की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है.


2024 के सियासी झटके से उभारने की कवायद

2024 में बीजेपी को पूर्वांचल के साथ पश्चिमी यूपी और ब्रज के क्षेत्र में सियासी तौर पर गहरा झटका लगा था. 2024 में बीजेपी ने पश्चिमी यूपी में मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर और अमरोहा सीटें जीती हैं, जबकि नगीना, कैराना, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जैसी सीट हार गई है. बागपत और बिजनौर सीट बीजेपी की सहयोगी आरएलडी ने भी जीती थीं.

पश्चिम यूपी की मुरादाबाद, संभल, रामपुर, आंवला जैसी सीटें इस बार हार गई है. इसके अलावा ब्रज क्षेत्र में फिरोजाबाद, बदायूं और लखीमपुर, सीतापुर, कन्नौज, इटावा जैसी सीटें हार गई है. इसके अलावा बुंदेलखंड की पांच में से चार सीटें बीजेपी हार गई और सिर्फ एक सीट ही जीत सकी थी, पूर्वांचल में भी काफी तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा था.

दरअसल, बीजेपी ने पूर्वांचल को साधने के लिए पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंप दी है. इस तरह बीजेपी ने पूर्वांचल का क्षेत्रीय और जातीय समीकरण दोनों का बैलेंस बना लिया है, लेकिन यूपी के बाकी क्षेत्र के साथ संतुलन बनाने की चुनौती है. ऐसे में बीजेपी के लिए लखनऊ से लेकर पश्चिमी यूपी तक के क्षेत्रीय समीकरण साधने की चुनौती है, जिसे दुरुस्त करने के लिए पंकज चौधरी ने बीजेपी के मिशन-2027 का आगाज ब्रज से किया और उसके दूसरे दिन गाजियाबाद के रास्ते मेरठ पहुंचे.

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0