शक्ति स्वरूपा सोनू ने परंपरा तोड़कर संभाला बस का स्टीयरिंग

Oct 18, 2026 - 16:44
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शक्ति स्वरूपा सोनू ने परंपरा तोड़कर संभाला बस का स्टीयरिंग

अलीगढ़

 नवरात्रि के पावन पर्व पर जहां घर-घर मां भगवती की आराधना हो रही है, अलीगढ़-नोएडा हाइवे प्रतिदिन नारीशक्ति का खामोश गवाह बनता है। अलीगढ़ की सोनू मलान जब इस मार्ग पर रोडवेज बस चलाते हुए गुजरती हैं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘सशक्त नारी-समृद्ध उत्तर प्रदेश’ नारा चरित्रार्थ होता दिखाई देता है। पुरुष प्रधान माने जाने वाले परिवहन क्षेत्र में सोनू ने मेहनत और हौसले से अलग पहचान बनाई है।

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में बस चालक के पद पर तैनात सोनू रोज करीब 540 किलोमीटर बस चलाकर यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाती हैं। उनका सफर उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो परंपरागत सोच से आगे बढ़कर अपनी अलग राह बनाना चाहती हैं। योगी सरकार की पहल से परिवहन जैसे क्षेत्र में महिलाओं को अवसर मिलना महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मिशन शक्ति का समग्र उद्देश्य भी नारी सुरक्षा, शिक्षा, सम्मान व स्वावलंबन से जुड़ा है। सोनू मलान की कहानी बताती है कि सही अवसर, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति से महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी जगह बना सकती हैं।

मंडल की इकलौती महिला बस चालक

अलीगढ़ के जट्टारी क्षेत्र स्थित हजियापुर गांव की रहने वाली 28 वर्षीय सोनू मलान ने वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में बस चालक के पद पर कार्यभार संभाला था। वह अलीगढ़ मंडल की इकलौती महिला बस चालक हैं। सोनू अलीगढ़ से नोएडा के बीच रोडवेज बस चलाती हैं और दिन में चार चक्कर लगाकर करीब 540 किलोमीटर की दूरी तय करती हैं। जिम्मेदारी और अनुशासन के साथ वह रोज यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं। स्टीयरिंग व्हील पर एक लड़की को देखकर कई बस यात्रियों के चेहरे पर आश्चर्य के भाव आते हैं, लेकिन सोनू की कुशल ड्राइविंग देखकर वे उनकी तारीफ करना और धन्यवाद करना भी नहीं भूलते। 

12 साल की उम्र से ही ट्रैक्टर चलाने की शौकीन थीं सोनू

सोनू को बचपन से ही गाड़ियां चलाने का शौक था। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने गांव में खेती-किसानी के काम के लिए ट्रैक्टर चलाना शुरू कर दिया था। गाड़ियां चलाने के प्रति उनका यही शौक आगे चलकर जुनून बन गया। वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में महिला बस चालकों की नियुक्ति का अवसर आया, तो सोनू ने भी इसमें रुचि दिखाते हुए आवेदन किया। चयनित महिलाओं में अलीगढ़ की सोनू मलान और गाजियाबाद के सिकंदराबाद क्षेत्र की वेद कुमारी शामिल थीं। इस अवसर ने सोनू को अपने ड्राइविंग शौक को पेशे में बदलने का मौका दिया और वह बस चालक के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल रहीं।

सोशल मीडिया पर भी लोकप्रिय हैं सोनू

सोनू मलान की पहचान सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी-खासी लोकप्रियता है। उनके यूट्यूब पर करीब दो लाख, इंस्टाग्राम पर डेढ़ लाख और फेसबुक पर साढ़े छह लाख फॉलोअर्स हैं। वह अक्सर बस चलाने से जुड़े वीडियो साझा करती हैं, जिन्हें लोग पसंद करते हैं। इस तरह सोनू अपने काम के जरिए न सिर्फ यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचा रही हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी महिलाओं को आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही हैं।

परिवार का साथ मिला, तो हौसले ने भरी उड़ान

सोनू मलान बताती हैं कि शुरुआत में कई लोगों ने कहा कि बस चलाना पुरुषों का काम है। लेकिन उनकी रुचि इसी क्षेत्र में बढ़ती गई और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके मुताबिक, योगी सरकार में उन्हें अवसर मिला और उन्होंने अपने हौसले से इस परंपरागत सोच को चुनौती दी। इस सफर में परिवार ने भी उनका पूरा साथ दिया। उनका भाई भी परिवहन निगम में बस चालक है, जबकि उनके पिता शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हैं। सोनू के अनुसार, बस में सफर करने वाली लड़कियां और महिलाएं उन्हें देखकर सुरक्षित महसूस करती हैं और उनके काम की सराहना भी करती हैं। कई महिलाएं उनसे प्रेरित होकर यह भरोसा जताती हैं कि वे भी अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं। सोनू की कहानी इसी विश्वास को मजबूत करती है कि अवसर और संकल्प साथ हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।

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