किसान की आय, फसल और पानी के हिसाब से तैयार होगी खाद, ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय बना रहा नया मॉडल

Oct 9, 2026 - 04:14
 0  8
किसान की आय, फसल और पानी के हिसाब से तैयार होगी खाद, ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय बना रहा नया मॉडल

ग्वालियर
राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के वैज्ञानिक किसानों की आर्थिक उन्नति, भूमि सुधार और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एक नवोन्मेषी सोर्स बेस्ड कंपोस्ट मॉडल तैयार कर रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अंचल के किसानों को उनकी स्थानीय फसलों, भूमि के प्रकार और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर जैविक व प्राकृतिक खाद बनाने के लिए आत्मनिर्भर बनाना है।

खासबात यह है कि इन इस मॉडल से बनने वाली कंपोष्ट खाद में न केवल मुख्य तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटेशियम के अलावा अन्य 17 सूक्ष्म तत्व होंगे। जिससे किसानों की फसल को पूरा पोषण मिलेगा। साथ ही रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करना पड़ेगा। साथ ही इन मॉडलों को बनाने में प्रयास किया जा रहा है कि कार्बन का उत्सर्जन शून्य हो। जिससे वातावरण भी स्वच्छ रहे। यदि कंपोस्ट बनाने का ये मॉडल अप्रने प्रयोग में सफल रहते हैं तो इन्हें किसानों को अपनाने के लिए बुलाया जाएगा।

किसान की जरूरत के मुताबिक होंगे माउल
    एग्रीफोरेस्ट्री बेस्ड नेचुरल मॉडल
: यह मॉडल कृषि और वानिकी का बेहतरीन समन्वय है। इसमें खेतों और वृक्षों से मिलने वाले जैविक कचरे का उपयोग कर टिकाऊ कंपोस्ट तैयार की जाएगी। यह मॉडल सभी किसानों के लिए होगा।

    हाई-इनकम एग्री-हार्टी नेचुरल फार्मिंग मॉडल: कृषि और उद्यानिकी फसलों (फल व सब्जियां) को ध्यान में रखकर तैयार यह मॉडल व्यावसायिक खेती करने वाले किसानों की उच्च पोषण आवश्यकता को पूरा करता है। इस मॉडल उन किसानों के लिए अनुकूल होगा जो जो आर्थिक रूप से भी अधिक सक्षम हैं और उनके पानी की उपलब्धता है।

    क्लाइमेट-रिजिलिएंट सिस्टम मॉडल: यह मॉडल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, जैसे अनियमित वर्षा या सूखे जैसी परिस्थितियों में भी मिट्टी में नमी और जैविक कार्बन बनाए रखने में सक्षम है। इस मॉडल से उन किसानों को फायदा मिलेगा जिनके पास फसलों की सिंचाई के लिए पानी कम है। कम पानी भी इस खाद वे वे अच्छा उत्पादन ले सकेंगे।

संसाधनों के अनुसार चयन का विकल्प
इन तीनों मॉडलों को किसान की वित्तीय क्षमता, वार्षिक आय और उनके क्षेत्र में पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इससे छोटे, मध्यम और बड़े किसान अपनी आवश्यकता अनुसार सही मॉडल चुनकर कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाली खाद बना सकेंगे। साथ ही किसानों के पास उपलब्ध एग्री वेस्ट या एनीमल वेस्ट का भी उपयोग कर सकेंगे।

जीरो कार्बन एमिशन और मृदा स्वास्थ्य पर जोर
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता शून्य कार्बन उत्सर्जन है। कंपोस्ट बनाने की पारम्परिक प्रक्रियाओं में निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों पर नियंत्रण कर पर्यावरण को सुरक्षित रखा जाएगा।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक
-इस तकनीक से रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता काफी कम होगी, जिससे खेती की लागत घटेगी। इसके साथ ही लगातार रासायनिक खादों के इस्तेमाल से खराब हो रही मिट्टी की जैविक उर्वरता और जल धारण क्षमता में सुधार होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन इन सोर्स बेस्ड मॉडल बनाने का प्रयोग सफल होता है तो इनका प्रदर्शन विभिन्न माध्यमों से किसानों के के सामने किया जाएगा। जिससे वे इन्हें अपना सकें। डॉ. एकता जोशी, वैज्ञानिक व नोडल अधिकारी, आरवीएसकेविवि

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0