झोटा हत्याकांड की जांच तेज, मानसा में CBI की 3 टीमें जुटा रहीं सबूत
मानसा
मानसा में एंटी ड्रग टास्क फोर्स के संचालक परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एंट्री के बाद कई अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। CBI ने 13 अक्टूबर को इस मामले में FIR दर्ज की थी।
हत्या के आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार के कथित संपर्क में रहे कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। इनमें पुलिस अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, CBI हत्या की साजिश, आरोपी के संपर्कों और उसे हथियार लाइसेंस जारी किए जाने से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है। मानसा में जांच के लिए CBI की तीन टीमें सक्रिय बताई जा रही हैं।
दुकानों के मालिकों से भी पूछताछ मामले की जांच के लिए CBI की तीन टीमें मानसा में अलग-अलग स्थानों पर साक्ष्य जुटा रही हैं। जांच एजेंसी की फोरेंसिक टीम ने आरोपी अश्वनी कुमार के मेडिकल स्टोर से सैंपल एकत्र किए हैं। इसके अलावा घटनास्थल के आसपास स्थित दुकानों के मालिकों से भी पूछताछ की गई है। जांच टीम घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों को समझने का प्रयास कर रही है।
जूतों की दुकान पर भी पहुंची फोरेंसिक टीम CBI की टीम ने घटनास्थल के पास स्थित एक जूतों की दुकान का भी निरीक्षण किया। बताया जा रहा है कि गोली लगने के बाद परविंदर सिंह झोटा आखिरी बार इसी दुकान पर गिरे थे। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने यहां से भी सैंपल जुटाए हैं। इन साक्ष्यों की जांच से वारदात के घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है।
SSP की सिफारिश पर जारी हुआ लाइसेंस मानसा के SSP ने 9 अगस्त 2024 को पत्र संख्या 91/NAL के तहत अश्वनी कुमार को हथियार लाइसेंस देने की सिफारिश की थी। इस सिफारिश में उसके खिलाफ दर्ज पांच पुलिस मामलों का भी उल्लेख था। इनमें मानसा के सिटी-2 थाने में 4 अप्रैल 2024 को दर्ज FIR नंबर 66 को उसकी सुरक्षा से जुड़े आधार के तौर पर पेश किया गया था।
इसके बावजूद 21 अगस्त 2024 को लाइसेंस जारी कर दिया गया। इसकी वैधता 20 अगस्त 2029 तक थी। लाइसेंस के तहत अश्वनी कुमार के पास 7.62 एमएम की पिस्टल और 12 बोर की बंदूक थी। उसे एक बार में 50 और एक साल में अधिकतम 100 कारतूस खरीदने की अनुमति भी दी गई थी।
आरोपी के पास पिस्टल और 12 बोर की बंदूक अश्वनी कुमार के पास 7.62 एमएम की एक पिस्टल और 12 बोर की एक बंदूक थी। उसके हथियार लाइसेंस की वैधता 21 अगस्त 2024 से 20 अगस्त 2029 तक बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, झोटा की हत्या में आरोपी ने लाइसेंसी हथियार का इस्तेमाल किया था। सूत्रों का कहना है कि CBI आरोपी के हथियारों और उनसे संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
रंजिश के एंगल से भी जांच हत्या के पीछे पुरानी रंजिश का मामला भी सामने आया है। पुलिस जांच के अनुसार, अश्वनी कुमार वर्ष 2023 की एक घटना के बाद से परविंदर सिंह झोटा से नाराज था।बताया गया है कि उस दौरान झोटा ने अश्वनी कुमार को जूतों की माला पहनाकर शहर में घुमाया था। इस घटना से अश्वनी खुद को अपमानित महसूस करता था। पुलिस के मुताबिक, इसी रंजिश के चलते वह लंबे समय से झोटा को नुकसान पहुंचाने की फिराक में था।
आरोपी की पत्नी भी साजिश में नामजद पुलिस के अनुसार, अश्वनी कुमार की पत्नी नीलम रानी को अपने पति की कथित योजना की जानकारी थी। इसके बावजूद उसने न तो पुलिस को सूचना दी और न ही पति को रोकने का प्रयास किया। इसी आधार पर पुलिस ने नीलम रानी को भी हत्या की साजिश में नामजद किया है। हालांकि, उसकी आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगा।
मुख्य आरोपी 5 दिन के CBI रिमांड पर परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार को 5 दिन के CBI रिमांड पर भेज दिया गया है। आरोपी को मोहाली की CBI कोर्ट में पेश किया गया था। अब जांच एजेंसी उससे हत्या की साजिश, हथियार लाइसेंस और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका को लेकर पूछताछ कर सकेगी।
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