2017 से पहले पोषाहार आपूर्ति में शामिल था शराब माफिया, तीन-तीन महीने नहीं पहुंचता था राशन: सीएम योगी

Sep 9, 2026 - 16:14
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2017 से पहले पोषाहार आपूर्ति में शामिल था शराब माफिया, तीन-तीन महीने नहीं पहुंचता था राशन: सीएम योगी

वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में बच्चों के पोषाहार की सप्लाई तक में शराब माफिया का दखल था। तीन-तीन महीने तक आंगनवाड़ी केंद्रों पर राशन नहीं पहुंचता था और बच्चे अपना टाट लेकर केंद्रों पर आते थे। न शुद्ध पेयजल की व्यवस्था थी, न शौचालय और न गर्म भोजन की सुविधा। पूर्ववर्ती सरकारों में गलती कोई और करता था, लेकिन उसकी गाली आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को मिलती थी। 2017 के बाद सरकार ने पोषाहार वितरण व्यवस्था में बदलाव कर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की। आज आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर पोषण और प्रारंभिक शिक्षा का मजबूत आधार बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, बच्चों, किशोरियों तथा उनके परिवारों के पोषण, स्वास्थ्य, देखभाल को समर्पित 9वें राष्ट्रीय पोषण माह (9 सितंबर से 8 अक्टूबर, 2026) का वाराणसी में शुभारंभ किया। सीएम ने कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसके साथ ही उन्होंने नन्हें बच्चों को गोद में लेकर दुलारा और उनका अन्नप्राशन कराया। सीएम योगी ने इस मौके पर यूपी समेत देश विभिन्न राज्यों से आई आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों से संवाद किया और आंगनवाड़ी केंद्रों पर आधारित लघु फिल्म भी देखी।

नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना’ की अवधारणा पर आगे बढ़ रहा यूपी
मुख्यमंत्री ने शासन की आदर्श व्यवस्था की शाश्वत अवधारणा को रामराज्य से जोड़ते हुए गोस्वामी तुलसीदास की पंक्तियों ‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना। नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना॥’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसका आशय ऐसी व्यवस्था से है, जहां कोई गरीब, दुखी, दीन-हीन या कमजोर न हो और हर व्यक्ति स्वस्थ एवं समर्थ समाज के निर्माण में योगदान दे सके। इसी सोच के साथ केंद्र और प्रदेश सरकार मातृ एवं शिशु पोषण, महिलाओं के स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और आंगनवाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी है।

कुशल युवा ही भारत को नेतृत्व देगा
सीएम ने कहा कि सक्षम विद्यार्थी आगे चलकर कुशल युवा बनेगा और यही कुशल युवा आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला रखेगा। वही भारत को नेतृत्व देगा और विकसित भारत के संकल्पों को आगे बढ़ाएगा। इसलिए बच्चों के शुरुआती वर्षों में पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा पर निवेश देश के भविष्य में निवेश है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में वर्ष 2001 से जिन योजनाओं और विजन को जमीन पर उतारा, वही मॉडल आज देश के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों का बदला स्वरूप
सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति बेहद खराब थी। बड़ी संख्या में केंद्र जर्जर अवस्था में थे। बच्चों के लिए पेयजल, शौचालय और हॉट मील जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। पोषाहार की आपूर्ति भी नियमित नहीं थी। सरकार बनने के बाद जब आंगनवाड़ी केंद्रों की समीक्षा की गई तो पोषाहार आपूर्ति व्यवस्था में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। उस समय पोषाहार की आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्था में एक शराब माफिया से जुड़े व्यक्ति के शामिल होने की जानकारी सामने आई थी। इसे देखते तत्काल इसकी गुणवत्ता की जांच के आदेश दिए गए और आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव किया गया। पिछले साढ़े नौ वर्षों में 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को नया स्वरूप दिया गया। नए मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के अनुकूल आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। एक केंद्र के निर्माण एवं रिनोवेशन पर करीब 30 लाख रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। बाउंड्रीवॉल, बच्चों के लिए शौचालय, शुद्ध पेयजल, पोषण वाटिका और एलईडी स्क्रीन जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

‘मेरी आंगनवाड़ी-मेरी जिम्मेदारी’ बने पोषण माह का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह की थीम ‘मेरी आंगनवाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ रखी गई है। इसका उद्देश्य स्पष्ट है कि आंगनवाड़ी केंद्रों की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है। प्रत्येक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, ग्राम पंचायत और गांव के नागरिकों को अपनी आंगनवाड़ी की जिम्मेदारी लेनी होगी। पोषण माह में पांच प्रमुख विषयों- आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताजा एवं हॉट-कुक्ड मील, सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही, बाल शिक्षा यानी प्रारंभिक शिक्षा और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पर खास ध्यान देने की आवश्यकता है। बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए संतुलित एवं विविध आहार जरूरी है। भोजन में अत्यधिक नमक या मिठास से बचना चाहिए। केवल मूंग की दाल की खिचड़ी देने के बजाय उसमें गाजर व दूसरी सब्जियां शामिल करने से भोजन का स्वाद, रंग और पोषण तीनों बेहतर होते हैं। पोषण अभियान तभी सफल होगा, जब बच्चे खुशी से भोजन करें।

1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों से 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक सेवाएं
सीएम ने कहा कि प्रदेश में करीब 1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं और 897 बाल विकास परियोजनाओं के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हर माह करीब 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पोषण सेवाएं पहुंच रही हैं। करीब 35.46 लाख बच्चों को हॉट-कुक्ड मील उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि करीब 46 लाख बच्चों के वजन, स्टंटिंग और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जा रही है। गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। 

टेक-होम राशन में तकनीक और पारदर्शिता
मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार की नवीन पोषण गाइडलाइन के अनुरूप प्रदेश में रेसिपी आधारित अनुपूरक पोषाहार लागू किया गया है। टेक-होम राशन यानी टीएचआर व्यवस्था को तकनीक आधारित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया गया है। प्रदेश में 204 टीएचआर प्लांट स्थापित हो चुके हैं और इनके संचालन में महिला स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस व्यवस्था से 20 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। टीएचआर के परिवहन से लेकर आंगनवाड़ी केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया में जीपीएस ट्रैकिंग और रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक पैकेट पर क्यूआर कोड लगाया गया है, जिससे उसकी डिजिटल ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित हो सके। पोषाहार की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्वालिटी कंट्रोल की जिम्मेदारी भारत सरकार की महत्वपूर्ण संस्था को दी गई है।

आंगनवाड़ी प्रारंभिक शिक्षा की पहली पाठशाला
योगी ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों को बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, सीखने की क्षमता और सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया जा रहा है। बाल वाटिकाओं में बच्चों को खेल-खेल में अक्षर और अंकों का ज्ञान दिया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों की उम्र व रुचि के अनुसार गतिविधियों के माध्यम से उन्हें पढ़ा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कानपुर के आंगनवाड़ी केंद्र का अपना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वहां 20-22 बच्चे मौजूद थे और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उन्हें खेल एवं गीत के माध्यम से पढ़ा रही थीं। एक कार्यकर्ता बच्चों को एक, एक, एक - मेरी नाक एक और दो, दो, दो - मेरी आंख दो, गाकर संख्या ज्ञान दे रही थी। एकाएक मुझे देखकर वे लोग हैरान रह गए। मैंने कार्यकर्ताओं से कहा कि आप लोग घबराएं नहीं और जिस तरह बच्चों को पढ़ा रही थीं, उसी तरह पढ़ाती रहें। करीब तीन वर्ष की एक बच्ची से जब मैंने पूछा कि वह क्या सीख रही थी तो बच्ची ने तत्काल जवाब दिया- एक, एक, एक - मेरी नाक एक। देखिए, बच्ची ने कितनी आसानी से संख्या के साथ शरीर के अंग की पहचान भी सीख ली थी।

दो-दो यूनिफॉर्म से बच्चों में बढ़ेगा आत्मविश्वास
मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में बच्चों को दी जा रहीं सुविधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल स्कूल तक बच्चों की पहुंच सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है। सीएम ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक बार मैंने एक बच्ची को नंगे पैर स्कूल जाते देखा। उसके पास पर्याप्त गर्म कपड़े भी नहीं थे। बातचीत में पता चला कि उसके छोटे भाई के पास जूते थे। इस अनुभव से मुझे परिवार और समाज में बेटा-बेटी के बीच भेदभाव का अहसास हुआ। तब मैंने तत्काल बेटियों के लिए यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और स्वेटर की व्यवस्था के निर्देश दिए गए और बाद में इसे सभी बच्चों तक सुनिश्चित किया। आज प्रदेश में 1.60 करोड़ बच्चों को हर वर्ष दो-दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे और स्वेटर उपलब्ध कराया जा रहा है। अब बाल वाटिकाओं में आने वाले बच्चों के लिए भी दो-दो यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की व्यवस्था अनिवार्य की जा रही है।

ऑपरेशन कायाकल्प और निपुण भारत से बदली स्कूलों की तस्वीर
मुख्यमंत्री ने बताया कि ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से 1.36 लाख विद्यालयों को बेहतर भवन और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। पेयजल, बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय और बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। पहले कक्षा तीन से सात तक बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल छोड़ देते थे। अध्ययन में पता चला कि भोजन, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में खासतौर पर बेटियां पढ़ाई छोड़ रही थीं। इन सुविधाओं को मजबूत करने से ड्रॉपआउट की स्थिति में सुधार हुआ है। आंगनवाड़ी में अक्षर और अंकों का ज्ञान हासिल करने के बाद बच्चों की शैक्षिक नींव को निपुण भारत अभियान के माध्यम से मजबूत किया जा रहा है। पढ़ने-लिखने की क्षमता विकसित करने का यह प्रयास अब दूसरी कक्षा तक सीमित न रहकर पांचवीं कक्षा तक विस्तारित किया गया है। पहले बच्चों में जो लाचारी दिखाई देती थी, वह उनकी नहीं बल्कि तत्कालीन व्यवस्था की अकर्मण्यता थी।

प्रोजेक्ट अलंकार से 2100 इंटर कॉलेजों का पुनरुद्धार
मुख्यमंत्री ने माध्यमिक शिक्षा में प्रोजेक्ट अलंकार के तहत किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 40 वर्ष पुराने सरकारी और अशासकीय सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों को धनराशि उपलब्ध कराकर करीब 2100 इंटर कॉलेजों का पुनरुद्धार किया गया है। इन विद्यालयों में स्मार्ट लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास और बेहतर फर्नीचर जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। अटल टिंकरिंग लैब और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसी नई व्यवस्थाओं से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है। आंगनवाड़ी से शुरू होने वाली शिक्षा की यात्रा निपुण भारत, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट तक जाती है। इस पूरी श्रृंखला को रोजगार और कौशल से जोड़कर प्रदेश में मजबूत शैक्षिक एवं रोजगारपरक इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है।

मातृ वंदना योजना से माताओं को आर्थिक संबल
योगी ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को पोषण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि गर्भवती और धात्री माताओं की देखभाल के साथ उन्हें आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना भी जरूरी है। देश में अब तक करीब पांच करोड़ माताओं को 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। मां के स्वास्थ्य और पोषण में किया गया निवेश बच्चे के पूरे जीवन की नींव को मजबूत करता है। स्वस्थ मां से स्वस्थ बच्चे का जन्म होता है, स्वस्थ बच्चा आगे चलकर स्वस्थ विद्यार्थी बनता है और स्वस्थ विद्यार्थी ही कुशल युवा के रूप में देश की अर्थव्यवस्था और विकास को नई दिशा देता है।

आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ा, बीमा कवर भी
मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चों के स्वस्थ और सशक्त बचपन के निर्माण में उनकी जिम्मेदारी सबसे अहम है। वर्ष 2017 से पहले आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां मानदेय व सुविधाओं को लेकर धरना-प्रदर्शन करती थीं। तब उन्हें महज तीन हजार रुपये मानदेय मिलता था, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर 12 हजार रुपये कर दिया है, जो पहले से 4 गुना है। सहायिकाओं का मानदेय भी बढ़ाकर छह हजार रुपये किया गया है। इसके साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं और उनके परिवार को पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर भी उपलब्ध कराया गया है। करीब 1.56 लाख आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को स्मार्टफोन उपलब्ध कराए जा चुके हैं और शेष को भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। स्मार्टफोन के माध्यम से केंद्र की गतिविधियों का रियल टाइम डेटा अपलोड किया जा रहा है। इससे निगरानी मजबूत होने के साथ प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन का लाभ भी मिल सकता है।

गांव-गलियों से बनेगा विकसित भारत
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की वास्तविक शक्ति उसके बच्चे और युवा हैं। बच्चों का स्वस्थ बचपन ही मजबूत भारत की नींव तैयार करेगा। इसलिए आंगनवाड़ी केंद्रों, बाल वाटिकाओं और बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों को केवल सरकारी संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रारंभिक केंद्र के रूप में देखने की आवश्यकता है। पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा और कौशल विकास को एक साथ आगे बढ़ाकर ही सक्षम विद्यार्थी, कुशल युवा और आत्मनिर्भर नागरिक तैयार किए जा सकते हैं।

प्रधानमंत्री जी के विजन से मजबूत हो रही देश की बुनियाद
सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश की बुनियाद को मजबूत करने के लिए जिस विजन के साथ काम शुरू किया, उसका असर आज जमीन पर दिखाई दे रहा है। गरीबों, कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए योजनाएं अब शासन के एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री जी ने आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। यह लक्ष्य केवल दिल्ली में बैठकर पूरा नहीं होगा। इसकी वास्तविक आधारशिला देश के गांवों, गलियों और समाज के सबसे शुरुआती स्तर पर रखी जाएगी। आंगनवाड़ी केंद्र और बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालय इसी आधारशिला के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।

काशी को मिली नई आभा और नई काया
मुख्यमंत्री ने वाराणसी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की कर्मभूमि बताते हुए कहा कि काशी बाबा विश्वनाथ की पावन धरती होने के साथ सनातन की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक राजधानी है। मोदी जी ने काशी की पुरातन पहचान को सुरक्षित रखते हुए उसे नए कलेवर और नई पहचान से जोड़ा है। आज काशी नई आभा और नई काया के साथ पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। काशी में परंपरा और आधुनिकता का जिस तरह समन्वय दिखाई देता है, उसी प्रकार देश के विकास मॉडल में भी अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक सुविधाओं को अपनाने की आवश्यकता है। पोषण और शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बदलाव भी इसी सोच का हिस्सा हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य, मंत्री अनिल राजभर, मंत्री रविंद्र जायसवाल, मंत्री दयाशंकर मिश्र 'दयालु', राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला, राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, सचिव महिला एवं बाल विकास मंत्रालय अनिल मलिक, अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी आदि मौजूद रहीं।

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