स्कूल बस की ट्रॉले से भीषण भिड़ंत, सात बच्चे घायल

Sep 9, 2026 - 17:44
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स्कूल बस की ट्रॉले से भीषण भिड़ंत, सात बच्चे घायल

नेशनल हाईवे-552 पर गौरई मोड़ के पास हादसा, बाल-बाल बची मासूमों की जान; स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

अमरकांत चौहान, ब्यूरो प्रमुख, चंबल संभाग एवं ग्वालियर।

भिंड जिले में नेशनल हाईवे-552 पर बुधवार को मासूम बच्चों से भरी स्कूल बस और सीमेंट से लदे ट्रॉले की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस में सवार बच्चों में चीख-पुकार मच गई। हादसे में सात बच्चे घायल हो गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई और प्राथमिक उपचार के बाद सभी की हालत खतरे से बाहर बताई गई है।
हादसा रौन थाना क्षेत्र में गौरई मोड़ के पास हुआ। बताया गया है कि स्कूल बस में छह से 12 वर्ष की उम्र के बच्चे सवार थे। बस गौरई कस्बे के पास पहुंची थी, तभी सामने से आ रहे सीमेंट से लदे ट्रॉले से उसकी टक्कर हो गई। प्रारंभिक जानकारी में बस की रफ्तार अधिक होने और चालक का वाहन पर नियंत्रण प्रभावित होने की बात सामने आई है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


टक्कर के बाद बस में सवार बच्चों में अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे और बस में फंसे बच्चों को बाहर निकालने में मदद की। सूचना मिलते ही पुलिस और 108 एंबुलेंस भी मौके पर पहुंच गई। घायल बच्चों को उपचार के लिए रौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
हादसे में 12 वर्षीय अल्पेश राजावत, 11 वर्षीय ऋषभ राजावत, छह वर्षीय सार्थक राजावत, आठ वर्षीय अप्रंश, सात वर्षीय प्रद्युम्न, छह वर्षीय देव राजावत और 12 वर्षीय कीर्ति राजावत घायल हुए हैं। अस्पताल में चिकित्सकों ने सभी बच्चों की जांच कर प्राथमिक उपचार किया। फिलहाल सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है।
हादसे की सूचना मिलते ही बच्चों के परिजन भी अस्पताल पहुंच गए। बच्चों को चोट लगने की खबर से परिजनों में हड़कंप मच गया। अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा, लेकिन बच्चों की हालत खतरे से बाहर होने की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली।
यह हादसा भले ही बड़ा जनहानि का कारण बनने से टल गया, लेकिन इसने जिले में संचालित स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल बसों की निर्धारित गति, चालकों की दक्षता और प्रशिक्षण, वाहनों की फिटनेस तथा सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर पर हो रहा है, इसकी जांच जरूरी हो गई है।
स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर, आपातकालीन निकास, अग्निशमन यंत्र और अन्य अनिवार्य सुरक्षा इंतजामों की व्यवस्था बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में रौन के पास हुआ हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि स्कूल बसों की निगरानी व्यवस्था के लिए भी चेतावनी है।
रौन पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि हादसे की जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ प्रशासन जिले में संचालित अन्य स्कूल बसों की भी फिटनेस और सुरक्षा मानकों की जांच करता है या नहीं।
क्योंकि स्कूल बस में बैठे बच्चे केवल यात्री नहीं होते, बल्कि अपने माता-पिता के भरोसे की जिम्मेदारी भी उस वाहन के साथ लेकर चलते हैं। रौन में सात मासूम घायल हुए हैं और बड़ी अनहोनी टल गई, लेकिन यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि स्कूल बसों की सुरक्षा में किसी भी स्तर की लापरवाही की कीमत बेहद भारी हो सकती है।

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