बजट में फिर उड़ा बिलासपुर का सपना सीएम के दावे, तोखन साहू की दिल्ली दौड़… लेकिन एयरपोर्ट फिर खाली हाथ
" साहस समाचार "
बिलासपुर । हर चुनाव में “हवाई कनेक्टिविटी” का सपना दिखाने वाला बिलासपुर एक बार फिर केंद्र सरकार के बजट में ठगा सा नजर आया। आम बजट 2026-27 में बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास के लिए कोई ठोस फंड नहीं दिया गया। मुख्यमंत्री के वादे, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू की कथित कोशिशें और मंचों से किए गए ऐलान—सब कागजों में ही सिमट कर रह गए।
राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि अगर बिलासपुर सच में सरकार की प्राथमिकता में होता, तो बजट में उसका नाम क्यों नहीं दिखा? क्या यह सिर्फ चुनावी शहर बनकर रह गया है, जहां वादे तो होते हैं लेकिन विकास की उड़ान को मंजूरी नहीं मिलती?
देश के कई छोटे शहर—जहां न बिलासपुर जैसी आबादी है, न व्यापारिक गतिविधियां—आज नियमित फ्लाइट से जुड़े हैं। वहीं छत्तीसगढ़ की न्यायधानी, हाईकोर्ट, एम्स, बड़े उद्योग और शिक्षा संस्थानों वाला बिलासपुर आज भी हवाई नक्शे के कोने में खड़ा है।
जानकार बताते हैं कि बिलासपुर एयरपोर्ट अभी भी सी-श्रेणी में अटका है। जब तक इसे सी-04 श्रेणी में नहीं लाया जाता, तब तक दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों से सीधी उड़ान महज सपना बनी रहेगी। इसके लिए करीब 150 से 200 करोड़ रुपये की जरूरत है, लेकिन केंद्र सरकार ने इस बार भी फाइल आगे बढ़ाने से परहेज किया।
राजनीति के स्तर पर बयान जरूर खूब आए। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कई बार दावा किया कि वे बिलासपुर एयरपोर्ट के लिए दिल्ली में प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री भी मंचों से इसे विकास का अहम मुद्दा बताते रहे। लेकिन बजट में नतीजा शून्य रहा। इससे यह सवाल और गहराता है कि क्या छत्तीसगढ़ के नेताओं की आवाज दिल्ली तक उतनी मजबूत नहीं, या फिर बिलासपुर को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि हवाई सेवा के बिना बिलासपुर निवेश के मामले में पिछड़ता जा रहा है। मेडिकल इमरजेंसी, न्यायिक कार्य और उद्योग—all जगह समय और संसाधन की भारी कीमत चुकानी पड़ती है।
अंबिकापुर एयरपोर्ट का उदाहरण भी सरकार के सामने है, जहां उद्घाटन तो हुआ लेकिन पुख्ता प्लानिंग और संसाधनों के अभाव में संचालन जूझ रहा है। बिलासपुर के मामले में तो हालात और भी गंभीर हैं—यहां तो बुनियादी फंडिंग ही नहीं मिल पाई।
अब सवाल सीधा है—
क्या बिलासपुर सिर्फ भाषणों और पोस्टरों का शहर बनकर रहेगा?
या फिर केंद्र और राज्य सरकारें राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाकर इसे हवाई कनेक्टिविटी का हक देंगी?
साहस समाचार यह सवाल सत्ता से पूछता रहेगा। क्योंकि विकास तब नहीं रुकता जब जनता इंतजार करती है, बल्कि तब रुकता है जब जिम्मेदार जवाब देना छोड़ देते हैं।
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