विलगांव चौधरी में 5.50 करोड़ के निर्माण कार्यों की फेहरिस्त, अब जमीन पर हिसाब की दरकार!
विलगांव चौधरी में 5.50 करोड़ के निर्माण कार्यों की फेहरिस्त, अब जमीन पर हिसाब की दरकार!
33 निर्माण कार्यों की सूची में पेरीफेरल स्टोन बंड, रपटे और तालाब-पोखर शामिल; 80 लाख रुपये के एक मद का भी उल्लेख, स्वीकृति से लेकर भुगतान और मौके पर हुए कामों की जांच से सामने आएगी हकीकत
मुरैना
ग्राम पंचायत विलगांव चौधरी में निर्माण कार्यों को लेकर तैयार की गई सूची ने गांव में विकास कार्यों के खर्च और उनकी जमीनी हकीकत की पड़ताल का मुद्दा खड़ा कर दिया है। उपलब्ध दस्तावेज में पेरीफेरल स्टोन बंड, रपटा निर्माण और तालाब-कम-पोखर निर्माण सहित करीब 33 कार्यों का उल्लेख है। दस्तावेज के अंत में इन कार्यों की कुल लागत लगभग 5.50 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि 80 लाख रुपये की एक अलग राशि के साथ विभिन्न मदों का जिक्र भी दर्ज है। अब सबसे अहम सवाल यह है कि इन कार्यों की वास्तविक स्वीकृत लागत कितनी है, कितनी राशि खर्च या भुगतान की जा चुकी है और मौके पर निर्माण की स्थिति क्या है?
दस्तावेज में विलगांव चौधरी के अलग-अलग स्थानों पर स्टोन बंड निर्माण के कार्य दर्ज हैं। इनमें वृक्षारोपण स्थल, एमएस रोड के पास, शांतिधाम, विभिन्न मंदिरों, पार्क और अन्य स्थानों का उल्लेख है। इसके अलावा रामचंद्र का पुरा, जवाहर कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में रपटों के निर्माण तथा धाकड़ मोहल्ले, पानी की टंकी के पास और अन्य स्थानों पर तालाब-कम-पोखर निर्माण के कार्य सूचीबद्ध हैं। प्रत्येक कार्य के सामने एक आईडी और कुछ संख्यात्मक प्रविष्टियां भी दर्ज हैं।
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33 कार्य, करोड़ों का हिसाब और कई सवाल
सूची में कार्यों की संख्या और राशि से जुड़े विवरण सामने आने के बाद जरूरी है कि प्रत्येक निर्माण की अलग-अलग जांच की जाए। कितने कार्य पूरे हो चुके हैं, कितने अधूरे हैं और कितनों का केवल कागजों में उल्लेख है? क्या निर्माण की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप है? क्या स्वीकृत राशि और वास्तविक खर्च का मिलान किया गया है? इन सवालों का जवाब संबंधित निर्माणों के भौतिक सत्यापन, माप पुस्तिका, स्वीकृति आदेश, बिल-वाउचर और भुगतान रिकॉर्ड से ही मिल सकता है।
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जिम्मेदार - जिम्मेदारी तय होना जरूरी
उपलब्ध सूची में उपयंत्री सुनील शाक्य, जनपद पंचायत जौरा और ग्राम पंचायत विलगांव चौधरी का उल्लेख है। सरपंच के रूप में ऊषा बघेले का नाम भी दर्ज है। ऐसे में संबंधित विभाग से कार्यवार स्वीकृत राशि, निर्माण की वर्तमान स्थिति, भुगतान और गुणवत्ता जांच का ब्योरा सामने आना चाहिए। यदि किसी कार्य में अनियमितता मिलती है, तो जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
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सरपंच सचिव से लेकर इंजिनियर तक की मिली भगत से धांधली.
दरहसल,सरपंच के जिन 33 निर्माण कार्य की सूची सूची सामने आई है उनमें से अधिकांश निर्माण कार्य तो धरातल पर है ही नहीं कुछ एक दो है भी उनमें से कोई अधूरा है तो कोई समय से पहले ही जर्जर हो चुका है। अब ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है। कि अधिक जो निर्माण कार्य मौके पर है ही नहीं उनको उपयंत्री सुनील शाक्य ने पास कैसे कर दिया है। क्या इस पूरे मामले में सरपंच सचिव से लेकर उपयंत्री तक की भूमिका संदिग्ध है। और अगर ऐसा है तो जिम्मेदार ऐसे भ्रष्ट लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई करेंगे.?
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