नई खेलो इंडिया योजना : पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में गाँव से विश्व तक भारत की नई खेल यात्रा- विश्वास कैलाश सारंग
भोपाल
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में नई खेलो इंडिया योजना का लक्ष्य गाँव से विश्व तक यानि जमीनी स्तर से लेकर ओलंपिक स्तर तक खिलाड़ियों की पूरी विकास-श्रृंखला तैयार कर भारत को खेल महाशक्ति बनाना है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियानों के माध्यम से भारतीय खेल संस्कृति को गाँवों, स्कूलों और सामान्य परिवारों तक पहुँचाया है। प्रतिभा पहचान, आधुनिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, बेहतर अधोसंरचना और अंतर्राष्ट्रीय एक्सपोजर पर बढ़ते जोर ने भारतीय खिलाड़ियों के लिए बेहतर विकास मार्ग तैयार किया है। ओलंपिक और पैरालंपिक खिलाड़ियों को निरंतर प्रोत्साहन, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम जैसी व्यवस्थाओं को मजबूती तथा राष्ट्रीय खेल महासंघों और प्रशिक्षण संस्थानों पर बढ़ता निवेश इस सोच को दर्शाता है कि भारत की खेल शक्ति केवल कुछ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में नहीं बल्कि करोड़ों युवाओं की क्षमता को अवसर देने में निहित है। प्रधानमंत्री मोदी जी का खेलों के प्रति यह दृष्टिकोण आज पदक जीतने वाले भारत के साथ स्वस्थ, आत्मविश्वासी, अनुशासित और विश्व मंच पर नेतृत्व करने वाले भारत की कल्पना को साकार करेगा, जहाँ हर युवा विकसित भारत 2047 के निर्माण के महायज्ञ में अपनी सार्थक आहुति देगा।
व्यापक दृष्टिकोण के फलस्वरुप प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महत्वाकांक्षी नई खेलो इंडिया योजना के लिये वर्ष 2026–27 से 2030–31 की अवधि के लिये ₹36,441 करोड़ राशि की मंज़ूरी प्रदान की है। इससे 10 गुना ज्यादा खिलाड़ी लाभान्वित होंगे। यह केवल खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन की योजना नहीं बल्कि भारत के युवा सामर्थ्य को खेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल, अनुशासन, तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मक उत्कृष्टता से जोड़ने की एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय परियोजना है। अब लक्ष्य केवल प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को खोज लेना नहीं बल्कि उन्हें प्रतिभा पहचान से प्रशिक्षण, प्रतियोगिता, उच्च स्तरीय कोचिंग, खेल विज्ञान, अंतर्राष्ट्रीय अनुभव और ओलंपिक तैयारी तक निरंतर सहयोग उपलब्ध कराना है।
नई खेलो इंडिया योजना से मध्यप्रदेश को खेल सुविधाओं और खिलाड़ियों के लिए बड़ा अवसर मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिये समस्त आवश्यक प्रयास करेगा। प्रदेश में 18 खेलों की 11 अकादमियां और पहले से संचालित है। खेलो इंडिया के 52 सेंटर्स को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खेल प्रतिभा और क्षमता के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों के लिए रणनीति तैयार की जाएगी।
किसी भी खिलाड़ी की यात्रा का पहला पड़ाव अक्सर उसका विद्यालय और स्थानीय खेल मैदान होता है। यह वह स्थान हैं जहाँ बच्चा सीखता भी है, खेलता भी है और अपनी क्षमता को पहचानता भी है। इसलिए खेलो इंडिया फीडर स्कूल और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय जैसी पहलें विद्यालयों को केवल शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि प्रतिभा पहचान और खेल विकास का आधार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। भारत खेलो नीति में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को समाहित करते हुए शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर शारीरिक क्षमता, रचनात्मकता, अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और समग्र व्यक्तित्व विकास से जोड़ने पर बल दिया गया है।
भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विशाल युवा आबादी है, लेकिन प्रतिभा और पदक के बीच की दूरी अक्सर पर्याप्त प्रशिक्षण, प्रतियोगिता, खेल विज्ञान और अवसरों की कमी से निर्धारित होती है। यह नई योजना इस अंतर को कम कर खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रदर्शन के लिये तैयार करेगी। एथलीट विकास मार्ग को इस प्रकार परिकल्पित किया गया है कि प्रतिभा पहचान के बाद खिलाड़ी को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, नियमित प्रतिस्पर्धा, उच्च स्तरीय कोचिंग, अंतर्राष्ट्रीय अनुभव और ओलंपिक तैयारी की क्रमिक सुविधाएँ मिलती रहें। इससे जमीनी प्रतियोगिताओं से शुरू होकर खेलो इंडिया और आगे टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम तक की प्रगति सुनिश्चित होगी।
इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट्स (ई-केआईएस) नई खेलो इंडिया योजना में शुरू की गई एक विशेष श्रेणी है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर युवा खेल प्रतिभाओं की पहचान करके उन्हें आगे बढ़ाना और देश के एथलीट विकास तंत्र का लगभग 10 गुना विस्तार करना है। अब भारत का लक्ष्य केवल चैंपियन खोजने का नहीं बल्कि चैंपियन तैयार करने की प्रणाली विकसित करने का है।
राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, खेलो इंडिया उत्कृष्टता केंद्र, भारतीय खेल प्राधिकरण प्रशिक्षण केंद्र, मान्यता प्राप्त खेल अकादमियाँ, खेलो इंडिया केंद्र तथा सशस्त्र बलों की युवा खेल कंपनियाँ इस पूरी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ियाँ हैं। इन संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय प्रतिभा को उसके खेल कैरियर के विभिन्न चरणों में आवश्यक अवसर और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में सहायक होगा।
एक सशक्त राष्ट्र वह नहीं जिसमें कुछ महान खिलाड़ी हों बल्कि वह है जिसमें हर वर्ग को अपनी क्षमता विकसित करने का अवसर मिले। इस योजना में फिट इंडिया मूवमेंट को व्यापक बनाने का उद्देश्य भारतीय समाज में सक्रिय और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना है, जहां खेल की भूमिका पदक से कहीं बड़ी हो जाती है। खेल बच्चों में अनुशासन, युवाओं में आत्मविश्वास, समुदाय में सहभागिता और समाज में स्वास्थ्य-संस्कृति को बढ़ावा देता है।
महिलाओं की खेलों में भागीदारी, सीमावर्ती एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक सुविधाएँ, मादक द्रव्यों के सेवन के विरुद्ध खेल-आधारित पहल तथा पैरा-एथलीटों और पारंपरिक खेलों को समर्थन ये सभी पहल खेल को समावेशी सामाजिक परिवर्तन के माध्यम में बदलेंगी।
पारंपरिक खेलों को आधुनिक खेल पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ना सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक प्रतिस्पर्धात्मक खेल के बीच एक सार्थक सेतु बनेगा। इससे भारत की खेल पहचान केवल वैश्विक मानकों को अपनाने वाली नहीं बल्कि अपनी परंपराओं को आधुनिकता के साथ जोड़ने वाली बनेगी।
किसी खिलाड़ी को उत्कृष्टता के स्तर तक पहुँचाने में प्रशिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसी दृष्टिकोण से राष्ट्रीय कोच प्रत्यायन बोर्ड जैसी व्यवस्था कोचिंग योग्यताओं के मानकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। अब भविष्य का प्रशिक्षक केवल तकनीक सिखाने वाला प्रशिक्षक नहीं बल्कि खेल विज्ञान, पोषण, मनोविज्ञान, डेटा, प्रदर्शन विश्लेषण और खिलाड़ी कल्याण की समझ रखने वाला विशेषज्ञ होगा।
वर्तमान खेल केवल प्रतिभा और परिश्रम पर निर्भर नहीं है। आज स्पोर्ट्स साइंस, डेटा एनालिटिक्स, पोषण, रिकवरी, मनोविज्ञान, प्रदर्शन विश्लेषण और आधुनिक तकनीक खिलाड़ी की सफलता के महत्वपूर्ण आधार हैं। एकीकृत डिजिटल खेल मंच की परिकल्पना इस परिवर्तन को और गति देगी। प्रतिभा पहचान, प्रशिक्षण, प्रतियोगिता, खिलाड़ी का प्रदर्शन, खेल अवसंरचना और एथलीट सहायता एक डिजिटल व्यवस्था से जुड़े हों तो निर्णय अधिक डेटा-आधारित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाए जा सकेंगे। इससे भविष्य का खिलाड़ी केवल मैदान पर मेहनत नहीं करेगा बल्कि विज्ञान और तकनीक उसके प्रदर्शन को लगातार बेहतर बनाने में साथ देंगे।
नई खेलो इंडिया योजना का प्रभाव केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं रहेगा। यह भारत के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्यों से जुड़ी हुई योजना है। यह योजना वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों से लेकर भविष्य के ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी की आकांक्षा तथा विकसित भारत 2047 के संकल्प तक, खेल भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
एक ऐसा भारत, जहाँ गाँव का प्रतिभाशाली बच्चा अपने सपने को केवल सपना न समझे बल्कि उसके पास उसे पूरा करने का स्पष्ट मार्ग हो जो उसे वैश्विक मंच तक पहुँचने का माध्यम बनें। यह केवल खेल नीति नहीं बल्कि भारत के युवाओं के सामर्थ्य को पहचानने, उसे अवसर देने और राष्ट्र निर्माण की शक्ति में बदलने का संकल्प है। प्रधानमंत्री मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की यह नई खेल यात्रा पदक जीतने के साथ खेल शक्ति से युवा शक्ति और युवा शक्ति से विकसित भारत के निर्माण की यात्रा बनेगी।
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