कैथल में पराली जलाने का एक भी मामला नहीं, 60 हजार एकड़ में धान कटाई के बाद किसानों को राहत
कैथल
सरकार की तरफ से चलाई जा रही फसल अवशेष प्रबंधन योजना किसानों को अब रास आने लगी है। जिले में अब तक 60 हजार एकड़ में धान फसल की कटाई हो चुकी है, लेकिन एक भी किसान ने धान अवशेष नहीं जलाएं हैं। धान कटते ही किसान बेलर से अवशेषों की गांठें बनवा रहे हैं, जो फैक्टरी में भेजी जा रही है। इससे किसान को भी फायदा हो रहा है और जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ रही है।
बता दें पिछले साल जिले में कुल 11 लोकेशन सामने आई थी। 13 अक्टूबर को पहली लोकेशन धान अवशेष की मिली थी, लेकिन इस बार राहत की बात ये है की 60 हजार एकड़ में धान कटाई होने के बाद भी किसी किसान ने अवशेष नहीं जलाए हैं।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की टीम ने किया कैथल जिले का दौरा
जिले में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के मुख्य वैज्ञानिक प्रवीण गुप्ता ने कैथल जिले का दौरा किया। उन्होंने कई ब्लाकों में कृषि विभाग के साथ धान अवशेष प्रबंधन को लेकर खेतों का दौरा किया। कई भी इस तरह की लोकेशन नहीं मिली है की खेतों में धान अवशेष जलाए जा रहे हो।
बता दें कि जिले में धान अवशेष जलाने से रोकने के लिए कुल 629 टीमों का गठन किया हुआ है, ये टीमें गांव-गांव जाकर किसानों को धान अवशेष जलाने से रोकने बारे जागरूक कर रही हैं। इसके साथ-साथ धान अवशेष खेतों में मिलाने के फायदे भी बताए जा रहे हैं।
60 हजार किसानों ने किया साढ़े चार लाख एकड़ का पंजीकरण : मलिक
कृषि विभाग के कार्यकारी अभियंता जगदीश मलिक ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन योजना किसानों को अब रास आ रही है। किसान इस योजना से जुड़कर धान अवशेष खेतों में जलाने की बजाए इसका प्रबंधन करने में लगे हैं। इस बार 60 हजार किसानों ने साढ़े चार लाख एकड़ का पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर करवाया है।
धान अवशेष न जलाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1200 रुपये की राशि सरकार की तरफ से दी जा रही है। अब तक 60 हजार एकड़ में धान कट चुका हैं, लेकिन एक भी किसान ने धान अवशेष नहीं जलाए हैं। पिछले साल 11 लोकेशन सामने आई थी। वहीं 48 हजार किसानों को 50 करोड़ की राशि योजना के तहत दी गई थी। पूरे जिले का एक बार सर्वे हो चुका है, एक भी लोकेशन धान अवशेष की सामने नहीं आई है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0