चित्रकूट में समाजशिल्पी दंपतियों की भर्ती, 1000 गांवों में करेंगे काम

Nov 5, 2026 - 03:44
 0  8
चित्रकूट में समाजशिल्पी दंपतियों की भर्ती, 1000 गांवों में करेंगे काम

भोपाल 

मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सीमा पर चित्रकूट क्षेत्र के 1000 से अधिक गांवों में सामाजिक बदलाव लाने के लिए दीनदयाल शोध संस्थान (DRI) समाजशिल्पी दंपतियों की भर्ती कर रहा है।

चयनित पति-पत्नी को पांच साल तक गांव में रहकर ग्रामीणों के साथ मिलकर गरीबी, बेरोजगारी, बीमारी और अशिक्षा दूर करने के लिए काम करना होगा। गांवों को हरा-भरा, विवादमुक्त और आत्मनिर्भर बनाने की जिम्मेदारी भी इन दंपतियों की होगी।

संस्थान का उद्देश्य गांवों में ऐसा सामाजिक पुनर्रचना मॉडल तैयार करना है, जिसमें ग्रामीण खुद अपनी समस्याओं का समाधान कर सकें। इसके लिए समाजशिल्पी दंपती गांव में रहकर उत्प्रेरक की भूमिका निभाएंगे और ग्रामीणों को सामूहिक प्रयासों के लिए प्रेरित करेंगे।

पांच साल गांव में रहकर करेंगे सामाजिक पुनर्रचना
समाजशिल्पी दंपती ग्रामीणों के सहयोग से गांव में गरीबी, बेरोजगारी, बीमारी और अशिक्षा दूर करने के प्रयास करेंगे। गांव को हरा-भरा और विवादमुक्त बनाने के साथ ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाने पर काम करेंगे। योजना का उद्देश्य गांवों में ऐसे अनुकरणीय परिवार और सामाजिक व्यवस्था तैयार करना है, जो दूसरे गांवों के लिए भी उदाहरण बन सकें।

दीनदयाल शोध संस्थान ने समाजशिल्पी दंपती योजना की शुरुआत चित्रकूट में वर्ष प्रतिपदा 1996 में की थी।

18 नवंबर को चित्रकूट में साक्षात्कार
योजना के लिए साक्षात्कार 18 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे से आरोग्यधाम परिसर, चित्रकूट, सतना (मध्यप्रदेश) में होगा। अभ्यर्थियों को आवेदन और मूल शैक्षणिक अभिलेखों के साथ समय पर उपस्थित होना होगा।

संघ के वरिष्ठ प्रचारक नाना जी देशमुख ने की थी DRI की स्थापना
दीनदयाल शोध संस्थान (DRI) एक ऐसा संस्थान है, जहां पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद को सामाजिक और ग्रामीण विकास के व्यावहारिक मॉडल में बदलने का प्रयास किया गया।

इसकी स्थापना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक, जनसंघ के प्रमुख नेताओं में रहे और बाद में सक्रिय राजनीति छोड़कर सामाजिक कार्यों में जुटे नानाजी देशमुख ने 1968 में की थी। चित्रकूट को उन्होंने अपनी कर्मभूमि बनाया और यहां गांवों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयोग शुरू किया।

तीन स्तर पर है महत्व
संस्थान का महत्व तीन स्तरों पर है- सामाजिक विकास, भाजपा-आरएसएस की वैचारिक परंपरा और ग्रामीण भारत में संगठनात्मक प्रभाव।

 

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0