मानसून से पहले सुखना झील की हुई सफाई, गाद हटने से पर्यटकों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

Jun 29, 2026 - 08:14
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मानसून से पहले सुखना झील की हुई सफाई, गाद हटने से पर्यटकों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

चंडीगढ़.

सुखना झील की जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने यूटी इंजीनियरिंग विभाग ने रेगुलेटरी एंड पर चल रहे डी-सिल्टिंग (गाद हटाने) अभियान के तहत करीब 34 हजार घनमीटर मिट्टी की खुदाई का लक्ष्य पूरा कर लिया है। हालांकि मानसून आने तक यह कार्य जारी रहेगा।

मुख्य अभियंता सीबी ओझा ने बताया कि डी-सिल्टिंग परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। आईआईटी रुड़की, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग की तकनीकी सिफारिशों के आधार पर एक माह पहले झील के सूखे हिस्से में गाद हटाने का कार्य शुरू किया गया था। उन्होंने बताया कि रेगुलेटरी एंड पर लगभग 351 मीटर स्तर तक खुदाई की जा रही है। निकाली गई मिट्टी का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग झील के किनारों (तटबंधों) और पैदल मार्गों को मजबूत एवं ऊंचा करने में किया जा रहा है।

कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए हुआ ये काम
कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए चार चेन-माउंटेड एक्सकेवेटर, जेसीबी मशीनें और टिप्परों का बेड़ा लगाया गया है। विभाग का मानना है कि डी-सिल्टिंग और तटबंधों को मजबूत करने से झील की जलधारण क्षमता बढ़ेगी, पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी और पर्यटकों के लिए भी सुविधाएं बेहतर होंगी। सुखना झील में अंतिम बार डी-सिल्टिंग का कार्य चार वर्ष से अधिक समय पहले किया गया था। गर्मियों में सबसे पहले रेगुलेटरी एंड का हिस्सा सूखता है, जिससे इस क्षेत्र में गाद हटाने का कार्य संभव हो पाता है।

गौरतलब है कि गाद जमने से झील की जल भंडारण क्षमता लगातार प्रभावित हो रही है। इसी चुनौती से निपटने के लिए यूटी प्रशासन ने पिछले वर्ष डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से सुखना झील के समग्र विकास के लिए पांच वर्षीय एकीकृत प्रबंधन योजना (इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान) तैयार की थी। इस योजना में जल स्तर बनाए रखने, जलीय जीवों के संरक्षण, झील की स्वच्छता, पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विस्तार तथा सौर ऊर्जा चालित नौकाओं की संख्या बढ़ाने जैसे प्रावधान शामिल हैं।

करीब 565 एकड़ क्षेत्र में फैली सुखना वेटलैंड का कैचमेंट एरिया लगभग 10,395 एकड़ है। वर्ष 1988 में केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय वेटलैंड घोषित किया था। इसके कैचमेंट क्षेत्र में सुखना वन्यजीव अभयारण्य भी स्थित है। यदि चाहें तो इसे और संक्षिप्त कर फ्रंट पेज या सिटी पेज की अखबारी शैली में भी तैयार किया जा सकता है।

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