राज्योत्सव पर मोहकता एवं वैभव लिए अभिव्यक्त हो रही भारतीय बहुमूल्य हथकरघा परम्परा

Nov 2, 2026 - 18:14
 0  8
राज्योत्सव पर मोहकता एवं वैभव लिए अभिव्यक्त हो रही भारतीय बहुमूल्य हथकरघा परम्परा

रायपुर

भारतीय हथकरघा की बहुमूल्य धरोहर मोहकता एवं वैभव लिए हुए अभिव्यक्त हो रही है। जिसकी एक बानगी राज्योत्सव मैदान नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव में दिखाई दे रही है। अपने हुनर से कारीगरों ने बुने हैं खूबसूरत वस्त्र, जिनके उम्दा रंग संयोजन, गुणवत्ता के नागरिक कायल हो रहे हैं। कपड़ों की बुनाई की निपुणता एवं विविधता देखते ही बन रही है। यहाँ वस्त्रों का स्टॉल जनमानस के आकर्षण का केन्द्र है। राज्योत्सव में इन कारीगरों को अपने हुनर और कौशल के लिए एक बेहतरीन अवसर मिला है। यहाँ असम, मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश एवं अन्य राज्यों से कारीगर अपने बुने वस्त्र लेकर पहुँचे है। 

राज्योत्सव के वस्त्रों के स्टॉल में देश के विभिन्न प्रान्तों की लोकप्रिय साड़ियां बिक्री के लिए उपलब्ध है। जिनमें माहेश्वरी, चंदेरी तो वहीं मूगा कॉटन, काथा वर्क, मूगा सिल्क, मसलिन प्योर कॉटन की खूबसूरत साड़ियां उपलब्ध हैं। मधुबनी प्रिंट से सुसज्जित साड़ियों का सौंदर्य देखते ही बन रहा है। इसके साथ ही बनारसी, पोचमपल्ली, कोसा, प्रिंट सिल्क, बटिक सिल्क, भागलपुरी एवं विविध प्रकार की साड़ियां उपलब्ध हैं। सुंदर वस्त्रों में इंद्रधनुषी छटा बिखरी दिखाई दे रही है। फैबरिक्स में साड़ी, दुपट्टा, स्कार्फ जैसे वस्त्र किफायती कीमतों पर यहाँ बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।

मध्यप्रदेश, खंडवा से आए  तेज बहादुर सिंह ने बताया कि वे प्रतिवर्ष राज्योत्सव आते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आने पर बहुत अच्छा लगता है। उनके उत्पादों को यहाँ अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। उनके स्टॉल में माहेश्वरी, चंदेरी, मधुबनी प्रिंट की साड़ियां उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि शासन हथकरघा कारीगरों को प्रोत्साहित कर रही है। कुछ दिनों पहले वे मार्बल प्रिंट का प्रशिक्षण लेने पांडिचेरी गए थे। मधुबनी प्रिंट सीखने के लिए वे नेपाल गए थे। डोली, शहनाई से सजी धजी मधुबनी, मिथला आर्ट से बनी बेहतरीन साड़ियों का संग्रहण उनके स्टाल में है। वहीं खूबसूरत दुपट्टे भी उपलब्ध हैं।

पश्चिम बंगाल, कलकत्ता, वर्धमान से आए हसीबुल ने बताया कि उनके उत्पादों की अच्छी बिक्री हो रही है। उनके स्टॉल में काथा वर्क, असम का मूगा सिल्क, मूगा कॉटन, लिनन कॉटन की साड़ियां उपलब्ध हैं। बिहार से आए मिथलेश कुमार ने बताया कि उनके यहाँ मधुबनी प्रिंट के साथ ही केला रेशम, कॉटन सिल्क वर्ली प्रिंट, बैम्बू सिल्क की साड़ियां वेरायटी में उपलब्ध हैं। पश्चिम बंगाल, कलकत्ता से आए शादिर अंसारी ने बताया कि यहाँ छत्तीसगढ़ में बहुत अच्छा लग रहा है। यहाँ काथा वर्क, जामदानी, पेंच वर्क, असम सिल्क, डांडिया जैसी साड़ियां उपलब्ध हैं।

बुनकरों के लिए बुनकारी आजीविका का साधन है। कुटीर उद्योग के तौर पर बुनकरों को शासन द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है। परंपरागत कारीगरी के संरक्षण के साथ ही उनके लिए मार्केट उपलब्ध कराने के लिए कार्य किए जा रहे हैं।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0