100 CCTV, 44 गवाह और 106 मोबाइल CDR: 18 दिन की जांच में ऐसे सुलझी साध्वी की मौत की गुत्थी

Feb 21, 2026 - 06:44
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100 CCTV, 44 गवाह और 106 मोबाइल CDR: 18 दिन की जांच में ऐसे सुलझी साध्वी की मौत की गुत्थी

 जोधपुर

राजस्थान की चर्चित युवा साध्वी प्रेम बाईसा का मौत को लेकर सवालों का सैलाब उमड़ पड़ा था. क्या उनकी मौत के पीछे कोई साजिश थी? क्या उन्हें जहर दिया गया? या फिर कोई मेडिकल लापरवाही? 18 दिनों तक चली लंबी और पेचीदा जांच, 44 गवाहों के बयान, 106 लोगों की कॉल डिटेल, 100 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज और 37 से अधिक विसरा नमूनों की पड़ताल के बाद आखिरकार जोधपुर पुलिस ने इस राज से पर्दा उठा दिया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. क्योंकि मौत की वजह भले सामने आ गई हो, इंजेक्शन का सच सामने आना अभी बाकी है.

एक लंबी और चुनौतीपूर्ण तफ्तीश के बाद राजस्थान की मशहूर साध्वी प्रेम बाईसा के मौत के रहस्य से आखिरकार पर्दा हट ही गया. इस मामले में फाइनल ओपिनियन के लिए जोधपुर पुलिस को फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी यानी एफएसएल की रिपोर्ट का इंतजार था. उस रिपोर्ट के बाद पुलिस ने इसे लेकर फिर से मेडिकल एक्सपर्ट्स से चर्चा की और आखिरकार प्रेम बाईसा की मौत के सच का खुलासा कर दिया. 

28 जनवरी को हुई प्रेम बाईसा की मौत के बाद से ही इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म था. प्रेम बाईसा के अनुयायी तो खैर इस मामले में इंसाफ की मांग कर ही रहे थे, खुद प्रेम बाईसा के पिता वीरमनाथ भी बार-बार इस मामले में साजिश की आशंका जताते हुए अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे थे, ऐसे में पुलिस ने पहले डॉक्टरों के बोर्ड से उनके शव का पोस्टमार्टम करवाया और फिर हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए उनके विसरा के नमूनो को स्टेट फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी जयपुर भेजा, जिसकी रिपोर्ट 16वें दिन सामने आ गई और 18वें दिन जोधपुर पुलिस ने इस केस को एक तरह से कनक्लूड कर दिया.

पुलिस की मानें तो साध्वी प्रेम बाईसा के साथ ना तो कोई साजिश हुई, ना उनके साथ मौत से पहले कोई सेक्सुअल ऑफेंस हुआ और ना ही उन्होंने खुदकुशी की, बल्कि उनकी मौत की वजह कार्डिएक और पल्मॉनरी अरेस्ट बनी. कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट से मौत बोले तो दिल की धड़कनों का और सांस लेने की क्रिया रुकने के चलते हुई मौत. पुलिस ने साफ किया कि उन्हें पहले से फेफड़े से संबंधित बीमारी थी, ऐसे में कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट जानलेवा बन गई. 

वैसे तो इस मामले में कई पेच थे, लेकिन सबसे बड़ा पेच साध्वी को मौत से ऐन पहले लगाए गए इंजेक्शन का ही था. क्योंकि सामने आई खबरों के मुताबिक इंजेक्शन लगाए जाने के बाद ही उनकी तबीयत एकाएक बिगड़ी और जब तक उनके पिता और आश्रम के लोग उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक उनकी जान चली गई. ऐसे में इंजेक्शन में दी गई दवाओं की जांच के साथ-साथ पुलिस के लिए उस कंपाउंडर की भूमिका की पड़ताल भी जरूरी थी. पुलिस ने इस दिशा में जांच की भी और शुरुआती तफ्तीश में उसे कंपाउंडर की लापरवाही का पता चला.

आपको याद होगा कि 28 जनवरी को साध्वी की तबीयत बिगड़ने पर जोधपुर के एक कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित को आश्रम की ओर से साध्वी के इलाज के लिए बुलाया गया था और तब देवी सिंह दो दवाओं के साथ साध्वी के पास पहुंचा था. साध्वी को ये दवाएं पहले भी दी जाती रही हैं. इन दवाओं में डेक्सोना और डायनापार शामिल हैं, लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि से शेड्यूल एच की दवाएं हैं, जिन्हें बिना किसी मेडिकल प्रैक्टिशनर यानी डॉक्टर की इजाजत या देख-रेख के बगैर दिए जाने की मनाही है. इसके बावजूद देवी सिंह राजपुरोहित ने ना सिर्फ साध्वी को इन दो दवाओं का इंजेक्शन दिया, बल्कि वो बगैर किसी प्रैस्क्रिप्शन यानी डॉक्टर की पर्ची के खुद ही ये दवाएं लेकर साध्वी के पास पहुंचा था, जो की एक गैरकानूनी हरकत है.

जोधपुर पुलिस ने साफ किया कि कंपाउंडर की लापरवाही को लेकर पुलिस ने नए सिरे से मेडिकल बोर्ड से उनकी राय मांगी है, ताकि ये साफ हो सके कि क्या कपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित की ओर से दिया गया इंजेक्शन ही उनकी मौत की वजह बनी या नहीं? पुलिस ने कहा कि इस मामले में मेडिकल बोर्ड की राय आने के बाद ही देवी सिंह राजपुरोहित के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी.

साध्वी को 28 जनवरी को 2 इंजेक्शन लगाए गए थे. डायनापार और डेक्सोना. डायनापार यानी डाइक्लोफिनैक और डेक्सोना यानी डेक्सामेथासोन. तेज दर्द, सूजन, चोट और सर्जरी के बाद होने वाले दर्द से निजात दिलाने वाली ये दवाएं आम तौर पर एक साथ दी जाती हैं. लेकिन इसकी शर्त है कि इन्हें डॉक्टर की निगरानी में ही दिया जाना जरूरी है. क्योंकि इन्हें दी जाने में बरती गई मामूली लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि कभी-कभार एक ही सीरींज से डाइक्लोफिनैक और डेक्सामेथासोन का इंजेक्शन मरीज के लिए खतरनाक कार्डियोवैस्कुलर इवेंट यानी हार्टफेल की वजह बन जाती है. कई बार इन दवाओं से पेट से संबंधी समस्याएं, सिर चकराने, सिर दर्द या इनफेक्शन यानी संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. यही वजह है कि ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की निगरानी में ही दी जाने की बात कही जाती है.

लेकिन साध्वी प्रेम बाईसा के मामले में डॉक्टर की निगरानी वाली बात की अनदेखी की गई. अब सवाल यही है कि क्या साध्वी के शरीर में इन दो दवाओं का रिएक्शन हो गया, जिसके चलती उनकी जान चली गई? पुलिस फिलहाल ये पता लगाने में जुटी है. फिलहाल इंजेक्शन लगाने वाला कपाउंडर बेशक डॉक्टर की पर्ची के मुताबिक ही इंजेक्शन लगाने की बात कह रहा है, लेकिन ये भी सच है कि वो पर्ची पुरानी थी. साध्वी ने 28 जनवरी को किसी डॉक्टर से कोई सलाह नहीं ली थी. अजमेर से प्रोग्राम कर लौटने के बाद जब साध्वी की तबीयत बिगड़ी, तो उन्होंने अपने पिता से ट्रिटमेंट करवा देने की बात कही थी. हालांकि अस्पताल जाने के पिता की पेशकश को उन्होंने ठुकरा दिया था.

एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट के सामने आने के बाद साध्वी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बनी असमंजस की स्थिति भी काफी हद तक साफ हो गई है. क्योंकि इन रिपोर्ट में बताया गया है कि साध्वी के शरीर में ना तो अंदरुनी या बाहरी चोट के निशान थे और ना ही उनके शरीर में कोई ज़हरीली चीज ही पाई गई. यानी उनकी मौत की वजह कुदरती थी. ये और बात है कि कुदरती वजह उन्हें इंजेक्शन में दी गई दवाओं की वजह से बनी या नहीं, इसकी अलग से जांच चल रही है. चूंकि ये मामला एक जानी-मानी युवा साध्वी की रहस्यमयी मौत से जुड़ा था, इसे लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे थे. ऐसे में जोधपुर पुलिस की ओर से बनाई गई एसआईटी ने हर उस पहलू को खंगालने की कोशिश की, जिसका कनेक्शन उनकी मौत के मामले से जुड़ता था.


मसलन पुलिस ने 28 जनवरी की पूरी टाइमलाइन को रीविजिट करने की कोशिश की, जब उनकी तबीयत बिगड़ने से लेकर, उन्हें इंजेक्शन लगाया गया और फिर बाद में तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें जोधपुर के ही प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया. इसके अलावा पुलिस ने प्रेम बाईसा की मेडिकल हिस्ट्री की भी अलग से एनालिसिस की. पुलिस ने ये पता लगाया कि वो कब से बीमार थी? तबीयत बिगड़ने पर वो कौन-कौन सी दवाएं लेती थीं? उनको लगाए गए इंजेक्शन के मद्देनजर पुलिस ने ड्रग कंट्रोलर से लेकर सीएमएचओ, राजस्थान नर्सिंग काउंसिल समेत कई इकाइयों से बात की. यहां तक कि पुलिस ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से लेकर प्राइवेट अस्पताल तक की अलग से जांच की. यानी हर उस एंगल को एक्सप्लोर करने की कोशिश की, जहां से उनकी मौत में साजिश का कोई भी एंगल जुड़ सकता था. इसके अलावा उनके गांव से लेकर जोधपुर के आश्रम तक उनकी किन-किन से दोस्ती और दुश्मनी थी, पुलिस ने सब चेक किया.

वैसे तो इस मामले के उलझने की कई वजहें थीं, लेकिन इन वजहों में एक वजह इनकनक्लूसिव पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी थी. यानी एक ऐसी रिपोर्ट जिसने मौत की वजह से पर्दा हटाने की जगह उसे लेकर और ज्यादा संशय पैदा कर दिया था, यही वजह है कि पुलिस को इस केस का आखिरी सच जाने के लिए एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट की जरूरत पड़ी. 

सूत्रों की मानें तो साध्वी के शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने बताया था कि मौत से पहले उनकी आंतें और पेट के कई अंदरुनी अंग सिकुड़ गए थे. अब सवाल था कि ऐसा किस सूरत में हो सकता है? तो फॉरेंसिक मेडिसीन के एक्सपर्ट्स से इसका जवाब पूछा गया. एक्सपर्ट की माने तो कि ऐसा आम तौर पर किसी बीमारी की सूरत में ही मुमकिन है. जाहिर है साध्वी भी बीमार थीं, लेकिन क्या वो बीमारी इतनी खतरनाक स्टेज पर थी कि उससे उनके अंदरुनी अंग सिकुड़ गए? या फिर रही-सही कसर इंजेक्शन के हेवी डोज ने पूरी कर दी? पुलिस ने मौत की वजह का तो पता लगा लिया है, लेकिन उसे इंजेक्शन के एफेक्ट का सच अब भी जानना बाकी है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही शरीर के कुछ अंदरुनी अंगों के लाल पाए जाने की बात भी सामने आई थी. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऐसा इनफेक्शन के साथ-साथ प्वाइजनिंग के मामलों में भी हो सकता है. कई जहरीले पदार्थ ऐसे होते हैं, जो पेट में ऐसा असर दिखाते हैं. ऐसे में पुलिस को उनके शरीर में जहर होने या ना होने का सच जानना था, जो विसरा रिपोर्ट के सामने आने के बाद साफ हो गया. जहर की बात नहीं मिली. पोस्टमार्टम में डॉक्टरों ने पाया था कि साध्वी के हाथ और पांव के नाखुन उनकी मौत के दौरान बिल्कुल नीले पड़ गए थे. कई लोग इसे प्वाइजनिंग की निशानी बता रहे थे. लेकिन फॉरेंसिक मेडिसीन और टॉक्सिकोलॉजी के एक्सपर्ट की माने तो शरीर में ऑक्सीजन की कमी से कई बार ऐसा होता है. इसीलिए अक्सर ये देखा गया है कि हैंगिंग या ड्राउनिंग के केसेज़ में जब किसी की जान जाती है, तो उसके शरीर में भी नाखून नीले पड़ जाते हैं. अब हिस्टोपैथोलॉजिकल एग्जामिनेशन यानी विसरा रिपोर्ट के सामने आने के बाद ये साफ हो गया है कि बीमारी की हालत में उनकी सांस रुक गई, जिसके चलते उनके नाखुनों का रंग बदला था.

ये तो रही साध्वी को जहर दिए जाने या फिर उनके खिलाफ किसी साजिश की आशंका के मद्देनजर की गई पुलिस की जांच का सच, लेकिन जिस एक मामले ने साध्वी की मौत के केस को सबसे ज्यादा उलझा दिया था, वो था उनकी मौत के बाद उनके इंस्टा हैंडल से पोस्ट किया गया उनका कथित सुसाइड नोट। तो पुलिस ने इस मामले की भी पड़ताल की और इसका सच ढूंढ निकाला.

छानबीन में सामने आया था कि 28 जनवरी को साध्वी की मौत के बाद खुद उनके पिता वीरमनाथ ने उनके मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर उनके इंस्टा हैंडल से साध्वी के नाम से एक सुसाइड नोट पोस्ट किया था और इस पोस्ट उन्होंने अपने ड्राइवर भोमाराम से लिखवाया था. इस पोस्ट में साध्वी के हवाले से लिखा गया था, 'मैंने हर एक क्षण सनातन प्रचार के लिए जीया. दुनिया में सनातन धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है. आज अंतिम श्वास तक मेरे दिल में सनातन ही है. मेरा सौभाग्य है कि मैंने सनातन धर्म में जन्म लिया और अंतिम श्वास भी सनातन के लिए ली, मेरे जीवन में आदि जगतगुरु शंकराचार्य भगवान, विश्व योग गुरुओं व पूज्य संत महात्माओं का हर पल आशीर्वाद रहा. मैंने आदि गुरु शंकराचार्य और देश के कई महान संत महात्माओं को लिखित पत्र लिखा. अग्निपरीक्षा के लिए निवेदन किया लेकिन प्रकृति को क्या मंजूर था? मैं इस दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा लेकिन ईश्वर और पूज्य संत महात्माओं पर पूर्ण भरोसा है. मेरे जीते जी नहीं तो जाने के बाद तो न्याय मिलेगा.' 

जाहिर है, इस सुसाइड नोट में वो अपनी मौत की बात भी लिखती हुई दिख रही थी और साथ ही अग्निपरीक्षा देने की पेशकश करने का भी जिक्र कर रही थी, ये पेशकश. जो वो पहले भी वायरल वीडियो के सामने आने के बाद कर चुकी थी. यानी उनकी मौत का कनेक्शन उस वायरल वीडियो से भी जुड़ता है, जिसने उनकी और उनके पिता और गुरु की जिंदगी में भूचाल ला दिया था. ऐसे में पुलिस को सुसाइड नोट और वीडियो वाले मामले की भी जांच करनी थी. पुलिस ने इस मामले की जांच की और ये साफ हुआ कि साध्वी के पिता वीरमनाथ ने बेटी की मौत के बाद जज्बात में आकर उनकी इंस्टा आईडी से वो नोट पोस्ट करवाया था, इसके पीछे कोई साजिश जैसी बात नहीं थी.

अब ये भी जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर वायरल वीडियो का वो मामला क्या था? 13 जुलाई 2025 यही वो तारीख थी, जब साध्वी प्रेम बाईसा का एक प्राइवेट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इस वीडियो को लेकर तरह-तरह के सवाल उठाए जाने लगे. ये वीडियो जोधपुर के उसी कुटीर आश्रम का बताया जाता है, जहां साध्वी प्रेम बाईसा की रिहायश थी. वीडियो की तारीख के मुताबिक ये तस्वीरें 8 जनवरी 2021 की रात दस बज कर 22 मिनट की हैं. वीडियो में साध्वी एक कमरे में बिस्तर पर लेटी नजर आ रही हैं, जबकि कमरे में आती-जाती एक महिला उनसे बातचीत कर रही है. इसी बीच भगवा वस्त्र पहने,सिर पर पगड़ी लगाए एक शख़्स सीधे साध्वी के कमरे में पहुंचता है और साध्वी के गालों को छू कर उन्हें पुचकारने लगता है. इसके बाद साध्वी बिस्तर से उठती है और उस आदमी के गले लग जाती हैं. वो शख्स भी साध्वी को आलिंगन करते हुए थोड़ी देर के लिए उन्हें गोद में उठा लेता है.

बस, इसी वीडियो के बहाने सोशल मीडिया पर लोग साध्वी और उनके साथ नजर आ रहे शख्स को जज करने लगते हैं और उनके आचरण पर सवाल उठाए जाने लगते हैं. लेकिन पिता के साथ साध्वी की इन निजी तस्वीरों ने साध्वी और उनके गुरु के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए थे, ये और बात है कि तब साध्वी ने इस वीडियो के लीक होने पर ना सिर्फ आश्रम के ही कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी, बल्कि इसे लेकर अपनी सफाई भी दी थी. साध्वी ने तब बताया था कि ये तस्वीरें तब की हैं, जब वो गहरे अवसाद में थीं और उनके पिता उनसे गले लग कर उन्हें ढांढस बंधा 

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