गुरु साहिब जी के संदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक: CM सैनी ने किया 350 वर्षों की परंपरा का सम्मान

Nov 25, 2025 - 11:44
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गुरु साहिब जी के संदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक: CM सैनी ने किया 350 वर्षों की परंपरा का सम्मान

चंडीगढ़ 
हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा में ही, सिख समुदाय के पहले बादशाह बाबा बंदा सिंह बहादुर की राजधानी लोहगढ़ (यमुनानगर) में मार्शल आर्ट इंस्टीट्यूट, श्री गुरु तेग बहादुर मेडिकल कॉलेज, यमुनानगर बनाया जा रहा है। श्री गुरु नानक देव जी के गुरुद्वारा चिल्ला साहिब (सिरसा) की 72 कनाल भूमि बिना कोई कीमत लिए निशुल्क दी गई। सारे प्रदेश में, अन्य स्थानों पर भी स्मारक द्वार, कालेज एवं संस्थानों का नामकरण गुरु साहिबानों के नाम पर किया गया है।
 
वर्तमान हरियाणा प्रांत के लोगों का, श्री गुरु तेग बहादुर जी के साथ घनिष्ठ प्यार था। यहां लगभग उनकी याद में, 28 गुरुद्वारा साहिबान हैं तथा उनका ससुराल गांव लखनौर साहिब (अम्बाला) में है। श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वां शहीदी दिवस पर श्रद्धा सुमन भेंट करने के लिए, देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी 25 नवंबर, 2025 दिन मंगलवार को करुक्षेत्र आ रहे हैं। पूरे प्रदेश में चार शोभा यात्राओं में गुरु ग्रंथ साहिब जी की अगुवाई में लाखों की संख्या में संगत कुरुक्षेत्र पहुंची है। यहां सभी धर्मों के लोग एवं संस्थाएं गुरू जी को श्रद्धा सुमन भेंट कर रही हैं।
 
उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की अगुवाई में सारे विश्व में, लगभग 142 विदेशी दूतावास हैं, वहां के स्थानीय लोगों के सहयोग से, गुरु जी की शहादत को नमन किया जा रहा है। कुरुक्षेत्र की पवित्र धरती पर आठ गुरु साहिबान, श्री गुरु नानक देव जी, श्री गुरु अमरदास जी, श्री गुरु अर्जुन देव जी, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी, श्री गुरु हरिराय जी, श्री गुरु हरिकृष्ण जी, श्री गुरु तेग बहादुर जी तथा श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने समय-समय पर इस धरती पर अपने चरण डालकर पवित्र किया। श्री गुरु तेग बहादुर जी का समस्त जीवन, परोपकार, त्याग, संघर्ष तथा बलिदान पूरी मानवता के लिए प्रेरणादायक है। अगर गुरु जी अपने शीश का बलिदान देकर, शहादत ना देते तो, आज हिंदुस्तान कैसा होता, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
 
हरियाणा सरकार द्वारा पहली नवम्बर से 25 नवम्बर, 2025 तक हरियाणा में गुरु साहिब जी की स्मृति में अनेक आयोजन किए हैं जोकि जन-सहभागिता और आध्यात्मिक एकता की अनोखी मिसाल बने हैं। राज्यभर में चारों दिशाओं से निकली श्रद्धा यात्राएं एक अनोखा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्सव बन गईं हैं। राज्य में 8 नवंबर, को रोड़ी (सिरसा), 11 नवंबर को पिंजौर (पंचकूला), 14 नवंबर को फरीदाबाद तथा 18 नवंबर को कपाल मोचन (यमुनानगर) में आयोजित यात्राओं ने हरियाणा को सचमुच एक आध्यात्मिक और भाईचारे की एकजुटता के धागे में पिरोदिया है। प्रदेश के गांव-गांव में कीर्तन, भजन, सत्संग और गुरु साहिब जी की वाणी का पाठ किया गया।
 
सीएम ने कि  बताया गुरु तेग बहादुर जी की स्मृति में प्रदेश सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। सिरसा स्थित चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में गुरु तेग बहादुर चेयर' की स्थापना की। अंबाला के पॉलिटेक्निक कॉलेज का नाम बदलकर गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर रखने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है। करनाल में एक भव्य मैराथन तथा टोहाना-जींद-नरवाना मार्ग को 'गुरु तेग बहादुर मार्ग" नाम देने की प्रक्रिया प्रारम्भ हो चुकी है। कलेसर क्षेत्र में 'गुरु तेग बहादुर वन" विकसित किया जा रहा है। यमुनानगर के किशनपुर में 'जी.टी.बी. कृषि महाविद्यालय की स्थापना भी प्रस्तावित है। इन सभी पहलों का उद्देश्य गुरु तेग बहादुर जी के त्याग, बलिदान और मानवता के अद्वितीय संदेश को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
 
गुरु साहिब जी के संदेश आज भी हमारे दिलों में उतने ही जीवन्त और प्रभावशाली हैं, जितने 350 वर्ष पहले थे। उनकी अमर वाणी और उनका अद्वित्तीय बलिदान हमें तथा आने वाली पीढ़ियों को सदा प्रेरित करता रहेगा। गुरु जी की शहादत संबंधी, गुरु परंपरा के समकालीन कवि 'सेनापति" ने उपयुक्त और अति सुंदर कहा है- प्रगट भयो गुरु तेग बहादर, सकल सृष्ट पै ढापी चादर'

 

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