हरियाणा 550 करोड़ घोटाल,दो IAS अधिकारी सस्पेंड

Apr 10, 2026 - 15:44
 0  7
हरियाणा 550 करोड़ घोटाल,दो IAS अधिकारी सस्पेंड

चंडीगढ़

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हरियाणा सरकार के खातों से 550 करोड़ रुपये के गबन के आरोपी दो आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। इस मामले में आईएएस अधइकारी राम कुमार सिंह और प्रदीप कुमार आरोपी हैं। सिंह 2012 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक उनके पास 3.22 करोड़ रुपये की संपत्तियां हैं। इससे उन्हें 19 लाख रुपये की सालाना कमाई होती है। वहीं प्रदीप कुमार के पास पत्नी की संपत्ति के साथ कुल 7.03 करोड़ की संपत्ति है।

कई जगहों पर संपत्तियां
सिंह के 29 जनवरी 2026 को फाइल किए गए एनुअल प्रॉपर्टी रिटर्न के मुताबिक उन्होंने कुल 3.22 करोड़ की संपत्ति की बात बताई थी जो कि पट्टनी अफगान, गोहना और सोनीपत में है। यहां उनका एक 710 व्ग गज का प्लॉट है जिसकी कीमत 58 लाख रुपये, एक 77 लाख की कीमत वाला प्लॉट है। इसकेअलावा एक प्लॉट की कीमत 12 लाख रुपये है। गोहाना में भी 60 लाख की कीमत का प्लॉट है। इसके अलावा 6 रिहाइशी संपत्तियां हैं।

सिंह का कहना है कि उनकी पत्नी कई बिजनेस करती हैं। उनके पास पेट्रोल पंप, माइक्रोब्रीवरी, रेस्तरां, किराए पर घर देने, प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने का काम भी है। उन्होंने बताया था कि उनका पैतृक घऱ हिंदू अनडिवाइडेट फैमिली के तहत सबका की है।

आईएएस प्रदीप कुमार ने एपीआर में बताया था कि उनकी पत्नी के पास 3181.5 वर्ग गज की जमीन है। इसकी कीमत 1.25 करोड़ के करीब है। उन्होंने बताया कि यह जमीन पत्नी को उनके पिता ने उपहार में दी थी। उन्होंने बताया था कि गुरुग्राम सेक्टर 28 में उनके दो फ्लैट हैं जिन की कीमत 2.4 करोड़ के आसपास है। इसके अलावा गुरुग्राम में एक और फ्लैट है जो कि उनकी पत्नी के साथ उनके नाम पर है। इसकी कीमत 3.34 करोड़ रुपये है।

हरियाणा सरकार को बड़ा नुकसान
हरियाणा के सतर्कता विभाग ने इस मामले को संबंधित एजेंसी को सौंपते हुए कहा, ''यह मामला धोखाधड़ीपूर्ण बैंकिंग गतिविधियों और फर्जी लेनदेन से जुड़ा है, जिन्हें कथित तौर पर सरकारी धन को स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट, एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड, कैप को फिनटेक सर्विसेज, आर.एस. ट्रेडर्स और अन्य संबंधित फर्म/व्यक्तियों सहित फर्जी संस्थाओं (शेल) के खातों में अंतरित करने के लिए व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया गया था, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।'

सूत्रों ने बताया कि पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आरोपों के अनुसार, हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा राज्य के कोष को बैंक में 'सावधि जमा' (एसएफडी) के रूप में जमा किया जाना था, लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर इसे अपने निजी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर लिया। सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि विभिन्न फर्जी (शेल) कंपनियों और छोटी आभूषण कंपनियों में भारी मात्रा में धनराशि अंतरित की गई है तथा अंततः सोने की खरीद और रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश के बहाने उसे निकाल लिया गया है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा था कि उसने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को मूलधन और ब्याज का 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया है, जो कि 583 करोड़ रुपये बनता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0