मार्गशीर्ष मास की मासिक दुर्गा अष्टमी 2025: उज्जैन के आचार्य से जानें सही तिथि और व्रत का महत्व

Nov 25, 2025 - 11:14
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मार्गशीर्ष मास की मासिक दुर्गा अष्टमी 2025: उज्जैन के आचार्य से जानें सही तिथि और व्रत का महत्व

सनातन धर्म में हर पर्व हर त्योहार का अपना अलग ही महत्व होता है. साल के प्रत्येक महीने में मां आदि शक्ति दुर्गा की उपासना का भी विधान है. हिंदू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गा अष्टमी तिथि के नाम से जाना जाता है. इस दिन माता दुर्गा की विधि-विधान से पूजा आराधना की जाती है. इस दौरान माता दुर्गा पृथ्वी पर निवास करती हैं. अपने भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करती हैं. आइए जानते है उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से अगहन माह यानी मार्गशीर्ष माह की दुर्गा अष्टमी की तिथि क्या है, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.

मासिक दुर्गा अष्टमी शुभ मुहूर्त 
वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी तिथि 28 नवंबर को देर रात 12:29 बजे शुरू होगी और तिथि का समापन 29 नवंबर को देर रात 12:15 बजे होगा. मां दुर्गा की पूजा निशिता काल में की जाती है. इस तहर 28 नवंबर को अगहन माह की दुर्गा अष्टमी पूजा की जाएगी.

शुभ योग्य मे की जाएगी आरधना 
इस बार मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी तिथि पर कई शुभ योग का निर्माण हो रहा है. हर्षण योग 11:06 मिनट से बन जाएगा. इस दिन शतभिषा नक्षत्र होगा और बव करण होगा. इन संयोगों में देवी दुर्गा की पूजा अर्चना करना सभी मनोकामनाओं की पूर्ति का कारक बन सकता है. मां दुर्गा की कृपा से साधक के सभी बिगड़े काम पड़ सकते हैं.

जानिए मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत का महत्व
मासिक दुर्गाष्टमी के दिन व्रत रखने का विशेष महत्व होता है. इस दिन भक्त एक समय भोजन करते हैं या फिर फलाहार करते हैं. व्रत रखने से मन एकाग्र होता है और देवी दुर्गा की भक्ति में मन लगता है. पूरे विधि विधान से व्रत पूरा करने पर लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान होता है. इसके अलावा घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है.इसलिए यह व्रत रखा जाता है.

ऐसे करें मां दुर्गा कि पूजा
मासिक दुर्गा अष्टमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए. इसके बाद गंगाजल डालकर माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए. माता दुर्गा का गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए. इसके साथ ही माता दुर्गा के सामने दीप प्रज्वलित करना चाहिए. उसके बाद अक्षत सिंदूर और लाल पुष्प अर्पित करना चाहिए. भोग के रूप में मिठाई चढ़ाना चाहिए. धूप,दीप, अगरबत्ती जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए. ऐसा करने से माता दुर्गा जल्द प्रसन्न होती है और अपने भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करती है.

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