‘संत’: नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित वैश्विक आध्यात्मिक वेब-सीरीज़ का साहसिक ऐलान

Dec 31, 2025 - 18:33
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‘संत’: नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित वैश्विक आध्यात्मिक वेब-सीरीज़ का साहसिक ऐलान

भारतीय वेब कंटेंट के दौर में जहां अधिकतर ओटीटी प्लेटफॉर्म अपराध, थ्रिलर और राजनीतिक ड्रामे पर टिके हुए हैं, वहीं अलमाइटी मोशन पिक्चर द्वारा घोषित 7-भागीय मल्टीलिंगुअल वेब सीरीज़ ‘संत’ एक अलग ही दिशा की ओर संकेत करती है। यह सीरीज़ भारत के महान संत नीम करोली बाबा के जीवन, दर्शन और उनके वैश्विक प्रभाव पर आधारित है।
नीम करोली बाबा केवल भारतीय श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रहे। स्टीव जॉब्स, मार्क ज़करबर्ग और जूलिया रॉबर्ट्स जैसी अंतरराष्ट्रीय हस्तियों का उनसे प्रभावित होना इस तथ्य को रेखांकित करता है कि भारतीय अध्यात्म की पहुंच सीमाओं से परे है। ऐसे संत के जीवन को आधुनिक सिनेमा की भाषा में प्रस्तुत करना अपने आप में एक बड़ा और जिम्मेदारी भरा प्रयास है।
विषय चयन मजबूत, चुनौती भी उतनी ही बड़ी
‘संत’ का विषय इसकी सबसे बड़ी ताकत है। प्रेम, सेवा, करुणा और भक्ति जैसे मूल मूल्यों पर आधारित यह सीरीज़ केवल एक बायोपिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक यात्रा के रूप में सामने आने का दावा करती है। हालांकि, आस्था से जुड़े विषयों पर प्रस्तुति में जरा-सी चूक भी विवाद का कारण बन सकती है। ऐसे में यह सीरीज़ निर्माताओं की संवेदनशीलता और शोध की गहराई की असली परीक्षा होगी।
20 भाषाओं में निर्माण: भारतीय अध्यात्म का वैश्विक मंच
सीरीज़ को 20 भाषाओं में तैयार किए जाने की घोषणा इसे भारतीय प्रोडक्शन हाउस की अब तक की सबसे व्यापक आध्यात्मिक परियोजनाओं में शामिल करती है। लाइव-एक्शन शूट, हाई-एंड वीएफएक्स और एआई-सहायता से दृश्य पुनर्निर्माण जैसी तकनीकों का उपयोग यह संकेत देता है कि ‘संत’ को तकनीकी रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की तैयारी है।
अंतरराष्ट्रीय तकनीक, भारतीय संस्कार
यूके के तकनीकी विशेषज्ञों और भारत की अनुभवी क्रिएटिव टीम का सहयोग इस प्रोजेक्ट को तकनीकी मजबूती प्रदान करता है। निर्माताओं का यह दावा कि सीरीज़ वैश्विक ओटीटी मानकों पर खरी उतरेगी, लेकिन उसकी आत्मा भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ी रहेगी—इसे साधारण वेब सीरीज़ से अलग खड़ा करता है।
निर्माता की निजी आस्था से बढ़ती विश्वसनीयता
निर्माता प्रभलीन संधू का नीम करोली बाबा से निजी आध्यात्मिक जुड़ाव इस परियोजना को भावनात्मक और नैतिक आधार देता है। उनका पिछला काम—भय: द गौरव तिवारी मिस्ट्री और मेड इन इंडिया – ए टाइटन स्टोरी—यह दर्शाता है कि वे शोध आधारित और संवेदनशील विषयों को संभालने का अनुभव रखती हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, ‘संत’ भारतीय अध्यात्म को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने का एक गंभीर और महत्वाकांक्षी प्रयास है। यदि निर्माता अपने दावों के अनुरूप प्रामाणिकता, संतुलन और तकनीकी गुणवत्ता बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो यह सीरीज़ न केवल ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एक नई पहचान बना सकती है, बल्कि भारतीय संत परंपरा को अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में सम्मानजनक स्थान भी दिला सकती है।
अब सबकी निगाहें इसके कलाकार चयन, ओटीटी प्लेटफॉर्म और अंतिम प्रस्तुति पर टिकी हैं।

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