पंचकूला स्कूल मारपीट मामला: 8 वर्षीय छात्र को सशर्त जमानत, माता-पिता को सौंपा
पंचकूला
सेक्टर-20 के सरकारी स्कूल में छह साल की बच्ची के साथ मारपीट व ईंट से हमला करने वाले आठ वर्षीय छात्र को बुधवार को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) के समक्ष पेश किया गया।
बोर्ड ने बच्चे को सशर्त जमानत देते हुए उसे माता-पिता के साथ घर भेज दिया। बच्चा 31 अक्टूबर से जुवेनाइल आब्जर्वेशन होम अंबाला में था। वहीं, पीड़ित बच्ची को भी बुधवार को ही पीजीआई चंडीगढ़ से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
बच्ची को अस्पताल से गुब्बारों के साथ अस्पताल की एंबुलेंस से घर के लिए रवाना किया गया। बच्चे के चेहरे पर मुस्कान थी और वह हंसते हुए अस्पताल से अपने चाचा के घर पीरमुच्छला पहुंची।
जहां उसका लोगों ने फूल-माला के साथ स्वागत किया। बच्ची के स्वागत के लिए घर को फूलों से सजाया गया था। इस दौरान बच्ची के स्कूल के शिक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
दूसरी तरफ, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में बच्चे के मैपिंग टेस्ट की रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में बच्चे को एब्नार्मल बताया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बच्चे को इलाज की सख्त जरूरत है।
इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने सशर्त जमानत देते हुए बच्चे को माता-पिता को सौंप दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी। साथ ही बोर्ड ने इस केस में स्पेशल सरकारी वकील को भी नियुक्त किया है।
इन शर्तों का करना होगा पालन
बच्चे को मोबाइल फोन न दिया जाए।
बच्चे की मानसिक स्थिति को देखते हुए उसका जीएमसीएच-32 से इलाज करवाया जाए।
बच्चे की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए, बेशक उसके किसी दूसरे स्कूल में दाखिला दिलाया जाए।
बच्चे को अकेला न छोड़ें और उसके साथ परिवार के सदस्यों को अधिक से अधिक समय बिताना होगा।
बच्चे की मोबाइल फोन की आदत छुड़वाने के लिए उसे खेल गतिविधियों व पढ़ाई की तरफ उसका ध्यान लाना होगा।
बच्चे को ऐसे माहौल में नहीं रखना होगा जिससे उसकी आदतें खराब हों।
माता-पिता ने बोर्ड को दिया आश्वासन
बच्चे की बेल अर्जी में माता-पिता ने जेजे बोर्ड को आश्वासन दिया है कि वे बच्चे को उचित पारिवारिक माहौल, नैतिक शिक्षा और अनुशासन में रखेंगे। उसकी काउंसलिंग, व्यवहार संबंधी मार्गदर्शन और पुनर्वास की व्यवस्था भी करेंगे।
यह दलील भी दी गई है कि बच्चा तीसरी कक्षा में पढ़ता है ऐसे में अगर उसे आब्जर्वेशन होम में रखा जाएगा तो उसकी पढ़ाई और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता।
इंटरनेट मीडिया से वीडियो व फोटो हटवाने की मांग
वहीं, परिवार की तरफ से बोर्ड में दायर दूसरी अर्जी में उन्होंने कहा कि मामले के जांच अधिकारी को निर्देश दिए जाएं कि इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहे घटना से जुड़ी वीडियो और फोटो हटवाया जाए।
साथ ही स्कूल के प्रिंसिपल और प्रबंधन के साथ समन्वय कर वीडियो व फोटो का आगे प्रसार रोकने की अपील की गई है। पिता ने बच्चे को स्कूल और समाज में अपमान और भेदभाव से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।
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