अल-फलाह चेयरमैन जवाद पर गंभीर आरोप: मृतकों की करोड़ों की जमीन बेचे जाने की बात सामने आई

Nov 28, 2025 - 13:44
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अल-फलाह चेयरमैन जवाद पर गंभीर आरोप: मृतकों की करोड़ों की जमीन बेचे जाने की बात सामने आई

 नई दिल्ली

राष्ट्रीय राजधानी में जमीन घोटाले का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. अल-फलाह ग्रुप के फाउंडर जवाद अहमद सिद्दीकी पर करोड़ों की जमीन को फर्जी कागज़ात के ज़रिए हथियाने का नया आरोप लगा है.  जवाद पहले ही दिल्ली ब्लास्ट और मनी लॉन्ड्रिंग मामले के मामले में ED की हिरासत में हैं.

अल-फलाह केस की जांच में यह बात सामने निकलकर आई है कि दिल्ली के मदनपुर खादर में खसरा नंबर 792 में कीमती ज़मीन को जवाद अहमद सिद्दीकी से जुड़े तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन ने एक नकली जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के ज़रिए धोखे से हासिल की थी. जवाद को ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के चार्ज में अरेस्ट किया है और वह दिल्ली ब्लास्ट केस में भी जांच के घेरे में है.

अधिकारियों के मुताबिक, यह जमीन साउथ दिल्ली में एक खास जगह पर फैली हुई है. जिन लोगों के नाम पर इस GPA में हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लगाए गए हैं वह सालों नहीं बल्कि दशकों पहले मर चुके थे.

क्या मरे हुए लोग 2004 में साइन कर रहे थे?

यह नकली जीपीए 7 जनवरी 2004 का है और इसमें कई को-ओनर्स के अधिकार विनोद कुमार/ पुत्र- भूले राम के पक्ष में ट्रांसफर करने का दावा किया गया है. हैरानी की बात यह है कि इस GPA पर दिखने वाले सिग्नेचर और अंगूठे के निशान ऐसे लोगों के हैं जिनकी मौत बताई गई तारीख से बहुत पहले हो गई थी.

2004 का ‘डेड मैन साइनिंग’ घोटाला

7 जनवरी 2004 को तैयार इस फर्जी GPA में कई ऐसे नाम शामिल हैं जिनकी मृत्यु 1972 से 1998 के बीच हो चुकी थी-

    नाथू (मृत्यु: 1972), मदनपुर खादर
    हरबंस सिंह (मृत्यु: 1991), तेहखंड
    हरकेश (मृत्यु: 1993), तुगलकाबाद
    शिव दयाल (मृत्यु: 1998), छुरिया मोहल्ला, तुगलकाबाद
    जय राम (मृत्यु: 1998), तुगलकाबाद

इसके बावजूद इन सभी मृतकों को 2004 में “जमीन बेचने वाले” के तौर पर दिखाया गया. एक अधिकारी ने इसे “पूरी तरह फर्जी और अवैध दस्तावेज़” बताते हुए कहा कि मृत व्यक्ति कभी GPA जारी नहीं कर सकता.

फर्जी GPA के दम पर 2013 में बिक्री

इस फर्जी GPA के आधार पर, 27 जून 2013 की एक रजिस्टर्ड सेल डीड बनाई गई, ताकि ज़मीन को ₹75 लाख में तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन को ट्रांसफर किया जा सके. विनोद कुमार ने कई को-ओनर्स के अटॉर्नी के तौर पर डीड पर साइन किए, जिनमें वे लोग भी शामिल थे जो बहुत पहले मर चुके थे, और असल में मरे हुए लोगों के बिना बांटे हुए शेयर ऐसे बेचे जैसे वे ज़िंदा हों और उनकी सहमति हो.

बड़ा रैकेट?
जांच में स्पष्ट हुआ है कि GPA पूरी तरह फर्जी है. मृतक लोगों के हस्ताक्षर/अंगूठे के निशान नकली तरीके से बनाए गए और जमीन की ट्रांसफर प्रक्रिया झूठे दस्तावेज़ों पर आधारित थी और इसका सीधा लाभ तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन को मिला.

अधिकारियों को आशंका है कि यह कोई अलग-थलग मामला नहीं बल्कि दिल्ली में मृतक/लापता लोगों की जमीन पर कब्ज़ा करने वाले एक बड़े सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है.

 

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