ट्रेन में यात्री का बैग चोरी होने पर रेलवे को झटका, अब देना होगा ₹1.45 लाख का मुआवजा

Oct 11, 2026 - 05:44
 0  8
ट्रेन में यात्री का बैग चोरी होने पर रेलवे को झटका, अब देना होगा ₹1.45 लाख का मुआवजा

 नई दिल्‍ली

दिल्‍ली राज्‍य उपभोक्‍ता आयोग ने भारतीय रेलवे को एक पैसेंजर को 1.45 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. जिसका बैग रिजर्व डिब्‍बे से चोरी हो गया था. आयोग का मानना है कि रेलवे यह कहकर बच नहीं सकता है कि सामान यात्री के निजी हिरासत में था। 

आयोग ने कहा कि असली मुद्दा रेलवे कर्मचारियों की अनरिजर्व एंट्री को रोकने में विफलता थी. पैसेंजर का बैग दो अनरिजर्व व्‍यक्तिओं के रिजर्व बोगी में घुसने के बाद ही गायब हुआ था. इस बैग में 1.20 लाख रुपये का कीमती सामान था। 

 रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले की सुनवाई दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति संगीता ढिंगरा सहगल और सदस्य बिमला कुमारी ने की. दिल्‍ली आयोग ने जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखा है। 

दिल्‍ली आयोग के सामने उत्तर रेलवे ने 16 अप्रैल, 2024 को जिला आयोग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 7 सितंबर, 2017 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 1.20 लाख रुपये और 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। 

कैसे गायब हुआ था बैग? 
7 जून 2014 को अजय कुमार महानंदा एक्सप्रेस से दिल्ली से पटना जा रहे थे. ओल्ड दिल्ली रेलवे स्टेशन पर दो अज्ञात घुसपैठिए उनके अनरिजर्व डिब्बे में घुस गए और उनका ट्रॉली बैग लेकर फरार हो गए. कुमार ने बताया कि बैग में साड़ियां, गहने और कपड़े थे, जिनकी कीमत 12 लाख रुपये थी। 

चोरी के बाद शिकायत
अजय कुमार ने बताया कि उन्होंने तुरंत कोच के टीटीई से FIR दर्ज कराने के लिए संपर्क किया. रेलवे पुलिस बल (RPF) ने 7 सितंबर, 2014 को चोरी की पुष्टि की, लेकिन FIR के बारे में कोई जानकारी नहीं दी. 22 जनवरी, 2015 के एक पत्र में कहा गया कि कुमार को मोबाइल फोन के माध्यम से स्थिति की जानकारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने कहा कि उल्लिखित नंबर उनका नहीं था। 

अंततः 23 अप्रैल, 2015 को एफआईआर दर्ज की गई. 15 मई, 2017 को मामले को 'अनसुलझा' घोषित कर दिया गया. उत्तर रेलवे ने तर्क दिया कि सामान कुमार की निजी हिरासत में था और न तो रेलवे के पास दर्ज कराया गया था और न ही इसकी जानकारी दी गई थी। 

राज्य आयोग ने रेलवे के इस तर्क को खारिज कर दिया कि सामान की व्यक्तिगत अभिरक्षा से उसकी जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है. आयोग ने कहा कि मुख्य प्रश्न यह है कि क्या रेलवे ने अनरिजर्व डिब्बे में अनरिजर्व व्यक्तियों के प्रवेश को रोककर यात्रियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सावधानी बरती थी. आयोग ने आगे कहा कि अपीलकर्ता की जवाबदेही केवल चोरी होने से नहीं बनती, बल्कि यह बिना परमिशन घुसपैठ को रोकने में विफलता से पैदा होती है, जिस कारण चोरी हो पाई। 

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0