बेचें या खरीदें? रिकॉर्ड हाई पर गोल्ड-सिल्वर ETFs के दाम, जानें क्या करना चाहिए
नई दिल्ली
ग्लोबल अनिश्चितता और जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण कीमती धातुओं के दाम में उछाल रुक नहीं रही है. सोना और चांदी के दाम अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए हैं. इस बीच, सिल्वर और गोल्ड ETF में भी खरीदारी तेजी से बढ़ रही है. ज्यादातर निवेशकों ने तो इन मेटल में SIP तक शुरू कर दी है.
दूसरी ओर, सालाना आधार पर सोने की कीमतों में 80 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई है, जबकि चांदी की कीमतें 190 फीसदी बढ़ी हैं. वहीं पिछले एक साल में सिल्वर ETF में 188% की उछाल आई है और गोल्ड ईटीएफ ने 80 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है. सिल्वर और गोल्ड ETFs अपने रिकॉर्ड हाई पर बने हुए हैं. आइए जानते हैं क्या इसमें प्रॉफिट बुक करने का सही मौका है.
अभी निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी तेजी के बाद लॉन्गटर्म प्रॉफिट की उम्मीदों के लिए नए निवेश आदर्श नहीं हो सकते हैं. उनका कहना है कि लॉन्गटर्म निवेशक निवेशित रह सकते हैं, लेकिन अधिक समझदारी भरा तरीका यह होगा कि अतिरिक्त निवेश को कम किया जाए और पोर्टफोलियो को फिर से रिस्ट्रक्चर करें. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अभी निवेशकों को थोड़ी प्रॉफिट बुकिंग कर लेनी चाहिए और जब करेक्शन आए तो खरीदारी करनी चाहिए.
क्यों अभी नहीं करना चाहिए निवेश?
इसके पीछे का तर्क समझाते हुए एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी चीज की अत्यधिक मांग होने पर, कुछ छूट जाने का डर (FOMO) बन जाता है, जिस कारण लोग हाई रेट पर भी खरीदारी कर लेते हैं. यह सबसे बड़ी गलती होती है, क्योंकि रिकॉर्ड हाई के बाद जब गिरावट आती है तो निवेशकों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ता है. अपने अनुभव को शेयर करते हुए सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (सीएफपी) और फाइनेंशियल रेडियंस के संस्थापक राजेश मिनोचा ने ईटीएम्यूटुअलफंड्स को बताया कि चांदी लॉन्गटर्म मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म के दौरान इसमें गिरावट का रिस्क है.
उन्होंने कहा कि सिल्वर प्राइस में करीब 200 फीसदी की उछाल के बाद अभी निवेश करना उचित नहीं होगा. हालांकि लॉन्ग्टर्म निवेशक अभी भी बाजार में बने रह सकते हैं, लेकिन अतिरिक्त निवेश को कम करना और एक लक्ष्य के साथ सीमित अमाउंट तक ही निवेश करना सही फैसला होगा.
फिस्डम के रिसर्च उपाध्यक्ष सागर शिंदे ने ET को बताया कि चांदी के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण रिस्क बढ़ गया है. तेज उछाल के बाद अब बड़ा लाभ कमाने वाले निवेशक इसमें शॉर्टटर्म प्रॉफिट बुकिंग कर सकते हैं. इसी तरह सोने के रिकॉर्ड हाई पर होने के कारण एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी निवेशकों को स्थिरता का इंतजार करना चाहिए, फिर इसमें निवेश बढ़ाया जा सकता है. लॉन्गटर्म नजरिए के लिए गोल्ड में निवेशित रह सकते हैं, लेकिन अभी नए निवेश से बचना चाहिए.
क्यों इतनी तेज से भाग रही चांदी?
चांदी की कीमतों में उछाल के कई कारण सामने आए हैं, जिसमें औद्योगिक मांग सबसे बड़ी वजह है, इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर सोलर एनर्जी तक में चांदी की डिमांड तेजी से बढ़ी है. चांदी को अब सोने के विकल्प के बजाय एक वैल्यूवेबल औद्योगिक सामग्री के रूप में देखा जा रहा है.
दूसरा सबसे बड़ा कारण ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल टेंशन और अनिश्चितताओं के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी खरीदी जा रही है. जिस कारण सिल्वर ईटीएफ का वेटेज बढ़ा है.
चांदी के रेट में बढ़ोतरी का तीसरा बढ़ा कारण आपूर्ति की कमी, खनन में सीमित निवेश है.
MCX पर सोने-चांदी के रेट्स
5 मार्च वायदा के लिए चांदी के दाम गुरुवार को करीब 600 रुपये चढ़कर 292152 रुपये प्रति किलो पर थे, जो इसके रिकॉर्ड हाई के काफी करीब है. 5 फरवरी वायदा के लिए गोल्ड के रेट करीब 70 रुपये टूटकर 143056 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था.
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