योगी सरकार ने बनाई ग्लोबल एडवाइजरी काउंसिल, यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की तैयारी

Nov 5, 2026 - 09:44
 0  8
योगी सरकार ने बनाई ग्लोबल एडवाइजरी काउंसिल, यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की तैयारी

लखनऊ
प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने के लिए योगी सरकार ने वैश्विक विशेषज्ञों का साथ लेने की पहल की है। एक ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था और वर्ष 2047 तक विकसित उत्तर प्रदेश का लक्ष्य हासिल करने के लिए स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन की उच्चस्तरीय एडवाइजरी काउंसिल का गठन किया गया है।

इसमें विश्व बैंक, सैमसंग, एचसीएल, गेट्स फाउंडेशन और यूपीएल जैसी वैश्विक संस्थाओं के शीर्ष पदाधिकारियों को शामिल किया गया है। काउंसिल प्रदेश में निवेश, रोजगार और निर्यात बढ़ाने के साथ औद्योगिक विकास, तकनीक और कौशल विकास की रणनीति पर सरकार को सुझाव देगी।

कमीशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश के अनुसार, विश्व बैंक के पूर्व कार्यकारी निदेशक और नीति आयोग के सीईओ रहे पूर्व आइएएस अधिकारी परमेश्वरन अय्यर को परिषद का अध्यक्ष बनाया गया है। कमीशन के सीईओ उपाध्यक्ष जबकि एसीईओ अक्षत वर्मा सदस्य सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे।

परिषद में सैमसंग साउथवेस्ट एशिया के अध्यक्ष एवं सीईओ जेबी पार्क, विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री डा. इंदरमिट गिल, यूपीएल लिमिटेड के चेयरमैन एवं ग्रुप सीईओ जय श्राफ, एचसीएल के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक सी. विजयकुमार और गेट्स फाउंडेशन की इंडिया कंट्री डायरेक्टर अर्चना व्यास को सदस्य बनाया गया है।

ये भी होंगे काउंसिल के सदस्य
इनके अलावा सीईईडब्ल्यू के संस्थापक एवं पूर्व सीईओ डा. अरुणाभ घोष, एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की अध्यक्ष डा. सौम्या स्वामीनाथन, कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री डा. अशोक कुमार सिंह, टार्नोस के संस्थापक एवं सीईओ प्रतीक हीरा, फेडएक्स एक्सप्रेस के उपाध्यक्ष सुवेंदु चौधरी और यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप फोरम के अध्यक्ष एवं सीईओ डॉ. मुकेश अघी भी काउंसिल के सदस्य होंगे।

काउंसिल रोजगार के अवसर बढ़ाने और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने के उपाय सुझाएगी। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना को अगले स्तर पर ले जाने के साथ कृषि और बागवानी उत्पादों तथा उनके प्रसंस्कृत उत्पादों का निर्यात बढ़ाने की रणनीति भी तैयार करेगी।

इसके अलावा घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित करने, नए औद्योगिक क्षेत्रों की संभावनाएं तलाशने और मौजूदा औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने पर भी सुझाव देगी। वर्ष में न्यूनतम दो पूर्ण बैठकें काउंसिल की होंगी जबकि जरूरत पर विशेष बैठकें भी बुलाई जा सकेंगी, जबकि क्षेत्रवार कार्य समूहों की बैठकें तिमाही आधार पर होंगी। काउंसिल के सुझाव परामर्शात्मक होंगे और उन्हें आवश्यक कार्यवाही के लिए सरकार के समक्ष रखा जाएगा। कमीशन ही काउंसिल के सचिवालय के रूप में काम करेगा।

तकनीक से लेकर कौशल विकास तक पर नजर
प्रदेश में बुनियादी ढांचे, लाजिस्टिक्स, कनेक्टिविटी और रोजगारपरक क्षेत्रों के विकास में वैश्विक अनुभव का लाभ लेने की तैयारी है। एडवाइजरी काउंसिल उभरती तकनीकों, नवाचार और बेहतर वैश्विक कार्यप्रणालियों को अपनाने के सुझाव देगी।

शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और प्रशिक्षण के जरिए मानव संसाधन को भविष्य की आर्थिक एवं तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर भी जोर रहेगा।

वैश्विक वित्तीय संस्थानों से साझेदारी के रास्ते तलाशेगी
प्रदेश की विकास योजनाओं के लिए नए वित्तीय संसाधन जुटाने के विकल्प तलाशना भी काउंसिल के एजेंडे में शामिल है। बहुपक्षीय विकास बैंकों, क्षेत्रीय विकास बैंकों, वैश्विक पेंशन फंड, सावरेन वेल्थ फंड, परोपकारी संगठनों, विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के साथ साझेदारी के अवसर तलाशे जाएंगे। प्रमुख आर्थिक सुधारों और विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर उनके क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के सुझाव भी दिए जाएंगे।

 

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0