क्या समझकर दिया था? सुविधाएं वापस लेने की चेतावनी पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा पलटवार

Jan 22, 2026 - 15:14
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क्या समझकर दिया था? सुविधाएं वापस लेने की चेतावनी पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा पलटवार

प्रयागराज
नोटिस में प्राधिकरण ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से 24 घंटे में यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनकी संस्था को माघ मेला में दी गई जमीन और सुविधाओं को निरस्त करके मेले में उनके प्रवेश को क्यों न प्रतिबंधित कर दिया जाए। इस नोटिस के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रिया सामने आई है।


माघ मेला-2026 में मौनी अमावस्या पर संगम स्नान के लिए जाते समय शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोके जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। पिछले पांच दिनों से इस पर यूपी में सियासी बवंडर मचा हुआ है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा एक और नोटिस जारी किए जाने के बाद शंकराचार्य के समर्थक और भक्त और नाराज हैं। इस नोटिस में प्राधिकरण ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से 24 घंटे में यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनकी संस्था को माघ मेला में दी गई जमीन और सुविधाओं को निरस्त करके हमेशा के लिए मेले में उनके प्रवेश को क्यों न प्रतिबंधित कर दिया जाए। इस नोटिस के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने जमीन और सुविधाएं वापस लेने की चेतावनी पर पलटवार करते हुए प्रशासन से पूछा है कि क्या समझकर दिया था और क्या समझकर वापस ले रहे हैं?


निजी टीवी चैनलों से बातचीत में उन्होंने कहा- ‘क्या समझकर दिया था और क्या समझकर वापस ले रहे हो? देते समय तुम्हारी अकल कहां गई थी या लेते समय कहां अकल चली गई है, दोनों में तो अंतर आ गया न।’ उन्होंने कहा कि पीछे हटने की क्या बात है? 100 करोड़ सनातनधर्मियों के सम्मान को हम कैसे Give up कर दें? एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि जो भी नोटिस आया है उसका जवाब दे दिया गया है।
कल शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने दी थी ये चेतावनी

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और मेलाधिकारी ऋषिराज की ओर से को दिए गए नोटिस के जवाब के साथ प्राधिकरण के अफसरों से 24 घंटे के भीतर नोटिस वापस लेने को कहा था। ऐसा न करने पर उन्होंने कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी थी। शंकराचार्य के अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्र की ओर से दिए गए जवाब में मेला प्रशासन को बताया गया कि उनका पट्टाभिषेक पहले ही हो चुका था, कोर्ट का आदेश बाद का है। साथ ही चेतावनी दी गई कि प्रशासन अपना नोटिस 24 घंटे के भीतर वापस ले। ऐसा न करने पर प्रशासन के खिलाफ कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से प्रस्तुत करने कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर अन्य आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। आठ पेज के जवाब में प्रशासन की ओर से उठाए गए बिंदु पर स्थिति स्पष्ट की गई।
प्रशासन ने दिया एक और नोटिस

मेला प्रशासन द्वारा स्वामी जी को एक और नोटिस जारी किया गया जिसमें प्रशासन ने 24 घंटे में जवाब मांगते हुए मेला प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी है। प्रशासन द्वारा दिए गए नोटिस में 24 घंटे में जवाब न देने पर मेले से प्रतिबंधित करने और सुविधाएं निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगिराज सरकार ने आरोप लगाया कि सरकार पूरी तरह बदले की भावना के साथ कार्रवाई कर रही है। प्रशासन ने पारदर्शिता का उल्लंघन करते हुए शंकराचार्य शिविर पांडाल के पीछे बैक डेट (पुरानी तारीख) में नोटिस चस्पा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटिस लगाने के बाद अधिकारी खुद आकर कहने लगे की आपने इसका जवाब क्यों नहीं दिया। शैलेंद्र योगिराज सरकार ने यह भी कहा कि नोटिस का जवाब तैयार कर लिया गया है और जल्द ही इसे प्रशासन को सौंप दिया जाएगा।
बिना इजाजत पालकी पर संगम स्नान के लिए जाने का आरोप

प्रशासन की ओर से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप है कि वह बिना इजाजत मौनी अमावस्या के दिन अपने अनुयायियों के साथ पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। भारी भीड़ के चलते उनसे पालकी छोड़कर पैदल संगम स्नान के लिए जाने का अनुरोध किया गया लेकिन वह अड़ गए। प्रशासन का कहना है कि उस दिन संगम स्नान के लिए करोड़ों श्रद्धालु जुटे थे और यदि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी पर अनुयायियों के साथ वहां जाते तो कोई अप्रिय घटना हो सकती थी। प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों पर बैरियर गिराने और धक्का मुक्की करने का अभी आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की जिद के चलते काफी देर तक वापसी मार्ग अवरुद्ध रहा जिससे सामान्य जनमानस को काफी असुविधा हुई। उधर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि यदि वह पैदल जाते तो उन्हें देखकर भीड़ उमड़ जाती और भगदड़ मच सकती थी। वह पिछले तीन वर्षों से पालकी पर इसीलिए जाते हैं ताकि श्रद्धालु दूर से उन्हें देख लें और वहां किसी प्रकार की असुविधा न हो।

 

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