औद्योगिक क्षेत्रों में पारदर्शिता एवं प्रभावी निगरानी के लिए ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली होगी लागू
औद्योगिक क्षेत्रों में पारदर्शिता एवं प्रभावी निगरानी के लिए ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली होगी लागू
यूपीसीडा की 50वीं बोर्ड बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मिली मंजूरी, औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति
ड्रोन मॉनिटरिंग, ई-ऑक्शन, भूमि बैंक विस्तार और तेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर अहम फैसले
तृतीय पक्ष निरीक्षण और ड्रोन सिस्टम से गुणवत्ता व पारदर्शिता होगी सुनिश्चित
75% आवंटन के बाद 25% भूमि ई-ऑक्शन से, निवेशकों को मिलेगा अवसर
सहारनपुर-बदायूं समेत कई जिलों में कनेक्टिविटी के साथ औद्योगिक विस्तार को स्वीकृति
लखनऊ
उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की 50वीं बोर्ड बैठक लोक भवन, लखनऊ में अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के अनुरूप आयोजित इस बैठक में औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना सुदृढ़ीकरण एवं निवेश प्रोत्साहन से जुड़े कुल 34 प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श कर प्रमुख प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक में विकास एवं अनुरक्षण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु तृतीय पक्ष निरीक्षण (TPIA) एजेंसी के चयन को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में पारदर्शिता एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया, जिसके माध्यम से सिविल, विद्युत एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी।
कम्पिल कताई मिल, मऊ आइमा, बहादुरगंज, सलेमपुर एवं बाराबंकी के औद्योगिक क्षेत्रों के मानचित्रों को स्वीकृति प्रदान की गई। वहीं बलिया, हाथरस, फतेहपुर, बाराबंकी एवं चित्रकूट के औद्योगिक क्षेत्रों के प्रस्तावों पर विचार करते हुए संशोधन के निर्देश दिए गए तथा संशोधित तलपट (लेआउट) मानचित्र को स्वीकृति दी गई।
भूमि बैंक को सुदृढ़ करने हेतु नीतिगत संशोधन के निर्देश दिए गए। साथ ही भूमि आवंटन की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने के लिए संशोधित योजना तैयार करते हुए प्राप्त आवेदनों पर नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा गया।
एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत यह तय किया गया कि आवंटन योग्य भूमि का 75 प्रतिशत आवंटन पूर्ण होने के पश्चात शेष 25 प्रतिशत भूमि का आवंटन ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया कि प्रचलित परियोजनाओं में विकास कार्यों को जारी रखते हुए समानांतर रूप से आवंटन प्रक्रिया संचालित की जाए, ताकि निवेश में तेजी लाई जा सके।
सहारनपुर एवं बदायूं में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के संदर्भ में निर्देश दिए गए कि अधिग्रहण से पूर्व सड़क संपर्क (रोड कनेक्टिविटी) एवं लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को दुरुस्त किया जाए, जिससे औद्योगिक इकाइयों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।
बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि अवस्थापना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) विकास हेतु शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए वित्तपोषण का प्रभावी उपयोग करते हुए एक वर्ष के भीतर बुनियादी सुविधाओं का तीव्र विकास सुनिश्चित किया जाए। साथ ही निवेशकों की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष कैंप आयोजित कर एक माह के भीतर उनका निस्तारण किया जाए।
अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने कहा कि यूपीसीडा का लक्ष्य केवल औद्योगिक भूखंडों का आवंटन करना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में एक विश्वस्तरीय औद्योगिक ईकोसिस्टम का निर्माण करना है, जहां तकनीक, पारदर्शिता और दक्षता के आधार पर उद्यमियों को बेहतर वातावरण मिल सके। उन्होंने कहा कि ड्रोन आधारित निगरानी, डिजिटल सेवाएं और पारदर्शी आवंटन प्रक्रिया जैसे निर्णय प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में तेजी से अग्रसर करेंगे। अंत में अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि सहारनपुर और बदायूं जैसे क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के दौरान कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि औद्योगिक विकास को दीर्घकालिक मजबूती मिल सके।
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