आधार से पहचान प्रक्रिया ने छुआ नया मुकाम, 6 महीनों में दोगुना हुआ लेनदेन

Aug 16, 2025 - 04:14
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आधार से पहचान प्रक्रिया ने छुआ नया मुकाम, 6 महीनों में दोगुना हुआ लेनदेन

नई दिल्ली

केंद्र सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन ने एक नया मानक स्थापित करते हुए मात्र 6 महीनों में दोगुना, 100 करोड़ से 200 करोड़ लेनदेन दर्ज किए हैं। आधार फेस ऑथेंटिकेशन से आधार धारक अपनी पहचान तुरंत, सुरक्षित और संपर्क रहित तरीके से, कभी भी, कहीं भी, बिना किसी दस्तावेज के सत्यापित कर सकते हैं। इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय के अनुसार, 10 अगस्त, 2025 को यूआईडीएआई ने फेस ऑथेंटिकेशन के 200 करोड़ ट्रांजैक्शन का ऐतिहासिक जश्न मनाया, जो भारत के निर्बाध, सुरक्षित और कागज रहित प्रमाणीकरण की ओर तेजी से बढ़ते कदम को दर्शाता है।

आधार से पहचान साबित करने की प्रक्रिया अपनाने की गति तेजी से बढ़ रही है

आधार से पहचान साबित करने की प्रक्रिया अपनाने की गति तेजी से बढ़ रही है। जहां 2024 की छमाही तक 50 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए थे वहीं, लगभग पांच महीनों में जनवरी 2025 में यह संख्या दोगुनी होकर 100 करोड़ लेनदेन हो गई। मंत्रालय ने बताया कि छह महीने से भी कम समय में, यह आंकड़ा फिर से दोगुना होकर 200 करोड़ के मील के पत्थर तक पहुंच गया है। यूआईडीएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) भुवनेश कुमार ने कहा, “इतने कम समय में 200 करोड़ आधार फेस ऑथेंटिकेशन लेनदेन तक पहुंचना, निवासियों और सेवा प्रदाताओं, दोनों के आधार के सुरक्षित, समावेशी और इनोवेटिव ऑथेंटिकेशन इकोसिस्टम में विश्वास और भरोसे को दर्शाता है।”

छह महीने से भी कम समय में 100 करोड़ से 200 करोड़ लेनदेन तक का सफर इसकी मापनीयता और देश की डिजिटल रेडीनेस का प्रमाण है

छह महीने से भी कम समय में 100 करोड़ से 200 करोड़ लेनदेन तक का सफर इसकी मापनीयता और देश की डिजिटल रेडीनेस का प्रमाण है।” उन्होंने आगे कहा, “गांवों से लेकर महानगरों तक, यूआईडीएआई सरकारों, बैंकों और सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर आधार फेस ऑथेंटिकेशन को एक बड़ी सफलता बनाने और प्रत्येक भारतीय को अपनी पहचान तुरंत, सुरक्षित और कहीं भी साबित करने की शक्ति प्रदान करने के लिए काम कर रहा है।” मंत्रालय ने कहा, “यह उपलब्धि केवल संख्याओं को लेकर नहीं है, यह इस बात का प्रमाण है कि कैसे समावेशी तकनीक, जब कुशलतापूर्वक उपयोग की जाती है, तो विभाजन को पाट सकती है, नागरिकों को सशक्त बना सकती है और वास्तव में आत्मविश्वास से भरे डिजिटल भविष्य की ओर भारत की यात्रा को गति दे सकती है।

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