बिहान से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की तकदीर, आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहीं जीपीएम की 59 हजार से अधिक महिलाएं

Oct 14, 2026 - 15:44
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बिहान से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की तकदीर, आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहीं जीपीएम की 59 हजार से अधिक महिलाएं

बिहान से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की तकदीर, आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहीं जीपीएम की 59 हजार से अधिक महिलाएं

महिला सशक्तिकरण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती, स्वावलंबन और स्वरोजगार की दिशा में बढ़ रहे महिलाओं के कदम

बचत, बैंकिंग, कौशल विकास और आजीविका के अवसरों से महिलाओं के जीवन में आ रहा सकारात्मक बदलाव

रायपुर
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में महिला सशक्तिकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई तस्वीर उभर रही है। कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं अब संगठित होकर आर्थिक गतिविधियों में अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित 'बिहान' योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान कर रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में हजारों महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर बचत, वित्तीय प्रबंधन, स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसरों की ओर कदम बढ़ा रही हैं। बिहान मिशन महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।

5,576 स्व-सहायता समूहों में संगठित हुईं 59,524 महिलाएं

जिले में बिहान मिशन के अंतर्गत महिलाओं को संगठित कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मिशन की 13 अक्टूबर 2026 तक की प्रगति के अनुसार जिले में कुल 5,576 स्व-सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है, जिनसे 59,524 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। यह उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं में सामूहिक संगठन, आर्थिक जागरूकता और आत्मनिर्भरता के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

विकासखंडवार आंकड़ों के अनुसार गौरेला विकासखंड में 1,828 स्व-सहायता समूहों से 19,654 महिलाएं जुड़ी हैं। इसी प्रकार पेंड्रा विकासखंड में 1,603 समूहों के माध्यम से 17,612 महिलाएं तथा मरवाही विकासखंड में 2,145 समूहों से 22,258 महिलाएं संगठित हुई हैं। जिले में समूहों की संख्या और महिलाओं की भागीदारी के मामले में मरवाही विकासखंड अग्रणी है। इन समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को एक साझा मंच मिल रहा है, जहां वे अपनी आर्थिक जरूरतों, बचत, आजीविका और सामूहिक विकास से जुड़े विषयों पर निर्णय लेने में भागीदारी कर रही हैं।

चालू वित्तीय वर्ष में 676 नए समूहों का गठन, 12 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ीं

महिला सशक्तिकरण की दिशा में जिले में बिहान मिशन का विस्तार निरंतर जारी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 676 नए स्व-सहायता समूहों का गठन किया गया है, जिनसे 12,029 महिलाएं जुड़ी हैं। नए समूहों का गठन ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने और उन्हें संगठित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

चालू वित्तीय वर्ष में गौरेला विकासखंड में 211 नए स्व-सहायता समूहों का गठन कर 4,189 महिलाओं को जोड़ा गया है। पेंड्रा विकासखंड में 130 नए समूहों से 3,302 महिलाएं तथा मरवाही विकासखंड में 335 नए समूहों से 4,538 महिलाएं जुड़ी हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के तीनों विकासखंडों में महिलाओं को सामूहिक संगठन से जोड़ने के प्रयासों को गति मिली है। विशेष रूप से मरवाही विकासखंड में नए समूहों का गठन महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।

बचत और बैंकिंग से आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

बिहान मिशन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक प्रबंधन के प्रति जागरूक बनाना है। स्व-सहायता समूह महिलाओं में नियमित बचत की आदत विकसित करने, सामूहिक वित्तीय निर्णय लेने और बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। समूहों के माध्यम से महिलाएं अपनी छोटी-छोटी बचत को संगठित कर आर्थिक जरूरतों की पूर्ति और भविष्य की योजनाओं के लिए वित्तीय आधार तैयार कर सकती हैं।

मिशन के अंतर्गत महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं, ऋण सुविधाओं और वित्तीय साक्षरता से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया जाता है। इससे ग्रामीण महिलाओं की औपचारिक वित्तीय संस्थाओं तक पहुंच आसान बनाने और स्वरोजगार के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने की संभावनाएं बढ़ती हैं। आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से परिवार की आय में योगदान देने के साथ उनकी निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत होती है।

खेती, पशुपालन और स्थानीय उत्पादों से आजीविका के नए अवसर

बिहान मिशन का उद्देश्य महिलाओं को केवल स्व-सहायता समूहों से जोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें स्थायी आजीविका और आयवर्धक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित गतिविधियां, सब्जी उत्पादन, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय उत्पादों का निर्माण और विपणन जैसे अनेक क्षेत्रों में स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं।

स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को उनकी रुचि, स्थानीय संसाधनों और उपलब्ध अवसरों के अनुरूप आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा सकता है। सामूहिक प्रयासों से उत्पादन, संसाधनों के बेहतर उपयोग और उत्पादों के विपणन की संभावनाएं बढ़ती हैं। स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों का विस्तार ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के साथ गांवों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है।

आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सामाजिक बदलाव का भी माध्यम बना बिहान

बिहान मिशन ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक बदलाव के साथ सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्व-सहायता समूह महिलाओं को अपनी बात रखने, सामूहिक निर्णय लेने और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने का अवसर प्रदान करते हैं। समूहों के माध्यम से महिलाओं में नेतृत्व क्षमता, आपसी सहयोग और आत्मविश्वास विकसित करने की दिशा में सकारात्मक वातावरण तैयार हो रहा है।

सामूहिक संगठन महिलाओं को यह विश्वास दिलाता है कि छोटे-छोटे प्रयास भी मिलकर बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं। समूहों से जुड़कर महिलाएं एक-दूसरे के अनुभवों से सीखती हैं और आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक प्रयास कर सकती हैं। इससे परिवार और समाज में महिलाओं की भूमिका को नई पहचान मिलने के साथ सामाजिक विकास में उनकी भागीदारी बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत होती हैं।

महिलाओं की सामूहिक शक्ति से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

किसी भी क्षेत्र के समग्र विकास में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सक्षम होती हैं, तो उसका सकारात्मक प्रभाव परिवार की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर भी पड़ता है। बिहान मिशन इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उनकी क्षमताओं को आर्थिक अवसरों में बदलने का माध्यम बन रहा है।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 59 हजार से अधिक महिलाओं का स्व-सहायता समूहों से जुड़ना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। समूहों का यह व्यापक नेटवर्क भविष्य में आजीविका संवर्धन, स्थानीय उद्यमिता और ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के लिए मजबूत आधार तैयार कर सकता है। महिलाओं को आवश्यक प्रशिक्षण, वित्तीय संसाधन और बाजार से जोड़कर उनकी आर्थिक संभावनाओं को और अधिक विस्तार दिया जा सकता है।

आत्मनिर्भर गांव और विकसित भारत की संकल्पना को साकार कर रहा बिहान

ग्रामीण विकास की वास्तविक सफलता तभी संभव है, जब विकास की प्रक्रिया में महिलाओं की सक्रिय और समान भागीदारी सुनिश्चित हो। बिहान मिशन इसी उद्देश्य के साथ महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में स्व-सहायता समूहों का निरंतर विस्तार इस बात का संकेत है कि ग्रामीण महिलाएं अपनी सामूहिक शक्ति को पहचानते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। बचत से आर्थिक अनुशासन, संगठन से आत्मविश्वास और आजीविका के अवसरों से स्वावलंबन की राह तैयार हो रही है।

बिहान के माध्यम से महिलाओं की बढ़ती भागीदारी केवल व्यक्तिगत आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार, समाज और गांवों के समग्र विकास की संभावनाओं को भी नई दिशा दे रही है। जिले की 59,524 महिलाओं का यह सामूहिक संगठन 'सशक्त महिला, समृद्ध परिवार और आत्मनिर्भर गांव' की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन रहा है। महिलाओं की यही सामूहिक शक्ति आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और विकसित छत्तीसगढ़ तथा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

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