CG हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: बिना अनुमति स्कूल में घुसना घर में घुसपैठ के बराबर अपराध

Feb 28, 2026 - 04:44
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CG हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: बिना अनुमति स्कूल में घुसना घर में घुसपैठ के बराबर अपराध

रायपुर
 स्कूल परिसर को केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि ‘प्रापर्टी की कस्टडी’ यानी संपत्ति की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह भी माना जाएगा। ऐसे में बिना अनुमति स्कूल में घुसना भारतीय दंड संहिता के तहत ‘हाउस ट्रेसपास’ (घर में घुसपैठ) का अपराध बन सकता है। यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी की याचिका खारिज कर दी।

हाई कोर्ट के जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने धारा 452 (चोट, हमला या गलत तरीके से रोकने की तैयारी के बाद घर में घुसना), धारा 442 (घर में घुसने की परिभाषा) और धारा 441 (आपराधिक अतिक्रमण) की विस्तृत व्याख्या की। कोर्ट ने कहा कि इन धाराओं को साथ पढ़ने पर स्पष्ट होता है कि यदि कोई व्यक्ति किसी भवन, टेंट या पोत (वेसल) में आपराधिक अतिक्रमण करता है और वह स्थान या तो मानव निवास के रूप में, या पूजा स्थल के रूप में, या संपत्ति की कस्टडी के रूप में उपयोग में लिया जा रहा हो, तो उसे ‘हाउस ट्रेसपास’ माना जाएगा।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हाउस ट्रेसपास की परिभाषा में तीन स्थितियां आती हैं पहला- मानव निवास के रूप में उपयोग होने वाला भवन, दूसरा - पूजा के लिए उपयोग होने वाला भवन, तीसरा- संपत्ति की कस्टडी के लिए उपयोग होने वाला भवन।

कोर्ट ने कहा कि स्कूल भवन को भले ही निवास या पूजा स्थल नहीं माना जा सकता, लेकिन वहां स्कूल का फर्नीचर और अन्य शैक्षणिक संपत्ति सुरक्षित रखी जाती है। इसलिए इसे ‘प्रापर्टी की कस्टडी’ की श्रेणी में रखा जा सकता है।
कोर्ट की टिप्पणी

हाई कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करते समय केवल प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों को देखा जाता है। ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोप तय किए हैं, जिनमें कोई त्रुटि नहीं है। न्यायालय ने कहा कि स्कूल भवन पर शिकायतकर्ता का वैध कब्जा था और याचिकाकर्ता को बिना अनुमति वहां जबरन प्रवेश करने का कोई अधिकार नहीं था। इसलिए धारा 452 के तहत आरोप तय करने में कोई कमी नहीं है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और रिविजनल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
याचिकाकर्ता और राज्य के तर्क

याचिकाकर्ता का कहना था कि वह सरकारी सर्कुलर और गाइडलाइन के खिलाफ स्कूल के कथित अवैध संचालन का विरोध कर रहा था। उसने तर्क दिया कि स्कूल ‘रहने की जगह’ की परिभाषा में नहीं आता, इसलिए धारा 452 के तहत आरोप तय नहीं किए जा सकते।

वहीं, राज्य की ओर से दलील दी गई कि कर्मचारियों के बयान से स्पष्ट है कि आरोपी बिना अनुमति परिसर में घुसा और अभद्र व्यवहार किया।

यह है पूरा मामला

आरोप है कि जून 2024 को विकास तिवारी साथियों के साथ सरोना स्थित कृष्णा किड्स एकेडमी के परिसर में घुसे, वहां गाली-गलौज की और महिला स्टाफ से बदसलूकी की। स्कूल के प्रशासक ने इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी।

सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 452, धारा 294 (अश्लील कृत्य) और धारा 34 (समान आशय) के तहत आरोप तय किए। आरोपित ने इस आदेश को रिविजनल कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। इसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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