दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: बंद पड़े राजघाट पावर प्लांट को मिलेगा नया जीवन, प्रस्तावों पर मंथन
नई दिल्ली
दिल्ली सरकार बंद पड़े राजघाट पावर प्लांट और यमुना किनारे उसकी जमीन सैर-सपाटे एवं की नाइटलाइफ, कल्चरल और खान-पान के हब के तौर पर रीडेवलप करने के कई विकल्पों पर विचार कर रही है। अधिकारियों ने सोमवार को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसमें एक फूड स्ट्रीट, पैदल चलने के रास्ते, कल्चरल एक्टिविटी के लिए प्लाजा और मॉड्यूलर ओपन स्पेस शामिल होंगे। पावर डिपार्टमेंट लंदन के रीडेवलप्ड बैटरसी पावर स्टेशन और मुंबई के लोअर परेल जैसे अलग-अलग देशी-विदेशी मिक्स्ड-यूज रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स से प्रेरणा लेकर प्रस्तावों पर विचार कर रहा है।
पीपीपी के जरिये किया जा सकता है डेवलप
प्रस्तावों के अनुसार, यमुना प्रोमेनेड को एलईडी लाइट वाले फुटपाथ, बेंच, ईको-टूरिज्म के लिए ईको-फ्रेंडली पैडल बोट और नाइटलाइफ एरिया में 24x7 यूथ लर्निंग और रिक्रिएशन हब के साथ प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप के जरिये डेवलप किया जा सकता है। रायपुर के नालंदा परिसर की तर्ज पर राजघाट नाइटस्केप के अंदर एक खास सेक्शन को 24x7 यूथ हब के तौर पर बनाने के प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है, जो शिक्षा और मनोरंजन को मिलाएगा। रायपुर का नालंदा परिसर 6 एकड़ का ईको-फ्रेंडली कैंपस है, जिसमें एक लाइब्रेरी, हाई-स्पीड इंटरनेट और एक ई-लाइब्रेरी, एक बास्केटबॉल कोर्ट, एक कैफेटेरिया और खुली हवा में पढ़ने की जगहें हैं।
इन योजनाओं पर भी विचार
अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा रीडेवलपमेंट प्लान में लाइसेंस वाले वेंडर्स के साथ एक फूड स्ट्रीट भी शामिल हो सकती है। जैसा कि मुंबई के लोअर परेल में है, जहां रीडेवलप की गई टेक्सटाइल मिलों में फूड ट्रक और स्ट्रीट-स्टाइल खाने की जगहें हैं, जो मुंबई के खाने के माहौल को दिखाती हैं। सुझाव दिया गया है कि प्रस्तावित प्रोमेनेड के पास 500 मीटर की पट्टी को फूड स्ट्रीट के लिए तय किया जाए, जिसमें पुरानी दिल्ली के लोकल खाना बनाने वालों को सब्सिडी वाले स्टॉल दिए जाएं, ताकि दिल्ली के असली स्वाद मिल सकें।
रूफटॉप कैफे भी प्रस्तावों का हिस्सा
अधिकारियों ने बताया कि देर रात तक खुला रहने वाला हेरिटेज म्यूजियम, दिल्ली के इतिहास को दिखाने के लिए वर्चुअल रियलिटी का इस्तेमाल, इंडोर गेमिंग जोन, इमर्सिव एंटरटेनमेंट स्पेस और यमुना के नजारे वाले रूफटॉप कैफे भी उन प्रस्तावों का हिस्सा हैं जिन पर डिपार्टमेंट विचार कर रहा है। राजघाट प्लांट को पर्यावरण संबंधी चिंताओं के चलते 2015 में बंद कर दिया गया था। यह प्लांट डीडीए के मालिकाना हक वाली 45 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है।
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