Punjab विधानसभा सत्र से पहले आस्था: कुलतार सिंह संधवां ने गुरुद्वारा अंब साहब में टेका मत्था

Apr 13, 2026 - 15:14
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Punjab विधानसभा सत्र से पहले आस्था: कुलतार सिंह संधवां ने गुरुद्वारा अंब साहब में टेका मत्था

चंडीगढ़.

पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के आगाज से पहले स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने आध्यात्मिक मार्ग अपनाया। सोमवार को वह मोहाली के ऐतिहासिक धार्मिक स्थल गुरुद्वारा अंब साहब पहुंचे, जहां उन्होंने मत्था टेक कर सर्वशक्तिमान से आशीर्वाद प्राप्त किया। स्पीकर ने इस दौरान ‘सरबत के भले’ की मंगलकामना की।

विधानसभा की कार्यवाही शुरू करने से पहले गुरुद्वारे जाकर अरदास करना इस बात का संकेत है कि सरकार आगामी विधायी कार्यों, विशेषकर बेअदबी विरोधी बिल को लेकर कितनी गंभीर है।

ऐतिहासिक दिन और नई चुनौतियों का जिक्र
इस अवसर पर संधवां ने देश-दुनिया की संगत को खालसा सृजना दिवस की हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह दिन सिख कौम के गौरव और सेवा भावना का प्रतीक है। पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब की पवित्र धरती पर पूर्व में हुई बेअदबी की घटनाओं ने पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया था। उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय के सत्ताधारियों ने दोषियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे जनमानस में भारी आक्रोश बना रहा।

विपक्ष और एसजीपीसी पर तीखा प्रहार
जब एसजीपीसी (SGPC) अध्यक्ष द्वारा विशेष बिल पर उठाए जा रहे सवालों के बारे में पूछा गया, तो स्पीकर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि जब बेअदबी की घटनाएं हो रही थीं, तब उनकी पार्टी की सरकार थी, तो उस समय कार्रवाई क्यों नहीं की गई? संधवां ने आरोप लगाया कि कुछ लोग केवल विरोध करने की राजनीति कर रहे हैं और विकास कार्यों में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता दोषियों को सजा दिलाना और धार्मिक मर्यादा की रक्षा करना है।

सदन में सर्वसम्मति की जताई उम्मीद
सदन में प्रस्तावित बिल के भविष्य पर बात करते हुए स्पीकर ने विश्वास व्यक्त किया कि शायद ही कोई ऐसा सदस्य होगा जो बेअदबी रोकने वाले इस कानून का विरोध करेगा। उन्होंने आशा जताई कि विधानसभा के सभी सदस्य दलगत राजनीति से ऊपर उठकर गुरु मर्यादा के अनुरूप इस महत्वपूर्ण विधेयक पर अपनी सहमति देंगे। यह सत्र केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पंजाब की धार्मिक भावनाओं और न्याय व्यवस्था की मजबूती के लिए एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

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