बिजली सेक्टर में हरियाणा A क्लास, देशभर में हासिल किया 8वां स्थान

Feb 22, 2026 - 13:14
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बिजली सेक्टर में हरियाणा A क्लास, देशभर में हासिल किया 8वां स्थान

यमुना नगर.

बिजली सुधारों की दौड़ में हरियाणा ने राष्ट्रीय स्तर पर दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पहली नियामक प्रदर्शन रैंकिंग में 100 में से 88.5 अंक हासिल कर राज्य ने ‘ए’ ग्रेड पाया है और देशभर में 8वां स्थान हासिल किया है। यह रिपोर्ट पावर फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया ने आरईसी लिमिटेड के सहयोग से जारी की है।

बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता’ श्रेणी में हरियाणा को 32 में से पूरे 32 अंक मिले। राज्य ने संसाधन पर्याप्तता के स्पष्ट विनियम अधिसूचित किए हैं, बिजली खरीद के लिए रिजर्व मार्जिन तय किया है और दीर्घकालिक योजना के लिए समय-सीमा निर्धारित की है। ट्रांसमिशन यूटिलिटी और डिस्कॉम की तीन-वर्षीय कैपेक्स योजनाओं को मंजूरी के साथ अनुपालन न होने पर दंडात्मक प्रावधान भी सुनिश्चित किए गए हैं। नियामक गवर्नेंस में भी हरियाणा को पूरे 5 में से 5 अंक मिले। अधिकारियों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट नियम, पदों का वर्गीकरण और प्रशासनिक पारदर्शिता ने आयोग की संस्थागत मजबूती को रेखांकित किया है।

डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति श्रेणी में राज्य को 25 में से 23.5 अंक प्राप्त हुए। टैरिफ आदेश समय पर जारी किए गए और ट्रू-अप प्रक्रिया भी तय समय में पूरी की गई। खास बात यह रही कि कोई नई रेगुलेटरी एसेट सृजित नहीं की गई, जो वित्तीय अनुशासन का संकेत है। एफपीपीएएस (ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन) की मासिक व्यवस्था से लागत का स्वतः समायोजन संभव हुआ है।

नए बिजली कनेक्शन के लिए समय-सीमा तय (मेट्रो क्षेत्र में 3 दिन, नगर पालिका में 7 दिन और ग्रामीण क्षेत्र में 15 दिन) से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिला है। नेट मीटरिंग कनेक्शन 10 दिनों में जारी करने की व्यवस्था भी लागू है। ‘एनर्जी ट्रांजिशन’ में 100 किलोवाट तक ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस, ग्रीन हाइड्रोजन और वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं को छूट तथा 2029-30 तक नवीकरणीय खरीद दायित्व की रूपरेखा ने राज्य को 15 में से 12 अंक दिलाए।

एचईआरसी के अध्यक्ष नंदलाल शर्मा ने कहा, यह उपलब्धि पारदर्शी विनियमन, वित्तीय अनुशासन और उपभोक्ता-केंद्रित सुधारों की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इस रैंकिंग ने संकेत दिया है कि हरियाणा का बिजली तंत्र केवल आपूर्ति में नहीं, बल्कि नियामक ढांचे और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के अनुरूप भी मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

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