हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से राहत, ED की खिंचाई, CJI ने क्या दी नसीहत?
रांची
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज शिकायत वाद पर रांची सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा लिए गए संज्ञान को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने रांची की MP-MLA कोर्ट की विशेष अदालत में चल रही कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी। साथ ही ED को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस आदेश के बाद फिलहाल निचली अदालत में आगे की प्रक्रिया स्थगित रहेगी, जिससे मुख्यमंत्री को अस्थायी राहत मिल गई है।
सीजेआई की अगुवाई वाली खंडपीठ में हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई, जिसमें जस्टिस जॉयमंगल बागची भी शामिल थे। मुख्यमंत्री की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता प्रज्ञा सिंह बघेल ने पक्ष रखा।
उन्होंने दलील दी कि रांची सिविल कोर्ट के सीजेएम द्वारा संज्ञान लिये जाने और उसके बाद MP-MLA कोर्ट में कार्यवाही शुरू होने की प्रक्रिया विधि सम्मत नहीं है।
बहस के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले में हस्तक्षेप करते हुए विशेष अदालत की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया। कोर्ट ने ED को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में जवाब दाखिल करने को कहा है।
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट
इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने MP-MLA कोर्ट के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी।
सुप्रीम कोर्ट की इस अंतरिम राहत को मुख्यमंत्री के लिए बड़ी कानूनी उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
ED के जवाब के बाद ही मामले में अगली सुनवाई की दिशा तय होगी। फिलहाल, MP-MLA कोर्ट में चल रही कार्रवाई पर रोक से राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है।
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