झारखंड में कैदियों को घर बैठे पैसा भेज सकेंगे परिजन, रिश्वतखोरी और शोषण पर लगेगी रोक

Jan 8, 2026 - 12:44
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झारखंड में कैदियों को घर बैठे पैसा भेज सकेंगे परिजन, रिश्वतखोरी और शोषण पर लगेगी रोक

रांची.

झारखंड की जेलों में कैदियों के परिजन अब उन्हें ऑनलाइन पैसा ट्रांसफर कर सकेंगे। इसके लिए सुविधा शुरू की गई है। जेल आईजी सुदर्शन मंडल के अनुसार, एक्सिस बैंक के सहयोग से कैदियों के डिजिटल अकाउंट खोले गए हैं। अब परिजन घर बैठे पैसे जेल में बंद अपने परिवार के सदस्य को पैसे भेज सकेंगे। इससे रिश्वत जैसी बुराई पर लगाम लगेगी। परिजनों को जेल के गेट पर घंटों इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा। कैदी इन पैसों का उपयोग जेल कैंटीन से साबुन, तेल और बिस्किट जैसे सामान खरीदने के लिए कर सकेंगे।

भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम

जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने जानकारी दी कि रांची सहित झारखंड की अलग-अलग जेलों में अब कैदियों के परिवार ऑनलाइन पैसे भेज सकेंगे। जेलों में नकद लेन-देन के कारण होने वाले भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए यह व्यवस्था शुरू की गई है। इसके लिए जेल प्रशासन ने जरूरी बैंक डिटेल्स जारी कर दी हैं। इस नई सुविधा से अब कैदियों के रिश्तेदार घर बैठे ही उनके खाते में पैसे ट्रांसफर कर पाएंगे।

जेल कैंटीन के खाते में आएगा पैसा

अधिकारी ने बताया कि इस सुविधा से परिजनों को न तो जेल प्रशासन को रिश्वत देनी होगी और न ही मुलाकात के लिए गेट पर घंटों इंतजार करना पड़ेगा। यह नियम राज्य की सभी मुख्य जेलों में लागू कर दिया गया है। सभी कैदियों के लिए डिजिटल खाते खोले जा रहे हैं। अभी एक्सिस बैंक की मदद से ऑनलाइन भुगतान की सुविधा शुरू हुई है। अब कैदी के परिजन और दोस्त घर बैठे ही जेल कैंटीन के खाते में पैसा भेज सकेंगे।

जरूरत की चीजें खरीद पाएंगे कैदी

अधिकारी ने बताया कि इन पैसों का इस्तेमाल कर कैदी जेल की कैंटीन से अपनी जरूरत की चीजें खरीद पाएंगे। नई व्यवस्था के तहत हर कैदी का एक डिजिटल खाता बनाया गया हैए जिससे वे साबुनए तेलए टूथपेस्ट और बिस्किट जैसा सामान ले सकेंगे। पहले यह सारा काम नकद पैसों से होता थाए जिसमें अक्सर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलती थीं। अब डिजिटल सिस्टम होने से सारा हिसाब-किताब साफ रहेगा।

कैदियों के शोषण का डर होगा खत्म

इस योजना के लिए एक्सिस बैंक के साथ समझौता किया गया है और जेलों में जरूरी मशीनें लगा दी गई हैं। इस सुविधा के बदले विभाग बैंक को तय फीस दे रहा है। जेल प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से कैदियों को अपनी जरूरत का सामान समय पर मिल सकेगा। नकद लेन-देन बंद होने से पारदर्शिता आएगी। साथ ही किसी बिचौलिए की जरूरत न होने से कैदियों के शोषण का डर भी काफी हद तक खत्म हो जाएगा।

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